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रेप, पॉक्सो और SC/ST केस में फंसाने की धमकी, फिर पैसों की डिमांड; बिजनौर में कथित वसूली गैंग का खुलासा.

रेप, पॉक्सो और SC/ST केस में फंसाने की धमकी, फिर पैसों की डिमांड; बिजनौर में कथित वसूली गैंग का खुलासा.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने एक ऐसे कथित गिरोह का खुलासा करने का दावा किया था, जो लोगों के पुराने विवाद और आपसी रंजिश की जानकारी जुटाकर उन्हें गंभीर मुकदमों में फंसाने की धमकी देता था। आरोप था कि इसके बाद केस से बचाने, समझौता कराने या मुकदमा वापस लेने के नाम पर मोटी रकम मांगी जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, रकम देने से इनकार करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार, पॉक्सो या एससी/एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया जाता था। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश और उनकी भूमिका की जांच शुरू की गई थी।

पहले तलाशते थे पुराने विवाद

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, कथित गिरोह का काम लोगों की निजी और विवाद से जुड़ी जानकारी जुटाने से शुरू होता था।

आरोप था कि गिरोह से जुड़े लोग पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिनकी किसी से पुरानी दुश्मनी हो, परिवार में विवाद चल रहा हो या किसी व्यक्ति का किसी दूसरे पक्ष से झगड़ा हो चुका हो।

इसके बाद उसी जानकारी को आधार बनाकर संबंधित व्यक्ति को डराने की कोशिश की जाती थी। उसे किसी गंभीर मुकदमे में फंसाने या जेल भेजे जाने का डर दिखाया जाता था।

समझौते के नाम पर मांगी जाती थी रकम

पुलिस के मुताबिक, डर का माहौल बनाने के बाद कथित तौर पर समझौता कराने या मुकदमा वापस लेने के नाम पर पैसों की मांग की जाती थी।

अगर सामने वाला व्यक्ति रकम देने के लिए तैयार हो जाता था तो मामला खत्म करने की बात कही जाती थी। वहीं, पैसे देने से इनकार करने पर कथित तौर पर दबाव और बढ़ा दिया जाता था।

पुलिस का आरोप था कि कुछ मामलों में गंभीर धाराओं का इस्तेमाल करने की धमकी देकर लोगों को दबाव में लेने की कोशिश की गई।

एक शिकायत के बाद खुला मामला

मामले की जानकारी पुलिस तक तब पहुंची जब बिजनौर के उमर कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने 6 सितंबर को कोतवाली शहर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे थे और मुकदमा वापस लेने या समझौता कराने के बदले पैसों की मांग की जा रही थी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। स्वाट, सर्विलांस और थाना कोतवाली शहर पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपों से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई।

पुलिस के मुताबिक, जांच में मिले तथ्यों के आधार पर 7 सितंबर को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

जुल्फेकार को बताया गया कथित संचालक

पुलिस की जांच में जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा का नाम कथित गिरोह के संचालक के तौर पर सामने आया था।

पुलिस के मुताबिक, उसके साथ अफजाल, गुड्डी, कुन्ती और प्रीति समेत कुछ अन्य लोगों के जुड़े होने की जानकारी मिली थी।

आरोप था कि नेटवर्क में शामिल लोग पहले संभावित लोगों की जानकारी जुटाते थे और फिर पुराने विवाद को आधार बनाकर उन्हें डराने का काम करते थे।

इसके बाद समझौते या मुकदमा वापस कराने के नाम पर कथित तौर पर रकम मांगी जाती थी।

रकम नहीं दी तो गंभीर केस का डर

पुलिस का दावा था कि इस कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली में सबसे अहम हथियार मुकदमे का डर था।

आरोप के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति पैसे देने के लिए तैयार नहीं होता था तो उसके खिलाफ गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कराने या अदालत में परिवाद दाखिल करने की धमकी दी जाती थी।

जांच के दौरान पुलिस ने बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं से जुड़े मामलों की जानकारी मिलने की बात कही थी।

हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया था कि इन सभी मामलों में लगाए गए आरोप सही थे या नहीं, इसका फैसला संबंधित मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकता है।

महिलाओं की भूमिका की भी जांच

पुलिस के मुताबिक, कथित नेटवर्क में महिलाओं और दूसरे सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई थी।

आरोप था कि कुछ मामलों में महिलाओं को आगे करके गंभीर आरोपों से जुड़े मुकदमे या न्यायालयी परिवाद दर्ज कराने की कोशिश की जाती थी।

पुलिस अब ऐसे मामलों की अलग-अलग परिस्थितियों की जांच कर रही थी। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही थी कि शिकायतकर्ता और आरोपी पक्ष के बीच पहले से कोई विवाद था या किसी पुराने विवाद को बाद में कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

दूसरे जिलों के मामलों की भी पड़ताल

जांच के दौरान पुलिस को बिजनौर के अलावा दूसरे जिलों में दर्ज कुछ मुकदमों और न्यायालयी परिवादों की जानकारी भी मिली थी।

अब पुलिस इन मामलों का रिकॉर्ड जुटा रही थी। जांच का मकसद यह पता लगाना था कि क्या अलग-अलग मामलों में एक जैसी रणनीति अपनाई गई थी या फिर ये मामले एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थे।

पुलिस ने फिलहाल सभी मामलों को एक ही साजिश का हिस्सा मानकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला था। हर मामले के तथ्यों और साक्ष्यों की अलग-अलग जांच की जा रही थी।

पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी जांच जारी

पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और उनकी भूमिकाओं के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही थी।

जांच में यह पता लगाया जा रहा था कि संभावित लोगों की निजी जानकारी कौन जुटाता था, उनसे संपर्क कौन करता था, पैसों की मांग कैसे की जाती थी और रकम नहीं देने पर कथित तौर पर मुकदमे की धमकी देने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती थी।

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दस्तावेज, पुराने मुकदमे, शिकायतें और अन्य साक्ष्य जुटा रही थी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका कितनी बड़ी थी और इस कथित वसूली नेटवर्क में उनके साथ कितने अन्य लोग जुड़े हुए थे।

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