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ट्रंप ने रूस को प्रतिबंधों से दी राहत, भारत पर 100% टैरिफ के प्रावधान में भी छूट; फैसले पर अमेरिका में विवाद

ट्रंप ने रूस को प्रतिबंधों से दी राहत, भारत पर 100% टैरिफ के प्रावधान में भी छूट; फैसले पर अमेरिका में विवाद

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस को प्रतिबंधों से राहत देने के फैसले पर अमेरिका में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने अपने निर्णय का बचाव करते हुए इसे अमेरिका और पूरी दुनिया के हित में बताया। उन्होंने कहा कि अभी कई लोग उनके फैसले का असली मतलब नहीं समझ रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में उन्हें इसकी अहमियत का पता चलेगा। दूसरी ओर, अमेरिकी सांसदों ने इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि इससे रूस पर दबाव कम हो सकता है।

ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा के मियामी स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उनका फैसला बहुत अच्छा है और इससे अमेरिका को फायदा होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह निर्णय दुनिया के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।

भारत और चीन समेत पांच देशों को टैरिफ से राहत

ट्रंप ने शुक्रवार को एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित सख्त कार्रवाई से संबंधित प्रावधानों में छूट दी गई। इनमें भारत और चीन समेत पांच प्रमुख देश शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संसद ने पिछले महीने रूस से जुड़े प्रतिबंधों को सख्त करने वाले कानून को मंजूरी दी थी। इसमें रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल था।

हालांकि, ट्रंप के आदेश के तहत इस प्रावधान से छूट दी गई है। आदेश में कहा गया है कि यह राहत तब तक लागू रह सकती है, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री संबंधित अधिकारियों से परामर्श के बाद आगे की कार्रवाई को उचित नहीं मानते।

इस फैसले का भारत सहित उन देशों के लिए विशेष महत्व है, जो रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद करते हैं। हालांकि, छूट की शर्तों और भविष्य में संभावित बदलावों पर नजर रखना जरूरी होगा।

ट्रंप के फैसले पर दोनों दलों के सांसदों ने उठाए सवाल

रूस को राहत देने के फैसले की रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों के नेताओं ने आलोचना की है। आलोचकों का कहना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना जरूरी है, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए उस पर दबाव डाला जा सके।

दक्षिण कैरोलाइना की रिपब्लिकन सांसद डार्लिन ग्राहम ने कहा कि वह रूस पर दबाव बनाए रखने के पक्ष में हैं। उनके अनुसार, रूस पर भरोसा नहीं किया जा सकता और युद्ध समाप्त कराने के लिए आर्थिक प्रतिबंध एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकते हैं।

थॉम टिलिस ने फैसले को बताया गैर-जिम्मेदाराना

उत्तरी कैरोलाइना के रिपब्लिकन सांसद थॉम टिलिस ने भी ट्रंप प्रशासन के निर्णय की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया।

टिलिस ने सवाल उठाया कि जब अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत से रूस पर प्रतिबंधों से संबंधित कानून पारित किया था, तो प्रशासन उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के बजाय छूट क्यों दे रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रूस को राहत देना ऐसे समय में गलत संदेश दे सकता है, जब यूक्रेन पर उसके हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाए रखने की जरूरत है।

ऊर्जा की कीमतों और ईरान युद्ध का भी उठा मुद्दा

टिलिस ने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि ट्रंप प्रशासन वास्तव में ईंधन सस्ता करना चाहता है, तो उसे ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

उनका तर्क था कि ऊर्जा की कीमतों में राहत देने के लिए रूस को रियायत देना उचित रास्ता नहीं है। इस मुद्दे ने अमेरिकी विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।

लिंडसे ग्राहम को लेकर भी हुई चर्चा

टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस निर्णय से बेहद नाराज होते।

लिंडसे ग्राहम रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहे थे। इसी वजह से ट्रंप के फैसले को लेकर उनके समर्थकों और प्रतिबंधों के पक्ष में खड़े सांसदों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

आगे क्या होगा?

ट्रंप के इस निर्णय के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के लिए राहत कितने समय तक जारी रहती है और अमेरिकी प्रशासन भविष्य में प्रतिबंधों को लेकर क्या रुख अपनाता है।

भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है, क्योंकि रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी शुल्क संबंधी फैसले व्यापार और ऊर्जा लागत को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल ट्रंप ने अपने निर्णय को अमेरिका और दुनिया के हित में बताया है, जबकि उनके आलोचक इसे रूस पर दबाव कम करने वाला कदम मान रहे हैं।

सत्या रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध रिपोर्टों और संबंधित बयानों पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और व्यापार शुल्क से जुड़े नियमों में बदलाव संभव है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक आदेशों और ताजा जानकारी की पुष्टि करें।

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