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मकान मालिक को ऐसे मिला 17 लाख रुपये का टैक्स रिफंड, ITAT के फैसले ने बदल दी किस्मत

नई दिल्ली के एक करदाता को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली के वेस्टेंड कॉलोनी निवासी एक मकान मालिक को 17 लाख रुपये का आयकर रिफंड सिर्फ इसलिए नहीं दिया गया था, क्योंकि उन्होंने समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न ईवेरिफाई नहीं किया था. हालांकि, बाद में देरी को केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र ने माफ भी कर दिया था. अब ITAT ने इस मामले में करदाता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयकर विभाग को रिफंड जारी करने का निर्देश दिया है.

मकान मालिक को ऐसे मिला 17 लाख रुपये का टैक्स रिफंड, ITAT के फैसले ने बदल दी किस्मत

करदाता ने आकलन वर्ष 201516 के लिए 3 सितंबर 2015 को समय पर ITR दाखिल किया था. उन्हें अपनी विभिन्न संपत्तियों से 1.42 करोड़ रुपये का किराया मिला था. एडवांस टैक्स और किराये की आय पर कटे टीडीएस के आधार पर उन्होंने करीब 17 लाख रुपये के टैक्स रिफंड का दावा किया था.

पिता की गंभीर बीमारी बनी देरी की वजह

करदाता तय समय के भीतर ITR का ईवेरिफिकेशन नहीं कर सके. उन्होंने बताया कि उनके 83 वर्षीय पिता गंभीर रूप से बीमार थे और उन्हें बारबार अस्पताल ले जाना पड़ रहा था. इसी कारण वह समय सीमा के भीतर ईवेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए.

बाद में उन्होंने CPC से देरी माफ करने की अपील की, जिसे स्वीकार कर लिया गया. इसके बाद फरवरी 2018 में उन्होंने ITR का ईवेरिफिकेशन भी पूरा कर दिया. इसके बावजूद आयकर विभाग ने यह कहते हुए रिफंड देने से इनकार कर दिया कि रिटर्न समय पर ईवेरिफाई नहीं हुआ था.

ITAT ने क्या कहा?

मामला ITAT दिल्ली पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल ने कहा कि जब CPC पहले ही ईवेरिफिकेशन में हुई देरी को माफ कर चुका है, तब केवल तकनीकी आधार पर टैक्स रिफंड रोकना उचित नहीं है. ट्रिब्यूनल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 265 का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अधिकार के बिना कोई टैक्स न तो लगाया जा सकता है और न ही वसूला जा सकता है.

ITAT ने माना कि करदाता की किराये की आय पर टीडीएस पहले ही कट चुका था और रिकॉर्ड में भी दर्ज था. ऐसे में केवल प्रक्रिया संबंधी चूक के कारण रिफंड रोकना आयकर विभाग के लिए अनुचित लाभ होगा. ट्रिब्यूनल ने असेसिंग ऑफिसर और निचली अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को रद्द करते हुए विभाग को कानून के मुताबिक करदाता का 17 लाख रुपये का रिफंड जारी करने के निर्देश दिए.

कर विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी वैध रिफंड राशि केवल तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी कारणों से अटक जाती है. यह आदेश स्पष्ट करता है कि उचित कारण होने और देरी माफ हो जाने के बाद विभाग केवल तकनीकी आधार पर रिफंड से इनकार नहीं कर सकता.

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