NewAge Beauty Brands: ब्यूटी केयर के बाजार में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. वित्त वर्ष 2026 में नए जमाने के ब्यूटी ब्रांड्स ने कमाई के मामले में शानदार प्रदर्शन किया है. कई कंपनियों की बिक्री दोगुनी से लेकर तीन गुनी तक बढ़ गई है. ये नए ब्रांड्स ग्राहकों की खास परेशानियों को ठीक करने वाले साइंसबेस्ड प्रोडक्ट्स बना रहे हैं. साथ ही युवाओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिए नए तरीके से मार्केटिंग कर रहे हैं. इसी रणनीति ने इन नई कंपनियों को बाजार में तेजी से आगे बढ़ाया है.

फॉक्सटेल से लेकर डॉट एंड की तक की छप्परफाड़ कमाई
कंपनी के दर्ज दस्तावेजों के मुताबिक, फॉक्सटेल का ऑपरेटिंग रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026 में लगभग दोगुना होकर 383 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इससे पिछले साल कंपनी की कमाई 199 करोड़ रुपये थी. वहीं, हाल ही में लॉरियल द्वारा खरीदे गए ब्रांड इनोविस्ट का रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 686 करोड़ रुपये हो गया. जून से सितंबर के बीच इसकी मासिक कमाई में सालाना आधार पर 50 फीसदी की बढ़त देखी गई.
नायका के मालिकाना हक वाले ब्रांड डॉट एंड की ने भी अपनी कमाई को दोगुना करते हुए 799 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया है. इसी तरह मार्च 31 को खत्म हुए साल में पिलग्रिम का रेवेन्यू 69 फीसदी बढ़कर 690 करोड़ रुपये रहा. डीकंस्ट्रक्ट ने भी 32 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है, जिससे इसकी कमाई 168 करोड़ रुपये हो गई.
पुराने दिग्गज ब्रांड्स के सामने टिके रहने की चुनौती
एक तरफ नए ब्रांड्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ करीब एक दशक पहले शुरू हुए पुराने डी2सी ब्रांड्स को अपना कारोबार बढ़ाने में मुश्किल हो रही है. शुगर कॉस्मेटिक्स, मामाअर्थ, वाउ स्किन साइंस या एमकैफीन जैसी पुरानी कंपनियां इस समय सुस्त रफ्तार से जूझ रही हैं.
बाजार के जानकारों का मानना है कि कड़ी टक्कर के बीच नए प्रोडक्ट्स में इनोवेशन की कमी के चलते पुराने ब्रांड्स की रफ्तार धीमी पड़ी है. उदाहरण के लिए, साल 2015 में शुरू हुए शुगर कॉस्मेटिक्स का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2026 में घटकर 300 से 350 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2025 में ये 404 करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2024 में कंपनी की कमाई 505 करोड़ रुपये रही थी.
कम प्रोडक्ट्स रखकर भरोसे से जीता बाजार
नए ब्रांड्स अंधाधुंध नए सामान उतारने के बजाय गिनेचुने प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं. Z47 के निवेश वाली कंपनी फॉक्सटेल सनस्क्रीन, मास्क, फेस वॉश के अलावा मॉइस्चराइजर बेचती है. कंपनी की फाउंडर रोमिता मजूमदार ने बताया कि उन्होंने साल भर में बहुत ज्यादा नए प्रोडक्ट्स लॉन्च नहीं किए. इसके बजाय कंपनी ने अपने उन्हीं सीमित प्रोडक्ट्स पर ग्राहकों का भरोसा मजबूत किया, जिन्होंने ब्रांड को पहचान दिलाई. उनका मकसद कम प्रोडक्ट्स रखकर हर आइटम से ज्यादा रेवेन्यू कमाना है.
छोटे शहरों तक पहुंची ऑनलाइन शॉपिंग की लहर
डीकंस्ट्रक्ट की फाउंडर मालिनी अदापुरेड्डी के मुताबिक, उनकी कंपनी नए ट्रेंड्स के पीछे भागने के बजाय सिर्फ एक कैटेगरी यानी सनस्क्रीन पर फोकस कर रही है. अब ये बाजार सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा है. टियर2 या टियर3 शहरों के ग्राहक भी बड़े शहरों जैसा ही कंटेंट देख रहे हैं. ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा ने छोटे शहरों तक सामान पहुंचाना बेहद आसान कर दिया है.
मार्केट इंटेलिजेंस फर्म 1लैटिस के सीनियर डायरेक्टर आशीष धीर ने इस बदलाव की वजह साफ की है. उनके मुताबिक, नए जमाने के ब्रांड्स ग्राहकों की खास समस्याओं को सुलझाकर डिमांड पकड़ रहे हैं. इसके उलट आम बाजार पर फोकस करने वाले बड़े ब्रांड्स उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहे हैं.



