
अच्छी सेहत के लिए खानपान और व्यायाम जितने जरूरी हैं, उतनी ही जरूरी पर्याप्त और अच्छी नींद भी है। कई लोग अपनी डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन देर रात तक मोबाइल चलाना, सोने का समय बार-बार बदलना और खर्राटों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक नींद की गुणवत्ता खराब रहने से ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
नींद के दौरान शरीर कई जरूरी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यदि नींद बार-बार टूटती है या पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है। आइए जानते हैं सोने से जुड़ी पांच ऐसी आदतों के बारे में, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।
1. रात में बार-बार नींद टूटना
यदि रात में बार-बार नींद खुलती है और सुबह उठने पर भी थकान बनी रहती है, तो इसकी वजह जानना जरूरी है। कभी-कभार नींद खुलना सामान्य हो सकता है, लेकिन लगातार ऐसा होना तनाव, अनिद्रा, दर्द, बार-बार पेशाब आने या स्लीप एपनिया जैसी समस्या से जुड़ा हो सकता है।
लंबे समय तक खराब नींद रहने पर ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, केवल रात में नींद खुलने से यह साबित नहीं होता कि दिल कमजोर हो रहा है।
क्या करें: सोने और जागने का समय नियमित रखें, रात में कैफीन से बचें और सोने से पहले शांत माहौल बनाएं। अगर नींद बार-बार टूटती है या दिन में बहुत ज्यादा नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
2. रात में तेज खर्राटे लेना
खर्राटे लेना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन तेज खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया नामक समस्या का संकेत हो सकता है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार बाधित होती है।
इस समस्या के कारण शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है और नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। इसका संबंध हाई ब्लड प्रेशर तथा हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से भी पाया गया है।
किन संकेतों पर ध्यान दें?
- तेज और नियमित खर्राटे आना।
- सोते समय सांस रुकती हुई महसूस होना।
- रात में हांफते हुए या घुटन के साथ जागना।
- सुबह सिरदर्द और दिनभर थकान रहना।
ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी की सलाह दी जा सकती है।
3. अलार्म बजते ही अचानक उठना
सुबह अलार्म की आवाज से अचानक जागने पर कुछ समय के लिए हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ सकते हैं। यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया भी हो सकती है। केवल अलार्म से झटके में जागने को हृदय की कमजोरी या शरीर की रिकवरी अधूरी रहने का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।
समस्या तब हो सकती है, जब आप रोज पर्याप्त नींद पूरी किए बिना उठते हैं या सोने-जागने का समय लगातार बदलता रहता है।
क्या करें: ऐसा अलार्म चुनें जिसकी आवाज बहुत तेज या डराने वाली न हो। सुबह उठने के लिए पर्याप्त समय रखें और नियमित नींद की आदत बनाएं। वयस्कों के लिए आमतौर पर हर रात 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।
4. पेट के बल सोना
पेट के बल सोना हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक नहीं होता। हालांकि, कुछ लोगों में इस स्थिति के कारण गर्दन में खिंचाव, पीठ में दर्द या असुविधा हो सकती है। यदि इस वजह से नींद प्रभावित होती है, तो सोने की दूसरी स्थिति आजमाई जा सकती है।
करवट लेकर सोना कई लोगों के लिए आरामदायक रहता है। वहीं, खर्राटों या कुछ प्रकार के स्लीप एपनिया में करवट लेकर सोने से लक्षणों में मदद मिल सकती है। लेकिन किसी एक स्लीपिंग पोजीशन को सभी लोगों के लिए सबसे अच्छा या सबसे खराब बताना सही नहीं है।
क्या करें: ऐसी स्थिति में सोएं जिसमें गर्दन और पीठ को आराम मिले तथा सांस लेने में परेशानी न हो। यदि सोते समय सांस रुकती है या घुटन महसूस होती है, तो केवल पोजीशन बदलने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराएं।
5. बहुत देर से सोना और समय नियमित न रखना
हर दिन अलग-अलग समय पर सोने और जागने से शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। अनियमित नींद, कम नींद और देर रात तक तेज रोशनी वाली स्क्रीन देखने की आदत नींद आने में बाधा डाल सकती है।
लंबे समय तक खराब नींद और अनियमित दिनचर्या का संबंध हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे और हृदय संबंधी समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से पाया गया है। हालांकि, देर से सोना अपने आप में हर व्यक्ति के लिए बीमारी का कारण नहीं है; कुल नींद, नियमितता और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण हैं।
नींद सुधारने के लिए अपनाएं ये आदतें:
- रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और जागें।
- सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
- शाम और रात में चाय, कॉफी तथा अन्य कैफीन वाले पेय सीमित रखें।
- बेडरूम को शांत, अंधेरा और आरामदायक बनाएं।
- दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें और सोने से ठीक पहले भारी भोजन करने से बचें।
दिल की सेहत के लिए नींद को न करें नजरअंदाज
अच्छी नींद हृदय स्वास्थ्य सहित संपूर्ण सेहत के लिए जरूरी है। यदि लगातार थकान रहती है, तेज खर्राटे आते हैं, नींद में सांस रुकती है या ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं रहता, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
सीने में दबाव या दर्द, अचानक सांस फूलना, ठंडा पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। सोने की किसी एक आदत से हृदय रोग की पुष्टि नहीं होती। लगातार नींद की समस्या या हृदय संबंधी लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।



