
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश जापान में अपने बौद्ध सर्किट को पर्यटन के साथ निवेश से जोड़ने की तैयारी में है। टोक्यो में 24 से 27 सितंबर तक होने वाले टूरिज्म एक्सपो जापान2026 में प्रदेश सारनाथ से कुशीनगर तक भगवान बुद्ध से जुड़े छह प्रमुख स्थलों को एक पर्यटन मार्ग के रूप में पेश करेगा। एक्सपो के उद्योग दिवसों में जापानी टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल कंपनियों, हॉस्पिटैलिटी समूहों और निवेशकों से होटल, वेलनेस तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं में निवेश पर बातचीत होगी। एक्सपो का आयोजन टोक्यो बिग साइट में हो रहा है।
सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, कौशांबी और संकिसा को बौद्ध पर्यटन सर्किट के रूप में प्रमुखता दी जाएगी। खास तौर पर सारनाथ के जुलाई 2026 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने को प्रदेश की नई वैश्विक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। यूनेस्को के अनुसार सारनाथ वह स्थल है जहां बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था और यह प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में शामिल है।
जापानी पर्यटकों पर नजर, टूर पैकेज भी होंगे चर्चा में
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, जापान के साथ बौद्ध पर्यटन संबंधों को और मजबूत करने के लिए जापानी टूर ऑपरेटरों से सीधा संवाद किया जाएगा। विभाग के अनुसार प्रदेश के छह बौद्ध स्थलों पर पर्यटकों की संख्या 2022 में 22.40 लाख से बढ़कर 2025 में 81.83 लाख हो गई। विदेशी पर्यटकों की संख्या भी 48,498 से बढ़कर करीब 4.43 लाख पहुंची है। जनवरीजून 2026 में इन स्थलों पर 30.07 लाख पर्यटकों के पहुंचने का दावा किया गया है, जिनमें 2.02 लाख विदेशी थे।
4345 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर लाने की कोशिश
बौद्ध स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए 51 योजनाओं में 218 करोड़ रुपये से अधिक के काम चल रहे हैं। विभाग के अनुसार छह बौद्ध स्थलों पर करीब 250 पर्यटन इकाइयों के लिए लगभग 4,345 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पंजीकृत हैं। एक्सपो के ट्रेड डे में इन प्रस्तावों के साथ नए टूर पैकेज और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। वाराणसी और कुशीनगर के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को भी कनेक्टिविटी के प्रमुख आधार के तौर पर पेश किया जाएगा।



