
नयी दिल्ली, अमृत विचार : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा को मौजूदा के 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के ईपीएफओ के अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा दायरे में आने की उम्मीद है। वेतन सीमा में यह बदलाव 12 साल बाद किया गया है। इससे कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग को भविष्य निधि, पेंशन और संबंधित बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आने की उम्मीद है। इससे कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक होगा। ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक अपरिवर्तित रही थी।
इसके बाद सितंबर, 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, वेतन में लगातार वृद्धि, बढ़ती आय और संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ोतरी को देखते हुए वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया गया। इस फैसले से सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच साल में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।



