देश में पितृपक्ष खत्म होते देश में फेस्टिव सीजन शुरू हो जाता है. वैसे देश के कुछ हिस्सों में फेस्टिव सीजन की शुरुआत गणेश चतुर्थी या यूं कहें कि रक्षाबंधन से शुरू हो जाती है. तभी से ही देश में सोना या फिर सोने के गहनों को खरीदने का सिलसिला भी शुरू होता है. सोने की कीमतें आसमान पर हैं. देश की राजधानी दिल्ली में सोने के दाम 1.50 लाख रुपए के करीब हैं. ऐसे में टैक्स बचाने के लिए देश में ज्यादातर खरीदार कैश में बिना रसीद के सोना या गोल्ड ज्वेलरी खरीद रहे हैं. जिनका पता अधिकारियों के लिए भी लगाना मुश्किल हो सकता है. लोगों का कहना है कि इस तरह से वो बाजार भाव के मुकाबले में 6 फीसदी तक की बचत कर रहे हैं. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं.

कस्टमर को 5000 रुपए की छूट
इस कारोबार से जुड़े पांच लोगों के मुताबिक, कैश में बिना रिकॉर्ड के खरीदारी करने पर थोक खरीदारों को मौजूदा बाजार भाव से 6 फीसदी तक की बचत हो सकती है. कैश लेने वाले डीलर टैक्स से बच सकते हैं और सेविंग का कुछ हिस्सा ग्राहकों को दे सकते हैं. दिल्ली के रहने वाले अनुराग ने अपनी बेटी की शादी के लिए गहने खरीदे. उन्हें हर 10 ग्राम पर 5,000 रुपए की छूट मिली — लेकिन उन्होंने कोई रसीद नहीं ली. इस साल की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद, अनुराग के लिए इस सेविंग को नजरअंदाज़ करना मुश्किल था. उन्होंने बताया कि उन्हें अपने कुल बिल 60 से 70 हजार रुपए की सेविंग हुई. वैसे साल की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में काफी गिरावट देखने को मिल चुकी है. उसके बाद भी पिछले साल के मुकाबले में सोने के दाम अभी ाी 28 फीसदी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं.
शैडो ट्रेड का फिर बढ़ रहा चलन
अनुराग ने बताया कि ये ऑफर काफी अच्छा था जितना गोल्ड उन्होंने खरीदा, उस पर उन्हें 60 से 70 हजार रुपए की सेविंग कम नहीं थी. सोने की कीमतें बहुत ज़्यादा हैं और हमें जौहरी पर भरोसा है. उन्होंने अनुरोध किया कि ट्रांजेक्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए उनके सिर्फ पहले ही नाम का यूज किया जाए तो बेहतर होगा. अनुराग उन खरीदारों में से एक हैं जो इस अनौपचारिक कारोबार या यूं कहें कि शैडो ट्रेड की ओर बढ़ रहे हैं. यह कारोबार तब से बढ़ा है जब सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क दोगुना से ज्यादा करके 15 फीसदी कर दिया था. यह कदम भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को देखते हुए खरीदारी को कम करने के लिए उठाया गया था. रिटेल कस्टमर्स को 3 फीसदी एक्स्ट्रा गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स देना पड़ता है.
इंपोर्ट से पूरी होती है गोल्ड की डिमांड
शैडो ट्रेड का फिर से बढ़ना उस पॉलिसी का अनचाहा नतीजा है जिसे भारत में सोने की मांग को कम करने के लिए बनाया गया था. चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कंज्सूमर होने के नाते, भारत जन्म, त्योहारों और सबसे बढ़कर शादियों के मौकों पर सोना खरीदता है. यह गहने, उपहार और परिवार की सेविंग के तौर पर काम आता है. घरेलू प्रोडक्शन कम होने के कारण, ज्यादातर मांग इंपोर्ट से पूरी होती है, जिससे व्यापार बिल और करेंसी पर भारी बोझ पड़ता है. कैश मार्केट में, व्यापारियों को मौजूदा घरेलू कीमतों की तुलना में 200 डॉलर प्रति औंस तक की छूट पर सोना मिल रहा है. बिखरे हुए और शैडो ट्रेड में कीमतें बहुत अलगअलग होती हैं, जहां सौदे किसी आम बेंचमार्क के बजाय अलगअलग बातचीत करके तय किए जाते हैं.
Gold
शैडो सप्लाई की इकोनॉमिक्स
लंदन की कंपनी ‘मॉनेटरी मेटल्स’ के मिडिल ईस्ट और एशिया ऑपरेशन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर हिरेन चंडारिया ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि पैरेलल मार्केट में इतनी बड़ी छूट मुख्य रूप से शैडो सप्लाई की इकोनॉमिक्स को दिखाती है. ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी सोने के आधिकारिक ड्यूटीपेड चैनल के बाहर से आने के लिए बहुत ज्यादा प्रोत्साहन पैदा करती है. इसकी तुलना में, कंसल्टेंसी ‘मेटल्स फोकस’ के अनुसार, सितंबर में आधिकारिक चैनलों के जरिए इम्पोर्ट किए गए सोने की लैंडेड कीमतों पर छूट औसतन लगभग 50 डॉलर प्रति औंस थी. इस बीच, कुछ रिटेल ग्राहक अपनी मोलभाव करने की क्षमता और ज्वैलर के साथ अपने संबंधों के आधार पर प्रति 10 ग्राम 10,000 रुपए तक की छूट पा सकते हैं.
तेल के बाद से ज्यादा गोल्ड का होता है इंपोर्ट
तेल के बाद सोना भारत की सबसे बड़ी इम्पोर्ट की जाने वाली कमोडिटी है और ट्रेड डेफिसिट में इसका बड़ा योगदान है, जो जुलाई में बढ़कर लगभग 32 बिलियन डॉलर हो गया जो इस साल का सबसे ज्यादा का लेवल है. जुलाई तक के चार महीनों में इन शिपमेंट्स का बिल एक साल पहले की तुलना में 32 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया, जिसके कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच महीनों में दूसरी बार भारतीयों से खरीदारी से बचने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद करने का आग्रह किया. हालांकि, अगस्त में इम्पोर्ट एक साल पहले के स्तर के आधे से भी कम हो गया.
भारत में शैडो गोल्ड का ट्रेड लगभग हमेशा से रहा है, लेकिन जब इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी थी, तब आधिकारिक चैनलों को दरकिनार करने का कोई खास प्रोत्साहन नहीं था. हालिया बढ़ोतरी ने अनौपचारिक व्यापार को फिर से जीवित कर दिया है और यह शादी और त्योहारों के मौसम से पहले फलफूल रहा है, जो अक्टूबर के मिड से शुरू होकर मार्च की शुरुआत तक चलता है. चंडारिया ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि आज सोने की कीमतों पर, प्रतिशत में थोड़ा सा अंतर भी रुपए के हिसाब से कॉस्ट में काफी अंतर पैदा करता है.



