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हार्ट​​​ की धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ा​​​​​​ सकती हैं आपकी रोजमर्रा की ये आदतें, कार्डियोलॉजिस्ट ने बताए बचाव के 10 तरीके

हार्ट​​​ की धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ा​​​​​​ सकती हैं आपकी रोजमर्रा की ये आदतें, कार्डियोलॉजिस्ट ने बताए बचाव के 10 तरीके

दिल की सेहत का सीधा संबंध हमारी रोजमर्रा की आदतों और खानपान से होता है। थाली में शामिल ज्यादा तली-भुनी चीजें, मिठाइयां, नमक और प्रोसेस्ड फूड धीरे-धीरे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर संतुलित डाइट और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिल की सेहत के लिए जरूरी मानते हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. बिमल झांझेर ने भी दिल को स्वस्थ रखने के लिए खानपान और जीवनशैली में सुधार पर जोर दिया है। उनके बताए सुझावों के मुताबिक, कुछ आदतों में बदलाव करके हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

दरअसल, हार्ट अटैक के कई मामलों में दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल से बना प्लाक जमा होने लगता है। इससे धमनियां संकरी हो सकती हैं। कई बार प्लाक की सतह फटने पर खून का थक्का बनता है, जो रक्त प्रवाह को अचानक रोक सकता है। यह स्थिति हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।

दिल की धमनियों में ब्लॉकेज क्यों बनता है?

दिल की धमनियों में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। इसमें कोलेस्ट्रॉल, फैट और अन्य पदार्थ धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर जमा होने लगते हैं। समय के साथ इससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

इसके जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में खराब खानपान, ज्यादा एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल हैं। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी धमनियों को नुकसान पहुंचाता है।

हार्ट अटैक का खतरा कम करने के लिए अपनाएं ये 10 उपाय

1. कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर रखें नजर

खून में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से धमनियों में प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं। रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा हुआ मिलने पर खानपान, व्यायाम और जरूरत के अनुसार दवाओं से इसे नियंत्रित करें।

2. ट्राइग्लिसराइड को नियंत्रित रखें

ट्राइग्लिसराइड खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट है। इसका स्तर बढ़ने पर हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। ज्यादा चीनी, मीठे पेय, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शराब और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से ट्राइग्लिसराइड बढ़ सकता है।

इसे नियंत्रित रखने के लिए मिठाइयों, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें। साबुत अनाज, फल, सब्जियां और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

3. रोजाना वॉक और एक्सरसाइज करें

दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। रोजाना तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है।

स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य तौर पर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है। शुरुआत धीरे-धीरे करें और अपनी उम्र तथा स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यायाम चुनें।

4. योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें

योग और प्राणायाम तनाव कम करने, शरीर को सक्रिय रखने और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। नियमित योगाभ्यास के साथ हल्की शारीरिक गतिविधि भी जारी रखें। ध्यान रखें कि योग हृदय रोगों की दवाओं या जरूरी चिकित्सा जांच का विकल्प नहीं है।

5. तनाव को नजरअंदाज न करें

लगातार तनाव में रहने से नींद, ब्लड प्रेशर और रोजमर्रा की जीवनशैली प्रभावित हो सकती है। इसलिए तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन, योग, पसंदीदा गतिविधियों और पर्याप्त आराम का सहारा लें।

अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं, तो विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच न करें।

6. गुस्से और नकारात्मक भावनाओं को संभालें

बार-बार गुस्सा आना और भावनात्मक तनाव शरीर पर असर डाल सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ देर शांत बैठना, गहरी सांस लेना और नियमित ध्यान करना मददगार हो सकता है। हालांकि, केवल गुस्सा नियंत्रित कर लेने से हार्ट अटैक का खतरा खत्म नहीं होता। इसके लिए अन्य जोखिम कारकों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

7. हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों को पहचानें

दिल की बीमारी के जोखिम और हार्ट अटैक के लक्षणों की जानकारी होना जरूरी है। सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर, मतली और दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।

कुछ लोगों, खासकर महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों में लक्षण अलग या कम स्पष्ट भी हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर इंतजार न करें और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

8. नियमित हेल्थ चेकअप कराएं

ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन की समय-समय पर जांच कराते रहें। इससे हृदय रोगों से जुड़े जोखिमों का पता लगाने में मदद मिलती है। कितनी बार जांच करानी है, यह आपकी उम्र, पारिवारिक इतिहास और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

9. धूम्रपान और तंबाकू से बनाएं दूरी

सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पाद हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके सेवन से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। दिल की सेहत के लिए तंबाकू पूरी तरह छोड़ना सबसे जरूरी कदमों में से एक है।

10. डॉक्टर की सलाह और दवाओं का पालन करें

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या पहले से कोई हृदय रोग है, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं बंद न करें या उनकी खुराक न बदलें।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेस टेस्ट या एंजियोग्राफी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। हर व्यक्ति को इन सभी जांचों की जरूरत नहीं होती। कौन-सी जांच जरूरी है, इसका फैसला डॉक्टर लक्षणों और जोखिम के आधार पर करते हैं।

हार्ट अटैक से बचाव के लिए डाइट में क्या बदलाव करें?

दिल को स्वस्थ रखने के लिए खाने में फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। नमक, ज्यादा चीनी, ट्रांस फैट और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखें। खाना बनाने के लिए तेल का इस्तेमाल भी संतुलित मात्रा में करें।

याद रखें कि केवल एक खास डाइट या जूस से धमनियों का ब्लॉकेज खत्म नहीं होता। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, तंबाकू से दूरी और समय पर इलाज मिलकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।

Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। हार्ट अटैक का जोखिम हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट, व्यायाम और जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लें। सीने में दर्द या हार्ट अटैक के संभावित लक्षण होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

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