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​बिम्सटेक बैठक से पहले कूटनीतिक हलचल तेज

नई दिल्ली। क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच होने वाली बैठकों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। बिम्सटेक की प्रस्तावित बैठक को लेकर उस समय चर्चा तेज हो गई, जब खबर सामने आई कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद बांग्लादेश के गृह मंत्री भारत आने के इच्छुक नहीं हैं। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा और पड़ोसी देशों के आपसी संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

​बिम्सटेक बैठक से पहले कूटनीतिक हलचल तेज

बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल, दक्षिण तथा दक्षिणपूर्व एशिया के देशों को एक साझा मंच प्रदान करती है। इसका उद्देश्य व्यापार, संपर्क व्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।

क्या है बिम्सटेक और कौनकौन से देश हैं सदस्य?

बिम्सटेक में कुल सात देश शामिल हैं:

  1. भारत
  2. बांग्लादेश
  3. भूटान
  4. नेपाल
  5. श्रीलंका
  6. म्यांमार
  7. थाईलैंड

ये देश बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते हैं।

बांग्लादेश के रुख पर क्यों टिकी निगाहें?

बांग्लादेश और भारत के संबंधों में सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, व्यापार और राजनीतिक संवाद जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में बांग्लादेश के गृह मंत्री की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर सामने आई खबर क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में अहम मानी जा रही है।

हालांकि, यात्रा से इनकार करने के कारणों, संबंधित बयान और बैठक में बांग्लादेश की आधिकारिक भागीदारी की स्थिति की पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इसे दोनों देशों के संबंधों में किसी बड़े बदलाव का निर्णायक संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है बिम्सटेक?

बिम्सटेक भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और हिंदप्रशांत क्षेत्र में संपर्क तथा सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ व्यापार, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग और क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों पर संवाद करता है।

 

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