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16,500 फीट की ऊंचाई​​​​​​ पर छिपा है मौत का राज! बर्फ पिघलते ही दिखने लगते हैं सैकड़ों इंसानी कंकाल..

16,500 फीट की ऊंचाई​​​​​​ पर छिपा है मौत का राज! बर्फ पिघलते ही दिखने लगते हैं सैकड़ों इंसानी कंकाल..

उत्तराखंड: पहाड़ों की खूबसूरती के बीच एक ऐसी झील भी मौजूद है, जिसका नाम सुनते ही रहस्य और रोमांच दोनों पैदा होते हैं। समुद्र तल से करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित रूपकुंड झील को आमतौर पर ‘कंकालों की झील’ कहा जाता है। वजह है यहां मिलने वाले इंसानी अवशेष, जो बर्फ पिघलने के बाद झील के आसपास दिखाई देने लगते हैं।

गर्मी आते ही खुलता है सदियों पुराना राज

ऊंचाई पर होने की वजह से रूपकुंड झील का बड़ा हिस्सा साल के अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है। जैसे-जैसे मौसम गर्म होता है और बर्फ पिघलने लगती है, झील के आसपास इंसानी हड्डियां और कंकाल नजर आने लगते हैं।

यही नजारा इस जगह को दुनिया की सबसे रहस्यमयी जगहों में शामिल करता है। आखिर इतने सारे लोग यहां कैसे पहुंचे और उनकी मौत किस वजह से हुई, यह सवाल लंबे समय से शोधकर्ताओं के लिए पहेली बना हुआ है।

पहले जापानी सैनिकों से जोड़ा गया था मामला

जब इस इलाके में इंसानी अवशेषों की जानकारी सामने आई, तब शुरुआती दौर में यह अनुमान लगाया गया कि शायद ये किसी युद्ध में मारे गए सैनिकों के अवशेष हो सकते हैं। लेकिन बाद की जांच में यह संभावना कमजोर पड़ गई, क्योंकि अवशेष काफी पुराने पाए गए।

इसके बाद रूपकुंड को लेकर रहस्य और गहरा होता चला गया।

मौत की वजह को लेकर कई कहानियां

रूपकुंड से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं में एक कहानी देवी नंदा से भी जुड़ी है। कहा जाता है कि पुराने समय में एक राजा अपने दल के साथ देवी के दर्शन के लिए पहाड़ों की ओर निकला था। यात्रा के दौरान लोगों से हुई कथित गलतियों से देवी नाराज हो गईं और भयंकर प्राकृतिक आपदा ने पूरे दल को अपनी चपेट में ले लिया।

हालांकि यह एक लोककथा है और इसे वैज्ञानिक प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जाता।

महामारी से लेकर बर्फीले तूफान तक की आशंका

इस झील में मिले अवशेषों को लेकर वैज्ञानिकों के सामने कई संभावनाएं रही हैं। कुछ मतों के अनुसार, किसी बीमारी या महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई होगी।

वहीं एक संभावना यह भी जताई गई कि लोग अचानक आए भयंकर ओलावृष्टि या बर्फीले तूफान की चपेट में आ गए होंगे। पहाड़ी इलाके में अचानक बदलने वाला मौसम ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकता है।

सैकड़ों लोगों के अवशेष मिलने का दावा

रूपकुंड के आसपास अब तक सैकड़ों इंसानी अवशेष मिलने की बात सामने आ चुकी है। इनमें पुरुषों और महिलाओं दोनों के अवशेष शामिल बताए जाते हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि शोध में यह संकेत भी मिले हैं कि यहां मिले सभी लोग एक ही स्थान या एक ही समुदाय से नहीं थे। अलग-अलग आनुवंशिक पृष्ठभूमि के लोगों के अवशेष मिलने से इस रहस्य को समझना और मुश्किल हो गया।

आखिर यहां पहुंचे कौन थे?

यही सवाल रूपकुंड को बाकी झीलों से अलग बनाता है। क्या यहां किसी धार्मिक यात्रा के दौरान लोगों की मौत हुई? क्या कोई प्राकृतिक आपदा इसका कारण बनी? या फिर अलग-अलग समय पर यहां आने वाले लोगों के साथ हादसे हुए?

शोध के बावजूद इस रहस्य की हर कड़ी पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है।

कब देख सकते हैं रूपकुंड?

रूपकुंड बेहद ऊंचाई पर स्थित है और यहां पहुंचना आसान नहीं है। यह इलाका ट्रैकिंग के लिए जाना जाता है। मौसम के हिसाब से यहां जाने का समय बदल सकता है, जबकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण रास्ते काफी मुश्किल हो जाते हैं।

इसी दुर्गम रास्ते और रहस्यमयी कहानी की वजह से रूपकुंड आज भी रोमांच पसंद करने वाले लोगों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है।

नोट: रूपकुंड से जुड़ी कई कहानियां स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। कंकालों की संख्या, उनकी उत्पत्ति और मृत्यु के कारणों को लेकर अलग-अलग शोधों में अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए हैं।

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