
सत्या रिपोर्ट | नॉलेज डेस्क: आपने अक्सर देखा होगा कि महंगी वाइन और व्हिस्की को लकड़ी के बड़े-बड़े बैरल में कई सालों तक रखा जाता है। आखिर शराब को कांच की बोतल या स्टील के टैंक में रखने के बजाय लकड़ी के बैरल में क्यों रखा जाता है? क्या इससे सिर्फ उसका स्वाद बदलता है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह भी है? दरअसल, लकड़ी के बैरल में शराब रखने से उसके स्वाद, रंग और खुशबू में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। यही वजह है कि शराब बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया में इनका खास महत्व है।
1. लकड़ी के बैरल से धीरे-धीरे पहुंचती है ऑक्सीजन
ओक की लकड़ी से बने बैरल में शराब रखने का एक प्रमुख कारण ऑक्सीजन के साथ होने वाली धीमी प्रतिक्रिया है। लकड़ी के बैरल के जरिए बहुत कम मात्रा में ऑक्सीजन का आदान-प्रदान हो सकता है। इससे शराब में मौजूद कुछ यौगिक धीरे-धीरे बदलते हैं और उसके स्वाद में संतुलन आ सकता है।
वाइन में यह प्रक्रिया टैनिन की कसैलापन महसूस कराने वाली विशेषता को नरम करने और स्वाद को अधिक संतुलित बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसका असर शराब के प्रकार, बैरल की उम्र और उसे कितने समय तक रखा गया है, इस पर निर्भर करता है।
2. वैनिला और कैरेमल जैसी खुशबू कैसे आती है?
लकड़ी के बैरल का सबसे दिलचस्प प्रभाव शराब के स्वाद और खुशबू पर पड़ता है। ओक की लकड़ी में ऐसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं, जो शराब के संपर्क में आने पर उसमें अलग-अलग सुगंध विकसित कर सकते हैं।
इसी वजह से बैरल में रखी कुछ वाइन और व्हिस्की में वैनिला, मसालों, नारियल, कैरेमल या भुनी हुई लकड़ी जैसी महक महसूस हो सकती है। बैरल को अंदर से गर्म करने की प्रक्रिया, जिसे टोस्टिंग कहते हैं, इन सुगंधों के विकास को प्रभावित करती है।
यही विशेषताएं कई प्रीमियम पेय पदार्थों के स्वाद को अलग पहचान देती हैं। हालांकि, हर बैरल में रखी शराब का स्वाद एक जैसा नहीं होता।
3. शराब के रंग में कैसे आता है बदलाव?
लकड़ी के बैरल में रखी शराब का रंग भी समय के साथ बदल सकता है। खासकर व्हिस्की जैसी स्पिरिट में ओक की लकड़ी से निकलने वाले रंगद्रव्य और अन्य यौगिक सुनहरे से लेकर गहरे भूरे रंग तक विकसित करने में योगदान देते हैं।
वाइन में रंग का बड़ा हिस्सा अंगूर की किस्म और उसे बनाने की प्रक्रिया से आता है। बैरल में रखने से उसका रंग और स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है, लेकिन हर वाइन का रंग लकड़ी से ही नहीं आता।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर तरह की शराब को उसका पूरा रंग बैरल से ही मिलता है।
4. बैरल में रखी शराब का कुछ हिस्सा हो जाता है गायब
लकड़ी के बैरल में लंबे समय तक शराब रखने के दौरान उसका कुछ हिस्सा वाष्प बनकर बाहर निकल सकता है। इस नुकसान को अंग्रेजी में Angel’s Share कहा जाता है।
कितनी मात्रा में शराब वाष्पित होगी, यह तापमान, नमी, बैरल के आकार और भंडारण की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। समय के साथ बची हुई शराब में स्वाद और सुगंध के यौगिक अधिक स्पष्ट महसूस हो सकते हैं।
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि जितनी पुरानी शराब होगी, वह उतनी ही बेहतर होगी। जरूरत से ज्यादा समय तक रखने पर स्वाद का संतुलन बिगड़ भी सकता है।
5. बैरल को अंदर से क्यों जलाया जाता है?
व्हिस्की के लिए इस्तेमाल होने वाले कई ओक बैरल को भरने से पहले अंदर से गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया को टोस्टिंग या चारिंग कहा जाता है। चारिंग में लकड़ी की अंदरूनी सतह को आग से जलाकर कार्बनयुक्त परत बनाई जाती है।
इससे लकड़ी के रासायनिक यौगिक बदलते हैं और शराब में धुएं, भुनी लकड़ी, कैरेमल या अन्य सुगंधों का विकास हो सकता है। चार की परत कुछ अवांछित यौगिकों को कम करने में भी भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, इसे ऐसा पूर्ण फिल्टर समझना सही नहीं है जो शराब के सभी हानिकारक पदार्थों को निकाल देता हो।
6. फिर शराब को कांच की बोतल में क्यों रखा जाता है?
लकड़ी के बैरल और कांच की बोतल का उद्देश्य अलग-अलग होता है। बैरल का इस्तेमाल मुख्य रूप से कुछ वाइन और स्पिरिट को परिपक्व करने तथा उनके स्वाद और सुगंध में बदलाव लाने के लिए किया जाता है। वहीं, कांच की बोतल में भरने के बाद शराब को सुरक्षित रखने और उसके गुणों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
हर शराब को बैरल में रखना जरूरी नहीं होता। कई वाइन और अन्य पेय पदार्थ स्टील के टैंकों में तैयार किए जाते हैं, ताकि उनका मूल स्वाद और ताजगी बरकरार रहे।
सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सामान्य वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। अलग-अलग पेय पदार्थों में बैरल के प्रभाव उनकी संरचना और निर्माण प्रक्रिया के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।



