राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पुलिस के हाथ अहम डिजिटल साक्ष्य लगे हैं. जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने गिरफ्तारी से पहले अपने मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिए और व्हाट्सएप चैट, फोटो व वीडियो डिलीट कर दिए, ताकि चोरी से जुड़े सबूत मिटाए जा सकें. हालांकि पुलिस ने सभी मोबाइल फोन कब्जे में लेकर उन्हें फॉरेंसिक जांच के मदद लेगी. अब डिलीट किया गया डेटा रिकवर कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी की रकम किस तरह बाहर निकाली जाती थी, किन लोगों के बीच उसका बंटवारा होता था.

मास्टरमाइंड कौन था?
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल की शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग मिले हैं. पुलिस का दावा है कि व्हाट्सएप पर चोरी की रकम बाहर निकालने, उसके बंटवारे और आपसी तालमेल को लेकर बातचीत के साक्ष्य मिले हैं. गणना के दौरान खुलकर बातचीत संभव नहीं होने के कारण आरोपी कथित तौर पर व्हाट्सएप मैसेज के जरिए एकदूसरे को निर्देश भेजते थे. अब फोरेंसिक विशेषज्ञ डिलीट की गई चैट, फोटो और वीडियो भी रिकवर करने में जुटे हैं.
जांच में यह भी सामने आया है कि कई मोबाइल फोन से जानबूझकर चैट हिस्ट्री और अन्य डेटा हटाया गया था. पुलिस का मानना है कि रिकवर होने वाला डिजिटल डेटा पूरे चोरी नेटवर्क की परतें खोल सकता है. यही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आगे विवेचना और एसआईटी की जांच का महत्वपूर्ण आधार बनेंगे.
पुलिस के हाथ लगे ये सबूत
पुलिस को कुछ ऐसे फोटो और वीडियो भी मिले हैं, जिनमें आरोपी एक साथ पार्टी करते और बड़ी मात्रा में नकदी के साथ दिखाई दे रहे हैं. जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह वही रकम हो सकती है, जिसे चढ़ावे से कथित तौर पर निकालने के बाद आपस में बांटा गया था.
उधर, मामले की जांच कर रही एसआईटी लगातार दूसरे दिन भी अयोध्या पहुंची और ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों से कई घंटे तक पूछताछ की. टीम ने चढ़ावे के ऑडिट और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर कई बिंदुओं पर जवाब मांगे. सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ाने की तैयारी है.
जवाबों से संतुष्ट नहीं है पुलिस
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अपनी प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार करते हुए जिम्मेदारी टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव पर डाल रहे हैं. हालांकि एसआईटी और स्थानीय पुलिस दोनों ही उनके जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और कई बिंदुओं का मिलान डिजिटल साक्ष्यों से किया जा रहा है.
इधर, स्थानीय पुलिस भी अपनी आपराधिक विवेचना तेज कर चुकी है. मंदिर प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों, गणनाकर्मियों, निजी सुरक्षा कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है. कुछ कर्मचारियों को आरोपी बनाया जा चुका है, जबकि बैंक कर्मियों की भूमिका की भी जांच चल रही है. पुलिस चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से पूरे वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है. माना जा रहा है कि डेटा रिकवर होने के बाद इस मामले में कई और लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है और जल्द ही नई गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.



