
ठाणे, महाराष्ट्र: एक नाबालिग बच्ची की गवाही पर भरोसा करते हुए विशेष पॉक्सो अदालत ने यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष बच्ची की गवाही को अविश्वसनीय साबित नहीं कर पाया। साथ ही आरोपी पर जुर्माना लगाते हुए पीड़िता के लिए अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया।
2019 में सामने आया था मामला
यह मामला दिसंबर 2019 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उस समय पांच साल की बच्ची महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में एक चॉल में अपने पड़ोसी के घर खेलने गई थी। आरोप था कि पड़ोस में रहने वाला व्यक्ति बच्ची को बहलाकर अपने घर ले गया। वहां उसने टेलीविजन चलाया और बच्ची का यौन उत्पीड़न किया।
घटना के बाद डरी हुई बच्ची अपने घर लौटी और अपनी मां को पूरी बात बताई। मां ने पहले आरोपी से इस बारे में सवाल किया और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
बच्ची की गवाही पर अदालत ने जताया भरोसा
विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश जी. टी. पवार ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा। अदालत के अनुसार, बचाव पक्ष ऐसा कोई ठोस आधार पेश नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि बच्ची को गवाही देने के लिए सिखाया गया था।
अदालत ने जांच के दौरान सामने आई कुछ कमियों पर भी विचार किया। हालांकि, न्यायाधीश ने माना कि मौके के पंचनामे में कथित गलती और बच्ची को मेडिकल जांच के लिए नहीं भेजे जाने जैसी कमियां इस मामले में अभियोजन के पूरे साक्ष्य को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
दो धाराओं में सजा, जुर्माना भी लगाया
अदालत ने आरोपी आकाश बाबूराव थोराट को पॉक्सो कानून की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए के तहत आरोपी को तीन साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। आरोपी पहले जितना समय हिरासत में बिता चुका है, उसे सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
पीड़िता को अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश
अदालत ने कुल 6,000 रुपये की जुर्माना राशि बच्ची को देने का आदेश दिया। इसके साथ ही ठाणे जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के लिए अतिरिक्त मुआवजा मंजूर करने पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
इस फैसले में अदालत ने बच्ची की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया। मामले में पीड़िता की पहचान से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।
सत्य रिपोर्ट की ओर से: यह खबर उपलब्ध अदालती फैसले और रिपोर्ट की गई जानकारी पर आधारित है। नाबालिग पीड़ितों की निजता और गरिमा की रक्षा करना आवश्यक है।



