
जब भी दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ का नाम पूछा जाता है, ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ही नाम आता है—माउंट एवरेस्ट। नेपाल और तिब्बत की सीमा पर खड़ा एवरेस्ट समुद्र तल से करीब 8,848.86 मीटर ऊंचा है और लंबे समय से इसे दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माना जाता है।
लेकिन कहानी यहां थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। अगर किसी पहाड़ की ऊंचाई उसके समुद्र तल से शिखर तक नहीं, बल्कि उसके वास्तविक आधार से चोटी तक मापी जाए, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। इस पैमाने पर माउंट एवरेस्ट नंबर-1 नहीं रहता।
समुद्र के अंदर छिपा है विशाल पहाड़
दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ का खिताब इस मापदंड पर माउना केआ को मिलता है, जो अमेरिका के हवाई द्वीप पर स्थित है। यह एक विशाल और निष्क्रिय ज्वालामुखी है।
समुद्र तल से माउना केआ की ऊंचाई करीब 4,205 मीटर है। पहली नजर में यह एवरेस्ट से काफी छोटा लगता है, लेकिन इसकी असली ऊंचाई समुद्र के नीचे छिपी हुई है।
माउना केआ का आधार प्रशांत महासागर की गहराई में है। आधार से लेकर शिखर तक इसकी कुल ऊंचाई लगभग 10,205 मीटर बैठती है। यानी इस तरीके से मापने पर यह एवरेस्ट से करीब 1.4 किलोमीटर ज्यादा ऊंचा हो जाता है।
दरअसल, माउना केआ का करीब 6 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के पानी के नीचे मौजूद है। यही वजह है कि जमीन से देखने पर इसकी वास्तविक विशालता का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
नाम का मतलब भी है खास
माउना केआ नाम हवाईयन भाषा से आया है और इसका अर्थ लगभग ‘सफेद पहाड़’ माना जाता है। इसके ऊपरी हिस्से में सर्दियों के दौरान बर्फ भी दिखाई दे सकती है।
यह एक निष्क्रिय ज्वालामुखी है। माना जाता है कि यह हजारों वर्षों से नहीं फटा है, हालांकि वैज्ञानिक भविष्य में इसकी गतिविधि की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते।
माउना केआ की एक और खासियत है। इसके शिखर पर दुनिया की कई महत्वपूर्ण खगोलीय वेधशालाएं मौजूद हैं। ऊंचाई और वातावरण की परिस्थितियों के कारण यहां से अंतरिक्ष का अध्ययन करना काफी सुविधाजनक माना जाता है।
फिर एवरेस्ट का क्या स्थान है?
अब सवाल उठता है कि अगर माउना केआ आधार से शिखर तक सबसे ऊंचा है, तो एवरेस्ट को दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ क्यों कहा जाता है?
इसका कारण है ऊंचाई मापने का तरीका।
आम तौर पर पर्वत की ऊंचाई समुद्र तल से उसके शिखर तक मापी जाती है। इस पैमाने पर माउंट एवरेस्ट करीब 8,848.86 मीटर ऊंचा है और दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी बना हुआ है।
यानी एवरेस्ट को गलत कहना भी सही नहीं होगा। वह समुद्र तल से दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है, जबकि माउना केआ अपने आधार से शिखर तक सबसे ऊंचे पहाड़ों में सबसे आगे है।
एक और पहाड़ भी है बेहद खास
इसी कहानी में हवाई का एक और विशाल ज्वालामुखी माउना लोआ भी आता है। आधार से शिखर तक इसकी कुल ऊंचाई लगभग 9,170 मीटर मानी जाती है। इसका बड़ा हिस्सा भी समुद्र के नीचे मौजूद है।
लेकिन दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ों की चर्चा केवल इन दो नामों तक सीमित नहीं है। इक्वाडोर का माउंट चिम्बोराजो भी अपनी एक अनोखी वजह से बेहद खास है।
पृथ्वी के केंद्र से सबसे दूर चिम्बोराजो
चिम्बोराजो समुद्र तल से एवरेस्ट जितना ऊंचा नहीं है और आधार से शिखर तक भी माउना केआ से पीछे है। फिर भी इसके पास एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसे जानकर आप हैरान हो सकते हैं।
पृथ्वी पूरी तरह गोल गेंद जैसी नहीं है। वह भूमध्य रेखा के आसपास थोड़ी उभरी हुई है। चिम्बोराजो भूमध्य रेखा के काफी करीब स्थित है। इसलिए इसका शिखर पृथ्वी के केंद्र से मापा जाए तो वह एवरेस्ट के शिखर से भी ज्यादा दूर निकल जाता है।
इस तरह तीन अलग-अलग मापदंडों पर तीन अलग-अलग पहाड़ खास बन जाते हैं।
समुद्र तल से ऊंचाई: माउंट एवरेस्ट
आधार से शिखर तक ऊंचाई: माउना केआ
पृथ्वी के केंद्र से सबसे दूर शिखर: माउंट चिम्बोराजो
तो अगली बार कोई पूछे कि दुनिया का सबसे ऊंचा पहाड़ कौन सा है, तो सिर्फ एवरेस्ट बोलने से पहले यह जरूर पूछिए—किस तरीके से ऊंचाई माप रहे हैं?



