
गोवत्स द्वादशी 2026: सनातन धर्म में गोवत्स द्वादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा करने तथा व्रत रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और संतान सुख की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है। इसे बच्छ दुआ, बछ बारस और वसु द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं गोवत्स द्वादशी का धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दिन बोले जाने वाले विशेष मंत्र के बारे में।
कब मनाई जाती है गोवत्स द्वादशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवत्स द्वादशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इसे भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को भी मनाया जाता है। इस दिन गौ माता और उनके बछड़े की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
संतान सुख की कामना के लिए क्यों खास है यह व्रत?
गोवत्स द्वादशी का व्रत विशेष रूप से संतान सुख की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा ने कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को पहली बार गौ माता के दर्शन किए थे और उनका पूजन किया था।
इसी परंपरा के चलते इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास रहता है।
गोवत्स द्वादशी पर कैसे करें गाय और बछड़े की पूजा?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद गाय और बछड़े को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। उन्हें साफ कपड़े ओढ़ाएं और फूलों की माला पहनाएं।
- गाय और बछड़े के माथे पर सिंदूर या चंदन का तिलक लगाएं।
- उनके सींगों पर गेरू लगाकर फूलों से सजाएं।
- पूजा के लिए जल, अक्षत, तिल, गंध और फूल एक पात्र में रखें।
- विधि-विधान से गाय और बछड़े की पूजा करें।
- परिवार की खुशहाली और संतान सुख की कामना करते हुए प्रार्थना करें।
पूजा के दौरान जरूर बोलें यह अर्घ्य मंत्र
गोवत्स द्वादशी पर पूजा करते समय गाय और बछड़े के सामने अर्घ्य अर्पित करने का विधान बताया गया है। इस दौरान निम्न मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
मंत्र:
क्षीरोदार्णव सम्भूते सुरासुर नमस्कृते।
सर्वदेवमये मातर् गृहाणार्घ्य नमो नमः॥
मंत्र का अर्थ: हे देवस्वरूपिणी माता! आप क्षीर सागर से उत्पन्न हुई हैं और देवताओं तथा असुरों द्वारा भी आपकी वंदना की जाती है। हे सर्वदेवमयी माता, मेरे द्वारा अर्पित इस अर्घ्य को स्वीकार करें। आपको बार-बार प्रणाम है।
गाय और बछड़े को लगाएं भोग, फिर करें आरती
पूजा और मंत्र जाप के बाद गौ माता और बछड़े को भोग अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गौ माता की सेवा करने और उनका आशीर्वाद लेने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
व्रत रखने वाले लोग शाम को फलाहार करके पारण कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में इस व्रत को तीन दिनों तक रखने की मान्यता भी प्रचलित है।
गोवत्स द्वादशी के दिन किन बातों का रखें ध्यान?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवत्स द्वादशी के दिन गाय के दूध और उससे बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को इस नियम का पालन करने की सलाह दी जाती है। साथ ही गाय और बछड़े की सेवा करें तथा किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
Satya Report Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा और व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है।



