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‘मरने के बाद न रहे कर्ज’… उन्नाव के शख्स ने खुद का कराया पिंडदान, 500 लोगों को खिलाया भोज

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक व्यक्ति ने जीते ही अपना तेरहवीं संस्कार और पिंडदान कर डाला. इतना ही नहीं, उसने पूरे गांव को भोज भी कराया. अब यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. खुद का पिंडदान और तेरहवीं संस्कार करवाने वाला व्यक्ति ने बताया कि जीते जी मेरे ऊपर किसी का कर्ज नहीं रहा और मरने के बाद भी कर्ज साथ न जाए इसलिए ऐसा किया.

‘मरने के बाद न रहे कर्ज’… उन्नाव के शख्स ने खुद का कराया पिंडदान, 500 लोगों को खिलाया भोज
‘मरने के बाद न रहे कर्ज’… उन्नाव के शख्स ने खुद का कराया पिंडदान, 500 लोगों को खिलाया भोज

जानकारी के अनुसार, उन्नाव जिले के फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के पीथनहार गांव निवासी 56 वर्षीय रवींद्र प्रसाद नाम के एक व्यक्ति ने पारिवारिक परिस्थितियों के चलते खुद का श्राद्ध कर्म करवा लिया. 8 मई को पीथनहार गांव में उस समय लोग हैरान रह गए, जब रवींद्र ने जीते जी अपनी तेरहवीं भोज का निमंत्रण सबको भिजवा दिया. इसके लिए राम प्रसाद ने बाकायदा शोक संदेश कार्ड भी छपवाया थे, जिसमें तेरहवीं और पिंडदान के आयोजन का जिक्र किया गया था.

खुद के सामने कराया श्राद्ध कर्म

श्राद्ध कर्म के लिए 9 मई को पंडित बुलाए गए. रवींद्र के सामने ही विधिविधान के साथ पूजा कराई गई. इसके बाद सभी को तेरहवीं का भोज कराया गया. रवींद्र प्रसाद ने अपने तेरहवीं में पांच सौ लोगों को न्योता दिया था और खाना बनाने के लिए कई हलवाई लगाए गए थे. इतना ही नहीं व्यवस्था भी चाकचौबंद की गई थी. तेरहवीं कार्यक्रम में लोगों को खाना खिलाने के लिए कुर्सी मेज और टेंट भी लगवाया था.

जानें क्यों की खुद की तेरहवीं

बताया जा रहा कि रवींद्र प्रसाद 40 साल से परिवार से अलग रह रहे थे. उन्होंने शादी भी नहीं की है. रवींद्र ने बताया कि जीते जी मेरे ऊपर किसी का कर्ज नहीं रहा. मरने के बाद मेरे ऊपर किसी का कर्ज न रहे इसलिए जीते जी खुद की तेरहवीं की है. एक दिन सोते समय विचार किया खुद की तेरहवीं कर देनी चाहिए, ताकि मरने के बाद किसी को हमारा श्राद्ध न करना पड़े.

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