
वीके सिंह/लखनऊ, लखनऊ। गोरखपुर सदर में उप निबंधक प्रथम रहे सुबोध कुमार राय के खिलाफ स्टाम्प शुल्क में खेल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ विभाग द्वारा कराई गई जांच में पाया गया है कि उनके कृत्यों से सरकार को 54.78 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ है।
विभाग ने कार्रवाई करते हुए सुबोध कुमार राय की दो वेतन वृद्धियां रोकी थी, लेकिन अब मामला ऊपर पहुंचने के कारण राय को बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि उपनिबंधक अधीनस्थ कार्मिकों को आवेदक के घर भेजकर पंजीकरण कराते थे।
मामले का खुलासा होने पर विभाग ने यह जांच अयोध्या में तैनात रहे उपनिबंधक निरंजन कुमार से कराई थी। जांच में पाया गया कि 28 दिसंबर 2023 से 3 जनवरी 2024 के बीच पंजीकृत मुख्तारनामों में सुबोध राय ने खेल करते हुए करोड़ों का धन गबन किया।
जांच अधिकारी ने माना कि इन पर निर्धारित स्टाम्प शुल्क नहीं लगाया गया और इससे विभाग को 54,78,24,960 रुपये के राजस्व की क्षति हुई। जांच में सामने आया है कि 28 दिसंबर 2023 की शासन अधिसूचना और स्टाम्प कानून में हुए बदलाव के बाद भी आठ मुख्तारनामों के पंजीकरण कर दिया गया है। कई मामलों में सुबोध राय ने कनिष्ठ सहायक निबंधन रजत श्रेष्ठ को कमीशन देते हुए घर जाकर लेखपत्र स्वीकार करने और पंजीकरण की अनुमति मौखिक रूप से दी थी।
मंत्री ने की बर्खास्तगी की संस्तुति
बता दें कि पूर्व में भी गोरखपुर में एसटीएफ ने इस तरह के कई खेल उजागर किए थे। लेकिन विभागीय अधिकारियों की संलिप्पता से लगभग 55 करोड़ का घोटाला पाया जाना हैरत करने वाला है। फिलहाल विभागीय मंत्री रविंद्र जायसवाल ने इतने बड़े घोटाले को अंजाम देने वाले उपनिबंधक के खिलाफ बर्खास्तगी की संत्तुति कर दी है। उनका निर्देश मिलते ही विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। उधर, इस प्रकरण पर जांच अधिकारी निरंजन कुमार ने फोन पर बताया कि जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंप दी गई है। आगे की कार्रवाई मुख्यालय को करनी है।


