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दुनिया का इकलौता आइलैंड, जिसका हर 6 महीने में बदल जाता है देश, क्या जानते हैं..?

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मैड्रिड/पेरिस. दुनिया भर में दो देशों के बीच सीमाओं और जमीनी हिस्सों को लेकर जंग, तनाव और खून-खराबे की खबरें तो आम हैं. भारत-पाकिस्तान से लेकर दुनिया के कई देशों के बीच सीमा विवाद दशकों से चल रहे हैं. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इस दुनिया में एक ऐसा भी आइलैंड है, जिसे लेकर दो शक्तिशाली देशों के बीच कोई विवाद नहीं है, बल्कि दोनों देश बेहद प्यार और मर्जी से हर छह महीने में इसे एक-दूसरे को सौंप देते हैं? सुनकर हैरानी होगी, लेकिन फीजंट आइलैंड को लेकर ऐसा ही होता आ रहा है. यह दुनिया का इकलौता ऐसा अनोखा टापू है, जो साल के छह महीने फ्रांस के हिस्से में रहता है और बाकी के छह महीने स्पेन का हिस्सा बन जाता है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस दिलचस्प व्यवस्था को ‘फ्रांस और स्पेन के बीच बेहद धीमी गति से चल रहे पिंग-पॉन्ग (टेबल टेनिस) का खेल’ करार दिया था.

बता दें कि यह छोटा सा आइलैंड अटलांटिक महासागर में गिरने वाली बिदासोआ नदी के बीचों-बीच स्थित है, जो फ्रांस और स्पेन के बीच एक प्राकृतिक सीमा बनाती है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 1659 में इसी टापू पर फ्रांस और स्पेन के प्रतिनिधियों ने मुलाकात की थी और ट्रीटी ऑफ द पाइरेनीज नाम की एक ऐतिहासिक संधि पर दस्तखत किए थे, जिसने दोनों देशों के बीच चले आ रहे तीस साल के लंबे युद्ध को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था. इस संधि के तहत तय हुआ कि सीमा नदी के बिल्कुल बीच से गुजरेगी. नियम के मुताबिक तो इस 1.6 एकड़ के छोटे से टापू के दो टुकड़े होने चाहिए थे, जिसमें आधा फ्रांस का और आधा स्पेन का हक होता. लेकिन दोनों देशों ने एक अनोखा और शांतिपूर्ण रास्ता चुना और इस आइलैंड को एक ‘कंडोमिनियम’ (सह-प्रभुत्व वाला क्षेत्र) घोषित कर दिया.

क्या होता है कंडोमिनियम?
कंडोमिनियम एक ऐसा इलाका होता है जहां दो या दो से अधिक देश बिना अपनी राष्ट्रीय सीमाएं तय किए, बराबर का अधिकार और संप्रभुता रखते हैं, जैसे कि अंटार्कटिका. लेकिन फीजंट आइलैंड की बात सबसे जुदा है, क्योंकि यहां दोनों देश एक साथ शासन नहीं करते, बल्कि बारी-बारी से शासन संभालते हैं. 1 फरवरी से 31 जुलाई तक यह टापू आधिकारिक तौर पर स्पेन के नियंत्रण में रहता है और फिर 1 अगस्त से 31 जनवरी तक इस पर फ्रांस का झंडा लहराता है. फिलहाल स्पेन के नियंत्रण वाला यह आइलैंड आने वाले 1 अगस्त को अपना देश बदलकर फ्रांस के पास चला जाएगा. हर छह महीने में दोनों देशों के बड़े अधिकारी इस टापू पर एक छोटी सी सीक्रेट मीटिंग और पारंपरिक समारोह करते हैं, जहां दस्तावेजों का आदान-प्रदान होता है और टापू की चाबी दूसरे देश को सौंप दी जाती है.

इस संधि से पहले भी यह टापू दोनों देशों के राजाओं के लिए एक बेहद सुरक्षित और तटस्थ जगह हुआ करता था, जहां कैदियों की अदला-बदली और शाही शादियों के लिए मुलाकातों का आयोजन होता था. इसी टापू पर फ्रांस के राजा लुई XIII ने अपनी स्पेनिश दुल्हन एना ऑफ ऑस्ट्रिया से मुलाकात की थी, जबकि इसी समय उनके भाई फिलिप IV ने अपनी फ्रांसीसी दुल्हन एलिजाबेथ से पहली बार आंखें चार की थीं. आज के समय में इस वीरान टापू पर आम पर्यटकों और इंसानों के जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है. हालांकि, स्पेन के इरुन शहर से इसकी दूरी महज 100 फीट और फ्रांस के हेंडाये इलाके से केवल 150 फीट है, जिससे लोग नदी के किनारे खड़े होकर इस ऐतिहासिक और चमत्कारी ‘पिंग-पॉन्ग’ टापू का दीदार आसानी से कर सकते हैं.

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