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​खेत-मकान के बाद अब धार्मिक स्थलों पर सरयू नदी की नजर, हेतमापुर में बढ़ा कटान का खतरा

​खेत-मकान के बाद अब धार्मिक स्थलों पर सरयू नदी की नजर, हेतमापुर में बढ़ा कटान का खतरा

सूरतगंज/बाराबंकी, अमृत विचारः करीब एक महीने पहले तक सामान्य नजर आने वाला हेतमापुर गांव अब सरयू नदी के तेज कटान से उजड़ने की कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों के अनुसार 28 अगस्त के बाद जलस्तर बढ़ने के साथ कटान तेज हुआ और अब तक 500 बीघे से अधिक कृषि भूमि के साथ दर्जनों मकान नदी में समा चुके हैं।

कटान की स्थिति ऐसी है कि कई परिवार अपने घरों से दरवाजे, खिड़कियां और ईंटें तक निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जा चुके हैं। अब सरयू की धार गांव के धार्मिक स्थलों के करीब पहुंच गई है।

बाबा नारायण दास की तपोस्थली और मंदिर के पास पहुंची नदी

सरयू का कटान अब बाबा नारायण दास महाराज की तपोस्थली और शंकर जी मंदिर के नजदीक पहुंच गया है। मंदिर को बचाने के लिए करीब 80 मजदूरों की टीम लगातार काम कर रही है। मजदूर बोल्डर और बोरियां लगाकर नदी की धार को रोकने और कटान से मंदिर को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

वहीं, धार्मिक स्थलों के आसपास कटान बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता भी बढ़ गई है।

मस्जिद और ईदगाह का हिस्सा भी नदी में समाया

हेतमापुर में सरयू का कटान केवल खेतों और मकानों तक सीमित नहीं रहा है। ग्रामीणों के अनुसार मस्जिद का करीब आधा हिस्सा और ईदगाह का आधे से अधिक भाग भी नदी में समा चुका है।

इधर, बाबापुरवा में भी कई मकान कटान की चपेट में आ गए हैं। लगातार जमीन नदी में समाने से ग्रामीणों के सामने सुरक्षित ठिकाने की समस्या खड़ी हो गई है।

बाढ़ राहत शिविर में रह रहे प्रभावित परिवार

कटान की वजह से घर गंवा चुके कई परिवार बतनेरा स्थित बाढ़ राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं। तहसीलदार विपुल कुमार सिंह के अनुसार करीब 33 परिवार प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 से अधिक मकानों पर अभी भी कटान का खतरा बना हुआ है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

स्थायी पुनर्वास के लिए जमीन की तलाश

प्रशासन प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की तैयारी में भी जुटा है। इसके लिए लालपुर करौता क्षेत्र में सरकारी जमीन चिह्नित की जा रही है, ताकि कटान से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाया जा सके।

जलस्तर घटा, लेकिन कटान की चिंता कायम

सरयू का जलस्तर घटकर 105.022 मीटर हो गया है। हालांकि, पानी कम होने के बावजूद ग्रामीणों की चिंता खत्म नहीं हुई है। नदी का कटान अभी भी कई इलाकों के लिए खतरा बना हुआ है और लोग अपने घर, खेत तथा धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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