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कमाल का है ये म्यूचुअल फंड, गोल्ड और सिल्वर ETF में होता है निवेश, 14 जुलाई तक है मौका

क्या आपने कभी सोचा है कि म्यूचुअल फंड्स में जो आप निवेश करते हैं वो पैसा किन जगहों पर लगाया जाता है. आज आपको एक ऐसे ही फंड के बारे में बताते हैं जिसमें आपका पैसा गोल्ड और सिल्वर के ईटीएफ में भी लगाया जाता है. तो आइए जानते हैं क्या है इसकी डिटेल्स. दरअसल ICICI प्रूडेंशियल मल्टीएसेट एक्टिव FOF मुख्य रूप से एक्टिव इक्विटीओरिएंटेड स्कीम, एक्टिव डेटओरिएंटेड स्कीम और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF में निवेश करेगा.

कमाल का है ये म्यूचुअल फंड, गोल्ड और सिल्वर ETF में होता है निवेश, 14 जुलाई तक है मौका

अलगअलग एसेट क्लास में निवेश का अलोकेशन मार्केट की स्थितियों, मैक्रोइकोनॉमिक माहौल, वैल्यूएशन और अलगअलग एसेट क्लास के आकर्षण के आधार पर किया जाएगा, जिसमें ICICI प्रूडेंशियल AMC के अपने खास निवेश फ्रेमवर्क का इस्तेमाल होगा. इस स्कीम का मकसद बदलते मार्केट साइकल के दौरान पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखते हुए ग्रोथ के मौकों का फायदा उठाना है. जो निवेशक 24 महीने या उससे ज़्यादा समय तक निवेशित रहता है, वह लॉन्गटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के लिए पात्र होगा.

क्या है मल्टी एसेट एक्टिव FOF

ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने ICICI प्रूडेंशियल मल्टीएसेट एक्टिव FOF लॉन्च किया है. यह एक ओपनएंडेड ‘फंड ऑफ फंड्स’ स्कीम है जो मुख्य रूप से एक्टिव इक्विटीओरिएंटेड स्कीम, डेटओरिएंटेड स्कीम और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF की यूनिट्स में निवेश करती है. यह स्कीम मौजूदा बाजार की स्थितियों, वैल्यूएशन संकेतों और मैक्रोइकोनॉमिक ट्रेंड्स के आधार पर इन एसेट क्लास में अपना एक्सपोजर एडजस्ट करेगी. ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शंकरन नरेन ने कहा: अलगअलग एसेट क्लास आर्थिक और मार्केट साइकल के दौरान अलगअलग तरह से परफॉर्म करते हैं, इसलिए अनुशासित एसेट एलोकेशन लंबे समय के निवेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है. ICICI प्रूडेंशियल मल्टीएसेट एक्टिव फंड ऑफ फंड एक ही पोर्टफोलियो में एक्टिव इक्विटी, डेट और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF को एक साथ लाता है, साथ ही मार्केट की स्थितियों के बदलने पर एलोकेशन को एक्टिव रूप से एडजस्ट करने के लिए हमारे खास वैल्यूएशन और मैक्रोइकोनॉमिक मॉडल का इस्तेमाल करता है. इसका मकसद निवेशकों को एक व्यवस्थित और रिसर्चआधारित निवेश प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न एसेट क्लास में मौजूद अवसरों का लाभ उठाने में मदद करना है, जिससे निवेश का अनुभव अधिक सुसंगत बन सके.

कैसे होता है आपके निवेश का अलोकेशन

इकोनॉमिक साइकल, महंगाई, ब्याज दरों और मार्केट के मूड के आधार पर अलगअलग एसेट क्लास का परफॉर्मेंस अलगअलग होता है. यह स्कीम यह अनुमान लगाने की कोशिश नहीं करती कि अगली बार कौनसी एसेट क्लास बेहतर परफॉर्मेंस देगी, बल्कि यह इक्विटी, डेट और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF में उनकी तुलनात्मक आकर्षकता के आधार पर निवेश का अलोकेशन करती है.

यह स्कीम तीन अलगअलग पोर्टफोलियो उद्देश्यों को मिलाती है

  • लंबे समय में संपत्ति बनाने की क्षमता के लिए इक्विटी
  • काफी हद तक स्थिर आय के लिए डेट
  • विविधता और महंगाई से संभावित बचाव के लिए सोना और चांदी

पोर्टफोलियो एलोकेशन फ्रेमवर्क में ये शामिल हैं

  • एक्टिव इक्विटीओरिएंटेड स्कीम की यूनिट्स में 3080%.
  • एक्टिव डेटओरिएंटेड स्कीम की यूनिट्स में 1060%.
  • गोल्ड ETF* और/या सिल्वर ETF में 1030%.

केवल 1000 रुपए से हो सकता है निवेश

स्कीम का पोर्टफोलियो, स्कीम के ‘स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट’ के प्रावधानों के तहत बदला जा सकता है. एसेट एलोकेशन और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ‘स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट’ के अनुसार होगी. AMC, गोल्ड/सिल्वर ETF में एक्सपोज़र लेते समय मार्केट की स्थिति का मूल्यांकन करेगी. मौजूदा मार्केट की स्थितियों को देखते हुए, गोल्ड ETF में एक्सपोजर एसेट अंडर मैनेजमेंट के 5% तक सीमित रहेगा और समयसमय पर इसकी समीक्षा की जाएगी. इन एसेट क्लास में निवेश का अलोकेशन मार्केट की स्थितियों और हर एसेट क्लास के आकर्षण के आधार पर एक्टिव रूप से मैनेज किया जाता है. इस एनएफओ में कम से कम 1,000 रुपये का निवेश किया जा सकता है. इसके विकल्प में डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान शामिल हैं. इसका बेंचमार्क 55 प्रतिशत निफ्टी200 टीआरआई + 35% निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्स + 7% सोने की घरेलू कीमत + 3% चांदी की घरेलू कीमत हैं. इसके फंड मैनेजर धर्मेश कक्कड़, मनीष बंथिया, अखिल कक्कड़, शर्मिला डी’सिल्वा और गौरव चिकने हैं. ऐतिहासिक डेटा से पता चलता है कि इक्विटी, डेट और गोल्ड के बीच लीडरशिप समयसमय पर बदलती रहती है, जो अलगअलग तरह के एसेट में निवेश के महत्व को पुख्ता करती है. एएमसी का मानना ​​है कि वर्तमान वातावरण विविध निवेश के लिए अनुकूल है, जिसमें भारत की संरचनात्मक वृद्धि इक्विटी को समर्थन दे रही है. निश्चित आय पोर्टफोलियो को सापेक्ष स्थिरता प्रदान कर रही है, और सोना/चांदी मुद्रास्फीति और भूराजनीतिक अनिश्चितता के खिलाफ संभावित बचाव के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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