
नई दिल्ली: भारत में सोलर पैनल और सोलर एनर्जी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर सेल और सोलर पैनल पर भारी शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारतीय सोलर उत्पादकों पर 123.04 प्रतिशत तक एंटीडंपिंग ड्यूटी तय की है। इसके अलावा 126.09 प्रतिशत तक काउंटरवेलिंग ड्यूटी भी लगाई गई है।
सीधे शब्दों में समझें तो अगर कोई भारतीय कंपनी अमेरिका में सोलर पैनल बेचती है, तो उसे वहां पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है। इससे अमेरिका में भारतीय सोलर उत्पाद महंगे हो सकते हैं और भारतीय कंपनियों के लिए वहां कारोबार करना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका ने इतना बड़ा शुल्क क्यों लगाया?
अमेरिकी वाणिज्य विभाग का कहना है कि भारत समेत कुछ देशों के सोलर उत्पाद अमेरिकी बाजार में बहुत कम कीमत पर बेचे जा रहे थे। अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया है कि इन देशों की कंपनियों को सरकारी सब्सिडी का फायदा मिल रहा है।
अमेरिकी सोलर कंपनियों की शिकायत के बाद इस मामले की जांच शुरू हुई थी। शिकायत करने वाले गठबंधन में First Solar, Hanwha Qcells और Mission Solar Energy जैसी कंपनियां शामिल हैं।
सिर्फ भारत ही नहीं, इन देशों पर भी कार्रवाई
अमेरिका ने भारत के अलावा इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर उत्पादों पर भी शुल्क तय किया है।
इंडोनेशिया पर 94.36 प्रतिशत तक एंटीडंपिंग ड्यूटी और लाओस पर 65.43 प्रतिशत तक शुल्क तय किया गया है। इनके अलावा दोनों देशों पर अलगअलग दरों से काउंटरवेलिंग ड्यूटी भी लगाई गई है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका भारत में सोलर पैनल लगाने वाले आम लोगों पर क्या असर होगा?
फिलहाल इस फैसले का सीधा असर भारतीय घरों में लगे या भारत में बिकने वाले सोलर पैनल पर नहीं है। अमेरिका ने भारत से अमेरिकी बाजार में जाने वाले सोलर उत्पादों पर यह शुल्क लगाया है।
हालांकि, अगर भारतीय कंपनियों को अमेरिका में अपना माल बेचने में दिक्कत आती है, तो उन्हें दूसरे बाजारों पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है। इससे भारतीय सोलर कंपनियों की बिक्री, निवेश और उत्पादन रणनीति पर असर पड़ने की संभावना है।
दूसरी तरफ, भारत में सोलर पैनल की कीमत पर इसका असर सीधे तौर पर पड़ेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां अपनी बिक्री और उत्पादन का रुख किस तरह बदलती हैं।
14 अक्टूबर को साफ होगी तस्वीर
अभी मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग यानी USITC 14 अक्टूबर को अपना फैसला देगा।
आयोग यह देखेगा कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर उत्पादों से अमेरिकी कंपनियों को वास्तव में नुकसान हुआ है या भविष्य में नुकसान होने का खतरा है।
अगर USITC भी अमेरिकी कंपनियों के पक्ष में फैसला देता है, तो अमेरिकी वाणिज्य विभाग नवंबर में अंतिम शुल्क आदेश जारी कर सकता है।
आसान भाषा में पूरा मामला समझिए
भारत की सोलर कंपनियां → अमेरिका में सोलर पैनल बेचती हैं → अमेरिका ने उन पर भारी शुल्क लगाया → वहां भारतीय पैनल महंगे हो सकते हैं → भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में चुनौती बढ़ेगी।
लेकिन भारत में आम लोगों के सोलर पैनल की कीमत तुरंत बढ़ जाएगी, ऐसा अभी कहना सही नहीं होगा। इसके लिए आगे के फैसलों और बाजार की स्थिति पर नजर रखनी होगी।
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