BusinessIndia

​GDP ग्रोथ के बाद ‘रुपए’ पर भी बढ़ा IMF का भरोसा, कहा- दुनिया देखेगी भारत की आर्थिक ताकत

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की GDP के आंकड़ों में किए गए बदलावों की तारीफ की है. IMF का कहना है कि भारत ने मजबूत आर्थिक स्थिति के साथ ऊर्जा संकट का सामना किया है और इस चुनौती से अच्छी तरह निपटा है. इतना ही नहीं, IMF ने कहा कि रुपए पर दबाव को भारत की अर्थव्यवस्था की नाकामी के तौर पर नहीं देखना चाहिए.

​GDP ग्रोथ के बाद ‘रुपए’ पर भी बढ़ा IMF का भरोसा, कहा- दुनिया देखेगी भारत की आर्थिक ताकत

IMF के एशिया और पेसिफिक डिपार्टमेंट के डायरेक्टर कृष्णा श्रीनिवासन ने गुरुवार को बैंकॉक में यह बात कही. उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत रही है और सरकार ने खर्चों को संभालने में भी सावधानी बरती है. उनके मुताबिक, रुपए की कीमत पर दुनिया की ब्याज दरों, निवेशकों के भरोसे और कच्चे तेल की कीमतों का असर पड़ता है. भारत तेल आयात करता है, इसलिए ऊर्जा संकट का असर रुपए पर भी पड़ा है.

IMF ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

IMF ने भारत की आर्थिक ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाया है. इसकी वजह अप्रैलजून तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन रहा. IMF के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था इस साल और अगले साल 7% की दर से बढ़ सकती है. वहीं, मध्यम अवधि में ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैलजून तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही थी. IMF की रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की अच्छी एक्टिविटी से भारत की ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है. भारत की बड़ी घरेलू मार्केट, कामकाजी उम्र की आबादी और लगातार हो रहे आर्थिक सुधार भी इसकी ताकत हैं.

GDP के नए आंकड़ों पर क्या बोला IMF?

भारत ने इस साल GDP के आंकड़ों की गणना का आधार वर्ष 201112 से बदलकर 202223 कर दिया था. IMF के कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि भारत सरकार ने आंकड़ों में किए गए बदलावों के बारे में जानकारी दी है. उनके मुताबिक, गणना के तरीके में किए गए बदलाव IMF के सांख्यिकी विभाग की सलाह के तहत हैं. उन्होंने MoSPI के काम की तारीफ करते हुए कहा कि GDP के आंकड़ों को बेहतर बनाने की इस कोशिश को पहचान मिलनी चाहिए. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है.

रुपए पर दबाव क्यों है?

IMF की एशिया और पेसिफिक रीजन की आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा संकट के बाद भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर दबाव आया. हालांकि, पिछले कुछ महीनों में यह दबाव कुछ कम हुआ है. दुनिया के बड़े देशों में ब्याज दरें कई साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचने से उभरते देशों के लिए कर्ज लेना भी महंगा हुआ है. इसके साथ ही, खासकर एशिया में करेंसी की कीमतों में काफी उतारचढ़ाव देखा गया है. रिपोर्ट में 2026 के लिए कच्चे तेल की कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया है. इसमें यह भी माना गया है कि होर्मुज स्ट्रेट मार्च 2027 से फिर खुल सकता है.

RBI के कदमों से रुपए को सहारा

रुपए में गिरावट रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 10 अक्टूबर को कुछ कदम उठाए थे. इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की रोजाना डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू की गई. यह व्यवस्था 12 अक्टूबर से लागू हुई. इससे इन कंपनियों को डॉलर खरीदने के लिए खुले बाजार में जाने की जरूरत कम होती है. RBI ने रुपए के खिलाफ सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ नियम भी सख्त किए. इसके बाद बुधवार को रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 95.17 पर बंद हुआ. चार सत्रों में रुपए में कुल 171 पैसे की बढ़त दर्ज की गई. यह करीब एक महीने का सबसे मजबूत स्तर था.

इधर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपए में काफी गिरावट आई है. उन्होंने बताया कि RBI रुपए में जरूरत से ज्यादा उतारचढ़ाव रोकने के लिए कदम उठाता रहेगा. RBI के मुताबिक, 2 अक्टूबर तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 734.6 अरब डॉलर था. यह करीब 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है. हालांकि, अप्रैल से 5 अक्टूबर के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से शुद्ध 10.3 अरब डॉलर निकाले. दूसरी ओर, अप्रैल से अगस्त के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़कर 13.8 अरब डॉलर रहा.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply