Cancer Drug Price Controversy: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है।

मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि जिस दवा की रिटेल कीमत करीब ₹2,700 है, उसकी MRP 27,000 रुपए रखी गई है। कोर्ट ने दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था में संतुलन की जरूरत पर जोर दिया।
There are essential medicines for cancer for which MRP is ₹27000 and PTR is ₹2700. That’s absolute rampage and carnage and broad day light dacoity with the patients. How can a patient be cheated for a medicine which the manufacturer sells to the retailer at… pic.twitter.com/ybdEop0AjW
— Bar and Bench September 22, 2026
10 गुना अंतर पर कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान पीठ ने दवा की खरीद कीमत और MRP के बीच करीब 10 गुना अंतर पर सवाल किया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि इतनी बड़ी राशि का फायदा आखिर किसे मिल रहा है और इसका बोझ मरीजों तथा टैक्सपेयर्स पर क्यों पड़ना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं पर एक समान 16 प्रतिशत मार्जिन रखने के विचार पर भी केंद्र का ध्यान आकर्षित किया। कोर्ट ने कहा कि दवाओं की कीमतों में इस तरह का अंतर आम मरीज के लिए गंभीर आर्थिक बोझ बन सकता है।
अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने पर सवाल
पीठ ने इस व्यवस्था पर भी केंद्र सरकार से गौर करने को कहा, जिसमें कुछ कॉर्पोरेट अस्पताल मरीजों को अपने अस्पताल की फार्मेसी या निर्धारित केमिस्ट से ही दवाएं खरीदने के लिए कहते हैं।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर किसी मरीज को अस्पताल के बाहर से दवा खरीदने पर इलाज की गारंटी को लेकर समस्या बताई जाती है, तो ऐसी व्यवस्था का असर मरीज पर पड़ता है।
केंद्र से मामले पर विचार करने को कहा
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले पर अधिकारियों के साथ चर्चा की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था तलाशनी होगी जिसमें मरीजों, अस्पतालों और फार्मा सेक्टर समेत सभी संबंधित पक्षों के हितों में संतुलन रहे।
यह मामला Drugs Order, 2013 के तहत दवाओं की कीमतों के नियमन, जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल और मेडिकल डिवाइस की कीमतों से जुड़े सवालों वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया।



