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बस कंडक्टर से बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडियन बनने तक, ऐसी थी जॉनी वॉकर की कहानी

हिंदी सिनेमा में जब भी शानदार कॉमेडी एक्टर्स का जिक्र होता है, तो जॉनी वॉकर का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग, अलग अंदाज और मासूम कॉमेडी आज भी लोगों का याद है।

बस कंडक्टर से बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडियन बनने तक, ऐसी थी जॉनी वॉकर की कहानी
बस कंडक्टर से बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडियन बनने तक, ऐसी थी जॉनी वॉकर की कहानी

उन्होंने दशकों तक लोगों का मनोरंजन किया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले जॉनी वॉकर मुंबई की बसों में कंडक्टर का काम किया करते थे। गुरु दत्त के कारण उनकी किस्मत बदली और वो जानेमानें चेहरों में से एक बन गए।

बस कंडक्टर थे जॉनी वॉकर

जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्होंने कम उम्र में ही नौकरी करना शुरू कर दिया। वह मुंबई की बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं परिवहन बस सेवा में कंडक्टर थे। यात्रियों से मजाकिया अंदाज में बात करना और लोगों को हंसाना उनकी आदत थी। यही हुनर आगे चलकर उनकी पहचान बना।

बस में सफर करते हुए गुरु दत्त को दिखा था जॉनी वॉकर का हुनर

कहा जाता है कि एक दिन अभिनेता और फिल्ममेकर गुरु दत्त की नजर जॉनी वॉकर पर पड़ी। उन्होंने बस में ही जॉनी वॉकर की कॉमिक एक्टिंग देखी और काफी प्रभावित हुए। गुरु दत्त ने उन्हें स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया। टेस्ट के दौरान बदरुद्दीन ने शराबी आदमी की एक्टिंग इतनी शानदार तरीके से की कि गुरु दत्त ने उन्हें मशहूर व्हिस्की ब्रांड जॉनी वॉकर के नाम पर नया स्क्रीन नेम दे दिया। दिलचस्प बात यह थी कि असल जिंदगी में जॉनी वॉकर शराब को हाथ तक नहीं लगाते थे।

फिल्मों में कॉमेडी का नया चेहरा बने

1950 और 60 के दशक में जॉनी वॉकर हर बड़े बैनर की पसंद बन गए। उनकी मौजूदगी फिल्म में अलग ही रंग भर देती थी। उन्होंने ‘CID’, ‘प्यासा’, ‘मधुमती’, ‘नया दौर’ और ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया।

उनकी कॉमेडी में फूहड़पन नहीं, बल्कि मासूमियत और शानदार एक्सप्रेशन देखने को मिलते थे। यही वजह थी कि परिवार के साथ बैठकर उनकी फिल्में देखी जाती थीं।

हीरो से ज्यादा मिलने लगी फीस

उस दौर में जॉनी वॉकर की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि कई फिल्मों में उनकी फीस हीरो से भी ज्यादा बताई जाती थी। निर्माता सिर्फ उनकी मौजूदगी से फिल्म में कॉमिक राहत और बॉक्स ऑफिस आकर्षण जोड़ना चाहते थे। कई बार दर्शक फिल्म के हीरो से ज्यादा जॉनी वॉकर के सीन का इंतजार करते थे।

जॉनी वॉकर की लोकप्रियता का स्तर ऐसा था कि कई निर्मातानिर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में शामिल करने के लिए भारी फीस देने को तैयार रहते थे। उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी जबरदस्त थी कि दर्शक मुख्य हीरो के साथसाथ उनके किरदारों का भी बेसब्री से इंतजार करते थे।

आज भी याद किए जाते हैं जॉनी वॉकर

जॉनी वॉकर ने हिंदी सिनेमा में कॉमेडी को नया आयाम दिया। उनका अंदाज आज भी कई कलाकारों के लिए प्रेरणा माना जाता है। उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर फैंस उन्हें याद कर रहे हैं और उनकी फिल्मों के मशहूर सीन सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

जॉनी वॉकर का जन्म 11 नवंबर 1924 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। लगभग 25 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1951 में निर्देशक गुरुदत्त की फिल्म ‘बाजी’ से की थी। उनका फिल्मी करियर लगभग 5 दशकों 50 साल तक लंबा रहा, जिसमें उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया।

अपनी शर्तों पर काम करते थे जॉनी वॉकर

जॉनी वॉकर अपने उसूलों के बेहद पक्के इंसान थे। इंडस्ट्री के सबसे व्यस्त और महंगे कॉमेडियन बनने के बाद भी उन्होंने एक नियम कभी नहीं बदला। वे रविवार को काम नहीं करते थे। उन्होंने साफ तौर पर निर्माताओं से कह रखा था कि रविवार सिर्फ उनके परिवार के लिए है। उस दिन वे अपनी पत्नी नूर और बच्चों के साथ पूरा समय बिताते थे। यही वजह थी कि कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बाद भी जॉनी वॉकर परिवार और निजी जिंदगी को सबसे ज्यादा अहमियत देते थे।

जॉनी वॉकर थे बांद्रा की पहचान

जॉनी वॉकर का मुंबई के बांद्रा इलाके में नूर विला नाम का बंगला काफी मशहूर था। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उनकी बेटी कॉलेज बस से घर लौटती थीं, तो बस कंडक्टर स्टॉप का नाम लेने की बजाय जॉनी वॉकर स्टॉप कहकर आवाज लगाता था, क्योंकि उनका घर ठीक उसी बस स्टॉप के सामने था।

इसके अलावा जॉनी वॉकर का मशहूर गीत ‘सर जो तेरा चकराया’ उनकी पहचान बन गया था, जिसे आज भी लोग काफी पसंद करते हैं।

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