
मैनपुरी, उत्तर प्रदेश: मैनपुरी में छह बच्चों की मां के घर छोड़कर चले जाने का मामला सामने आया है। महिला पर अपने रिश्ते के ममिया ससुर के साथ जाने का आरोप है। पति की शिकायत के बाद पुलिस ने तलाश कर महिला और उसके साथ गए व्यक्ति को बरामद कर लिया। लेकिन थाने में पति और बच्चों के सामने आने के बावजूद महिला ने घर लौटने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया।
फोन पर बातचीत के बाद बढ़ी नजदीकियां
जानकारी के मुताबिक, मैनपुरी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला की शाहजहांपुर जिले के कूंटा गांव निवासी एक व्यक्ति से बातचीत होती थी। बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति रिश्ते में महिला का ममिया ससुर लगता है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के बीच फोन पर लंबी बातचीत होने लगी और धीरे-धीरे उनके बीच नजदीकियां बढ़ गईं। आरोप है कि इसके बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला कर लिया।
15 अगस्त को अचानक घर से लापता हुई महिला
बताया गया है कि बीती 15 अगस्त को महिला अचानक घर से गायब हो गई। पत्नी के नहीं मिलने पर पति ने अपने स्तर पर काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
इसके बाद पति ने कोतवाली पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच और तलाश के दौरान महिला तथा उसके साथ गए व्यक्ति को बरामद कर लिया।
थाने में मां का आंचल पकड़कर रोते रहे बच्चे
गुरुवार को महिला के मिलने की सूचना पर उसका पति और बच्चे थाने पहुंचे। वहां बच्चों ने मां से घर लौटने की गुहार लगाई। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे मां का आंचल पकड़कर रोते रहे और उसे अपने साथ चलने के लिए मनाते रहे।
परिवार को उम्मीद थी कि बच्चों को इस तरह रोता देखकर महिला अपना फैसला बदल देगी, लेकिन उसने घर लौटने से साफ इनकार कर दिया।
पति के साथ रहने से किया इनकार, अदालत में पेश हुई महिला
महिला ने पुलिस और परिवार के सामने कहा कि वह अब अपने पति के पास वापस नहीं जाना चाहती और अपने साथ गए व्यक्ति के साथ ही रहना चाहती है।
महिला के फैसले के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और उसे अदालत में पेश कर दिया। अब आगे की कार्रवाई अदालत में दर्ज होने वाले उसके बयानों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
Satya Report Disclaimer: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। मामले में महिला के बयान और आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। सभी पक्षों की स्थिति स्पष्ट होने तक किसी भी आरोप को अंतिम तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।



