
करीब एक साल तक दो शादीशुदा लोग अपने-अपने परिवारों से एक सच छिपाते रहे। दोनों ने अपने रिश्ते को छिपाने के लिए ऐसी तरकीब निकाली कि एक-दूसरे के घर आना-जाना भी आसान हो गया। कभी कोई रिश्तेदार बनकर घर पहुंचता, तो कभी दूसरा मेहमान बनकर दूसरे के यहां ठहरता। परिवारों को इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि जिस रिश्ते को वे पारिवारिक संबंध समझ रहे थे, उसके पीछे एक अलग ही कहानी चल रही थी। लेकिन एक रात उनकी यह चालाकी सामने आ गई और मामला खौफनाक अंजाम तक पहुंच गया।
एक मिस कॉल से शुरू हुई कहानी
यह कहानी छत्तीसगढ़ के एक गांव में रहने वाले योगेंद्र और उसकी पत्नी शीला की थी। योगेंद्र साइकिल स्टैंड का कारोबार करता था। परिवार में पत्नी के अलावा उनकी दो बेटियां भी थीं। बाहर से देखने पर परिवार सामान्य दिखाई देता था। योगेंद्र अपने काम में व्यस्त रहता था, जबकि शीला घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालती थी।
कहानी में मोड़ तब आया, जब करीब एक साल पहले शीला के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में रहने वाला शंकर था। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई। नंबर गलत लगने से शुरू हुआ संपर्क धीरे-धीरे लंबी बातचीत में बदल गया।
दोनों ने एक-दूसरे से अपनी जिंदगी के बारे में बातें साझा करनी शुरू कर दीं। कुछ समय बाद दोस्ती ने प्रेम संबंध का रूप ले लिया। परेशानी यह थी कि शीला और शंकर दोनों शादीशुदा थे। उनके अपने परिवार थे, लेकिन इसके बावजूद उनका संपर्क लगातार बढ़ता गया।
रिश्तेदार बनकर घर आने-जाने लगे दोनों
शीला से मिलने के लिए शंकर को मंदसौर से छत्तीसगढ़ के गांव तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बाहर मिलने के बजाय दोनों ने अपने संबंध छिपाने का तरीका निकाला। जब शंकर शीला के घर पहुंचता, तो उसे परिवार के सामने रिश्तेदार बताया जाता था।
शीला की बात पर भरोसा करके योगेंद्र भी शंकर को परिवार का परिचित समझता रहा। घर में मेहमान की तरह उसका आना-जाना होने लगा। इस तरह दोनों को मिलने का मौका मिलता रहा, जबकि परिवार को उनके वास्तविक संबंध की जानकारी नहीं थी।
इसी तरह एक बार शीला अपनी दोनों बेटियों के साथ मंदसौर में शंकर के घर गई। वह वहां कई दिनों तक रुकी। वहां भी उसकी पहचान रिश्तेदार के रूप में कराई गई। इस तरह दोनों ने अपने-अपने घरों में एक-दूसरे को लेकर ऐसा भ्रम बना रखा था कि किसी को उनके संबंधों पर संदेह न हो।
उस रात घर में सब कुछ सामान्य था
घटना की रात शंकर एक बार फिर शीला से मिलने उसके गांव पहुंचा। पहले की तरह उसे रिश्तेदार बताकर घर में ठहराया गया। शाम को परिवार के लोगों ने साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद सभी सोने चले गए।
घर में योगेंद्र, शीला, उनकी दोनों बेटियां और शंकर मौजूद थे। योगेंद्र को यही लगता रहा कि घर में आया मेहमान उसकी पत्नी का रिश्तेदार है। रात गुजरती रही और घर में सन्नाटा छा गया।
लेकिन देर रात करीब तीन बजे योगेंद्र की नींद खुली। उस समय उसने पत्नी शीला और शंकर को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। जिस व्यक्ति को वह रिश्तेदार समझकर अपने घर में जगह दे रहा था, उसके साथ पत्नी के संबंधों का सच सामने आ चुका था।
गुस्से में उठाया खौफनाक कदम
यह दृश्य देखकर योगेंद्र का गुस्सा बेकाबू हो गया। उसे पत्नी से मिले धोखे और घर में छिपाए गए इस रिश्ते का पता चल चुका था। गुस्से में उसने घर में रखी कुल्हाड़ी उठा ली और शंकर पर हमला कर दिया।
हमले में शंकर गंभीर रूप से घायल हो गया। शीला ने स्थिति बिगड़ते देख एंबुलेंस को सूचना दी और घायल शंकर को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। उसे उम्मीद थी कि समय रहते इलाज मिलने पर शंकर की जान बच सकती है।
हालांकि, अस्पताल पहुंचने के कुछ ही समय बाद शंकर की मौत हो गई। एक छिपे हुए रिश्ते का अंत इस तरह हुआ कि एक व्यक्ति की जान चली गई और कई जिंदगियां प्रभावित हो गईं।
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया
घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने योगेंद्र को हिरासत में लिया और हमले में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी जब्त कर ली। इसके बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि दोनों ने अपने संबंध छिपाने के लिए एक-दूसरे के परिवारों के सामने रिश्तेदार होने का बहाना बनाया था। इसी बहाने वे एक-दूसरे के घर आते-जाते रहे। लेकिन जिस सच को वे लंबे समय से छिपा रहे थे, वह आखिरकार सामने आ गया और एक रात ने पूरी कहानी बदल दी।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख पहले प्रकाशित एक सत्यकथा पर आधारित पुनर्लेखन है। इसमें घटनाओं का वर्णन उपलब्ध प्रकाशित जानकारी के आधार पर किया गया है। स्वतंत्र रूप से सभी तथ्यों की पुष्टि नहीं की गई है।



