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​Explained: कच्चे तेल ने बिगाड़ा सोने का गणित….क्या ₹1.50 लाख से नीचे आएगा Gold?

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 109 डॉलर प्रति बैरल के करीब दिखाई दिए. जिसकी वजह से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में महंगाई का संकट बढ़ गया है. ऐसे में दुनिया का सबसे बड़ा सेंट्रल बैंक फेड रिजर्व एक बार फिर से ब्याज दरों में इजाफा करने के बारे में सोच रहा. जिसका असर अब न्यूयॉर्क से लेकर मुंबई तक साफ देखने को मिल रहा है. जहां अमेरिका में गोल्ड के दाम 4300 डॉलर प्रति ओंस के लेवल पर दिखाई दिए. वहीं दूसरी ओर भारत के वायदा बाजार में सोने के दाम 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के लेवल पर दिखाई दे रहे हैं. उम्मीद की जा रही है. महंगाई और ब्याज दरों में इजाफे के डर से सोने की कीमतों में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है और दाम 1.50 लाख रुपए के लेवल पर देखने को मिल सकती है.

​Explained: कच्चे तेल ने बिगाड़ा सोने का गणित….क्या ₹1.50 लाख से नीचे आएगा Gold?

अगर बात चांदी की बात करें तो प्रोडक्शन और सप्लाई में कमी आने और इंडस्ट्रीयल डिमांड बने रहने के बावजूद भी मेटल में तेजी देखने को नहीं मिल रही है. अमेरिकी फ्यूचर मार्केट में चांदी के दाम 63 डॉलर के करीब बनी हुई है. वहीं भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमतें 2.30 लाख रुपए से नीचे आ गई हैं. जोकि अपने पीक से 40 फीसदी से ज्यादा नीचे है. जानकारों की मानें तो अगर दुनिया के सेंट्रल बैंकों ने महंगाई को देखते हुए ब्याज दरों में इजाफा करना शुरू कर दिया तो सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

शुरुआत इंटरनेशनल मार्केट से करते हैं…

लोकल लेवल पर सोने और चांदी के दाम इंटरनेशनल मार्केट तय करता है. तो पहले शुरुआत यहीं से करते हैं. न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में सोने और चांदी के दाम में गिरावट देखने को मिल रही है. भारत के समय के अनुसार शाम 5 बजकर 55 मिनट पर गोल्ड फ्यूचर करीब 82 डॉलर प्रति ओंस की गिरावट के साथ 4,327 डॉलर प्रति ओंस पर कारोबार कर रहा था. जबकि गोल्ड स्पॉट के दाम 52.70 डॉलर प्रति ओंस गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. इसका मतलब है कि सोना 4,296.38 डॉलर प्रति ओंस पर कारोबार कर रहा था.

वहीं दूसरी ओर चांदी की बात करें तो न्यूयॉर्क के फ्यूचर मार्केट में चांदी की कीमतें करीब 3 फीसदी की गिरावट के साथ 63.37 डॉलर प्रति ओंस पर कारोबार कर रही थी. जबकि सिल्वर स्पॉट के दाम 2.21 फीसदी की गिरावट के साथ 63.0635 डॉलर प्रति ओंस पर कारोबार कर रही थी.

यह गिरावट तब आई है जब पिछले एक साल में सोने का प्रदर्शन अच्छा रहा है और कीमतें अभी भी लगभग 16.6 प्रतिशत ऊपर हैं. हाल के हफ़्तों में यह सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के ऊपर चला गया था, जिससे इसमें मुनाफावसूली की गुंजाइश बन गई. साथ ही निवेशक ब्याज दरों और महंगाई को लेकर एक बार फिर से आंकलन कर रहे हैं.

भारत में सोने और चांदी की कीमतें

वहीं दूसरी ओर भारत के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. आंकड़ों को देखें तो सोमवार को शाम को 5 बजे शुरू हुए कारोबार में सोने और सिल्वर दोनों ही गिरावट के साथ ओपन हुए. पहले बात सोने की करें तो कारोबारी सत्र के दौरान सोना 2,313 रुपए यानी 1.51 फीसदी की गिरावट के साथ 1,50,471 रुपए प्रति दस ग्राम के लेवल पर पहुंच गए. जबकि आज सोना 1,50,896 रुपए पर ओपन हुआ और था. बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सोने के दाम 1,52,784 रुपए पर बंद हुआ था. वैसे शाम 6 बजे सोने की कीमत 2,185 रुपए की गिरावट के साथ 1,50,599 रुपए पर कारोबार कर रहा है.

वहीं दूसरी ओर चांदी के दाम में और भी ​बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार चांदी के दाम 2.15 फीसदी यानी 5,055 रुपए प्रति किलोग्राम की गिरावट के साथ 2,29,919 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई. जबकि पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन चांदी की कीमत 2,34,974 रुपए प्रति किलोग्राम पर थी. वैसे सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी के दाम 2,31,507 रुपए प्रति किलोग्राम पर पर ओपन हुए थे. अगर बात शाम 6 बजकर 5 मिनट की करें तो चांदी की कीमत 4,303 रुपए की गिरावट के साथ 2,30,671 रुपए प्रति किलोग्राम पर दिखाई दे रही है.

इन वजहों से सोने और चांदी में आ सकती है और गिरावट

  1. कच्चे तेल की कीमतों में नई तेजी ने दबाव और बढ़ा दिया है. सोमवार को सऊदी अरब द्वारा ड्रोन हमलों के बाद अपनी अहम ईस्टवेस्ट पाइपलाइन बंद करने के बाद कच्चे तेल की कीमतें चार महीने के ऊंचे स्तर की ओर बढ़ गईं. इस रुकावट और मिडिल ईस्ट के संघर्ष से पैदा हुए सप्लाई और शिपिंग के बड़े जोखिमों ने इस चिंता को फिर से जगा दिया है कि ऊर्जा की ज़्यादा कीमतें ग्लोबल महंगाई को ऊंचा बनाए रख सकती हैं.
  2. इससे फेडरल रिज़र्व के ज्यादा सख्त रुख की उम्मीदें मजबूत हुई हैं. रॉयटर्स के अनुसार, बाजार अब बुधवार को 25बेसिसपॉइंट की दर बढ़ोतरी की लगभग 90 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं. ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने पर दबाव डालती हैं क्योंकि बिना ब्याज या रिटर्न देने वाली संपत्ति , ब्याज देने वाले निवेशों की तुलना में कम आकर्षक हो जाती है.
  3. अमेरिका के हालिया महंगाई के आंकड़ों ने इन चिंताओं को और पुख्ता किया है. जुलाई में 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद अगस्त में कंज्यूमर कीमतें 0.4 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि सालाना महंगाई 3.4 प्रतिशत रही. कोर CPI, जिसमें फूड और एनर्जी शामिल नहीं हैं, अगस्त में 0.3 प्रतिशत बढ़ा.
  4. इस बीच, ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली एक तय बैठक टलने के बाद मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक सफलता की उम्मीदें कम हो गई हैं. इस अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और सेंट्रल बैंकों के लिए महंगाई का जोखिम और बढ़ गया है.
  5. वहीं दूसरी ओर भारत में भी थोक और खुदरा महंगाई में इजाफा देखने को मिला है. सोमवार को थोक महंगाई के आंंकड़े 10 फीसदी के करीब पहुंच गई हैं. वहीं दूसरी ओर रिटेल महंगाई के आंकड़े 4.82 फीसदी पर आकर टिक गए हैं. जिसकी वजह से आरबीआई एमपीसी पर भी ब्याज दरों को लेकर काफी दबाव बढ़ गया है.

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