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बढ़ती उम्र में​​​ शरीर को फिट और लचीला रख सकते हैं ये 8 आसान योगासन, जोड़ों की जकड़न और कमजोरी में मिलेगी राहत

बढ़ती उम्र में​​​ शरीर को फिट और लचीला रख सकते हैं ये 8 आसान योगासन, जोड़ों की जकड़न और कमजोरी में मिलेगी राहत

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं। मांसपेशियों की ताकत कम होना, जोड़ों में अकड़न, शरीर का संतुलन बिगड़ना और जल्दी थकान महसूस होना आम समस्याएं हैं। इनका असर चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के दूसरे कामों पर भी पड़ सकता है।

ऐसे में नियमित योग अभ्यास शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने में मदद कर सकता है। योग के कुछ आसान आसन मांसपेशियों को मजबूत करने, संतुलन सुधारने और जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, उम्रदराज लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही योग करना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे 8 आसान योगासन, जिन्हें जरूरत के अनुसार कुर्सी या दीवार का सहारा लेकर किया जा सकता है।

बढ़ती उम्र में योग क्यों है जरूरी?

उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक गतिविधियां कम होने पर मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन प्रभावित हो सकता है। नियमित और हल्का योग अभ्यास शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है।

योग से मिलने वाले संभावित फायदे हैं:

  • शरीर के लचीलेपन और गतिशीलता को बनाए रखने में मदद।
  • पैरों और शरीर के मध्य हिस्से की मांसपेशियों को मजबूती।
  • संतुलन और शरीर पर नियंत्रण बेहतर करने में सहायता।
  • तनाव कम करने और मानसिक शांति बनाए रखने में मदद।
  • रोजमर्रा के कामों को आसानी से करने की क्षमता बनाए रखने में सहयोग।

1. ताड़ासन

ताड़ासन शरीर की मुद्रा और संतुलन सुधारने के लिए उपयोगी शुरुआती आसन है। इसे करने के लिए दोनों पैरों को पास या कूल्हों की चौड़ाई पर रखकर सीधे खड़े हों। कंधों को ढीला रखें और रीढ़ को सीधा रखते हुए सिर को ऊपर की ओर खींचने का प्रयास करें।

सुविधा के अनुसार हाथों को ऊपर उठा सकते हैं। शुरुआत में संतुलन बनाने के लिए दीवार या कुर्सी का सहारा लें। यह आसन शरीर की मुद्रा पर ध्यान देने और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।

2. कुर्सी की सहायता से उत्कटासन

यह आसन जांघों, कूल्हों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकता है। इसके लिए एक मजबूत कुर्सी अपने पीछे रखें और उसके सामने खड़े हो जाएं। पैरों को कूल्हों की चौड़ाई पर रखें।

अब धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ते हुए कुर्सी पर बैठने जैसी स्थिति बनाएं। जरूरत हो तो कुर्सी का सहारा लेकर बैठें और फिर धीरे-धीरे खड़े हो जाएं। इस दौरान पीठ को सहज रूप से सीधा रखें और घुटनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।

3. मार्जरी-बितिलासन (कैट-काउ पोज)

यह आसन रीढ़ की गतिशीलता बनाए रखने और कमर की जकड़न कम करने में सहायक हो सकता है। इसे करने के लिए हाथों और घुटनों के बल आ जाएं। हाथ कंधों के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे रखें।

सांस लेते हुए पेट को हल्का नीचे करें और छाती को आगे उठाएं। इसके बाद सांस छोड़ते हुए पीठ को धीरे-धीरे गोल करें और ठुड्डी को हल्का अंदर की ओर लाएं। इस प्रक्रिया को अपनी सुविधा के अनुसार कुछ बार दोहराएं।

अगर घुटनों में दर्द है या जमीन पर बैठना मुश्किल है, तो कुर्सी पर बैठकर भी रीढ़ को धीरे-धीरे आगे-पीछे मोड़ने का अभ्यास किया जा सकता है।

4. बैठकर आगे झुकने का आसन

यह आसन जांघों और पीठ की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव देने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए जमीन पर आराम से बैठकर दोनों पैरों को सामने फैलाएं। अगर जमीन पर बैठना मुश्किल हो, तो कुर्सी पर बैठकर भी इसका आसान रूप कर सकते हैं।

अब कमर से धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। हाथों को घुटनों या पिंडलियों पर रखें। शरीर पर जोर न डालें और पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश जबरदस्ती न करें। हल्का खिंचाव महसूस होने पर वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।

5. सहारे के साथ वृक्षासन

वृक्षासन शरीर का संतुलन बेहतर करने के लिए किया जाता है। बढ़ती उम्र में संतुलन बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे गिरने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

इस आसन के लिए दीवार या मजबूत कुर्सी के पास सीधे खड़े हों। एक पैर पर धीरे-धीरे वजन डालें और दूसरे पैर को उठाकर उसका पंजा जमीन पर रखते हुए एड़ी को दूसरे टखने के पास टिकाएं। संतुलन ठीक रहने पर पैर को पिंडली के पास भी रख सकते हैं।

हाथों को छाती के सामने जोड़ें या कुर्सी का सहारा बनाए रखें। शुरुआत में पैर को जांघ पर रखने की जरूरत नहीं है। घुटने के जोड़ पर पैर न टिकाएं।

6. सेतु बंधासन (ब्रिज पोज)

यह आसन कूल्हों, जांघों और कमर के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़कर पैरों को जमीन पर रखें।

अब सांस लेते हुए धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड आरामदायक स्थिति में रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस नीचे आ जाएं। इस दौरान गर्दन पर दबाव न डालें।

अगर कमर या घुटनों में दर्द होता है, तो इस आसन को करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।

7. बैठकर शरीर को मोड़ने का आसन

यह आसन रीढ़ की हल्की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसे करने के लिए कुर्सी पर सीधे बैठें और दोनों पैरों को जमीन पर रखें।

अब कमर को सहज रखते हुए शरीर को धीरे-धीरे एक ओर मोड़ें। हाथ को कुर्सी के किनारे या जांघ पर रख सकते हैं। कुछ सेकंड रुकने के बाद वापस सामने आएं और दूसरी ओर भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

ध्यान रखें कि शरीर को झटके से न मोड़ें। यह आसन पेट की चर्बी घटाने या पाचन संबंधी बीमारी का इलाज नहीं है।

8. शवासन

शवासन योग अभ्यास के बाद शरीर को आराम देने के लिए किया जाता है। इसके लिए पीठ के बल आराम से लेट जाएं। दोनों हाथों और पैरों को सहज स्थिति में रखें। आंखें बंद करके सामान्य तरीके से सांस लें और शरीर को ढीला छोड़ दें।

कुछ मिनट तक इसी स्थिति में रहें। अगर जमीन पर लेटना मुश्किल हो, तो पीठ को सहारा देकर आरामदायक कुर्सी पर बैठकर भी कुछ देर गहरी और सहज सांसों पर ध्यान दे सकते हैं।

कितनी देर और कितनी बार करें योग?

शुरुआत में रोजाना 10 से 15 मिनट का हल्का अभ्यास पर्याप्त हो सकता है। शरीर की क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है। सप्ताह में 3 से 5 दिन अभ्यास करना एक अच्छा शुरुआती लक्ष्य हो सकता है।

योग करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • शुरुआत हमेशा हल्के वार्मअप से करें।
  • संतुलन वाले आसन दीवार या मजबूत कुर्सी के सहारे करें।
  • सांस को रोककर योग न करें।
  • किसी भी आसन में दर्द या चक्कर महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं।
  • शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।
  • नियमित अभ्यास के साथ चलना और हल्की मांसपेशी मजबूत करने वाली गतिविधियां भी शामिल करें।

किन लोगों को योग करते समय विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

जिन लोगों को घुटनों, कमर या गर्दन में लगातार दर्द रहता है, उन्हें योगासन चुनने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट या योग्य योग प्रशिक्षक की सलाह लेनी चाहिए। ऑस्टियोपोरोसिस, हाल ही में हुई सर्जरी, गंभीर हृदय रोग या संतुलन से जुड़ी समस्या होने पर भी बिना मार्गदर्शन के कठिन आसन नहीं करने चाहिए।

निष्कर्ष

बढ़ती उम्र में शरीर को सक्रिय, मजबूत और लचीला बनाए रखने के लिए नियमित योग अभ्यास उपयोगी हो सकता है। ताड़ासन, कुर्सी की सहायता से उत्कटासन, वृक्षासन और शवासन जैसे आसान अभ्यास अपनी क्षमता के अनुसार किए जा सकते हैं। हालांकि, योग जोड़ों के हर दर्द या कमजोरी का इलाज नहीं है। सही आसन चुनना, धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और फिटनेस संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी पुरानी बीमारी, चोट या लगातार दर्द की स्थिति में योग शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।

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