
महाभारत का युद्ध केवल कौरवों और पांडवों के बीच सत्ता की लड़ाई नहीं था, बल्कि इसमें कई ऐसे पात्रों की भूमिका भी रही, जिनका योगदान अक्सर मुख्य योद्धाओं की वीरगाथाओं के बीच छिप जाता है। महाभारत से जुड़ी कुछ लोककथाओं और प्रचलित मान्यताओं में ऐसे तीन पात्रों का जिक्र मिलता है, जिन्हें किन्नर या तीसरे लिंग से जोड़कर देखा जाता है। इन पात्रों का द्रौपदी से भी खास संबंध बताया जाता है।
हालांकि, महाभारत के अलग-अलग संस्करणों और लोकपरंपराओं में इन पात्रों की पहचान और भूमिका को लेकर भिन्नताएं मिलती हैं। इसलिए इन कथाओं को मूल महाभारत के सर्वमान्य प्रसंगों से अलग समझना जरूरी है।
1. शिखंडी: भीष्म के पतन में निभाई अहम भूमिका
महाभारत के सबसे चर्चित पात्रों में शिखंडी का नाम शामिल है। शिखंडी का जन्म राजा द्रुपद के घर हुआ था। कथा के अनुसार, उनका पूर्व जन्म अंबा के रूप में हुआ था। अंबा ने भीष्म से प्रतिशोध लेने का संकल्प लिया था और बाद में शिखंडी के रूप में जन्म लिया।
युद्ध के दौरान भीष्म ने शिखंडी पर अस्त्र उठाने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वे उन्हें स्त्री रूप से जुड़ा मानते थे। इसी स्थिति का लाभ उठाकर अर्जुन ने शिखंडी को आगे रखकर भीष्म पर बाणों की वर्षा की। इस तरह शिखंडी की भूमिका भीष्म के पतन का कारण बनी और पांडवों की विजय का रास्ता खुला।
2. बृहन्नला: अर्जुन का वह रूप जिसने छिपाई पहचान
महाभारत में बृहन्नला का प्रसंग भी बेहद महत्वपूर्ण है। अज्ञातवास के दौरान अर्जुन ने बृहन्नला का रूप धारण किया था। वे राजा विराट के महल में राजकुमारी उत्तरा को नृत्य और संगीत की शिक्षा देते थे।
बृहन्नला के रूप में अर्जुन ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर पांडवों के अज्ञातवास को पूरा करने में सहायता की। बाद में जब कौरवों ने विराट राज्य पर आक्रमण किया, तब अर्जुन ने उत्तरा के भाई उत्तर को साथ लेकर अपना वास्तविक योद्धा रूप प्रकट किया और कौरव सेना का सामना किया।
हालांकि बृहन्नला को महाभारत में किन्नर योद्धा कहना सही नहीं होगा। यह अर्जुन का अज्ञातवास के दौरान अपनाया गया रूप था।
3. इरावान और अरावन से जुड़ी परंपराएं
महाभारत में अर्जुन और नागकन्या उलूपी के पुत्र इरावान का उल्लेख मिलता है। उन्हें कुछ दक्षिण भारतीय परंपराओं में अरावन के नाम से भी जाना जाता है। कुरुक्षेत्र युद्ध में इरावान ने पांडवों की ओर से युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की।
तमिल परंपरा में अरावन का संबंध कूवागम उत्सव और तिरुनंगई समुदाय की धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। इन परंपराओं में अरावन को विशेष सम्मान दिया जाता है। हालांकि, द्रौपदी से उनका करीबी रिश्ता होने या उन्हें महाभारत के तीन किन्नर महारथियों में गिनने का दावा सभी प्राचीन ग्रंथों में समान रूप से नहीं मिलता।
द्रौपदी से जुड़ा संबंध कितना प्रामाणिक है?
द्रौपदी महाभारत की केंद्रीय पात्र थीं और राजा द्रुपद की पुत्री होने के कारण शिखंडी उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े थे। वहीं, बृहन्नला के रूप में अर्जुन ने विराट नगर में समय बिताया था, जबकि इरावान अर्जुन के पुत्र थे। इन पात्रों के बीच संबंधों को अलग-अलग लोककथाओं और परंपराओं में अलग ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि ये तीनों पात्र एक ही रूप में किन्नर महारथी थे या इनके बिना पांडव युद्ध जीत ही नहीं सकते थे। फिर भी, महाभारत की कथा में इनकी भूमिकाएं और इनसे जुड़ी परंपराएं इस महाकाव्य को और भी रोचक बनाती हैं।
Satya Report Disclaimer: यह लेख महाभारत के प्रचलित प्रसंगों और उनसे जुड़ी लोकपरंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रीय मान्यताओं में कथाओं के विवरण भिन्न हो सकते हैं।



