भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली एक बार फिर तेज हो गई है. पिछले तीन कारोबारी दिनों में FII ने भारतीय इक्विटी से करीब ₹29,613 करोड़ निकाल लिए हैं. 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली करीब ₹4.03 लाख करोड़ पहुंच चुकी है.

3 दिन में करीब ₹30 हजार करोड़ की निकासी
FII ने 29 सितंबर को ₹9,980 करोड़, 30 सितंबर को ₹10,148 करोड़ और 1 अक्टूबर को ₹9,484 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की. यानी केवल तीन दिनों में ₹29,612.85 करोड़ भारतीय शेयरों से बाहर निकल गए. अक्टूबर की शुरुआत भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के साथ हुई है. 2026 में जनवरी से सितंबर तक हर महीने FII नेट सेलर रहे हैं. सितंबर में ही करीब ₹44,013 करोड़ की बिकवाली हुई, जबकि मार्च में यह आंकड़ा ₹1.22 लाख करोड़ से ज्यादा रहा.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ना बड़ी वजह
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी को माना जा रहा है. अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 5.34% तक पहुंच गई है, जो कई दशकों के ऊंचे स्तरों में है.
जब अमेरिकी बॉन्ड से डॉलर में अपेक्षाकृत ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो उभरते बाजारों से पूंजी अमेरिका की ओर जाने का दबाव बढ़ सकता है. इसके साथ डॉलर इंडेक्स भी 101102 के आसपास पहुंच गया है. बाजार विशेषज्ञों ने इसे FII आउटफ्लो बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल किया है.
100 डॉलर से ऊपर कच्चा तेल भी चिंता
भारत के लिए दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमत है. ब्रेंट क्रूड लंबे समय से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. अमेरिकाईरान तनाव के बीच तेल की कीमतों में इस साल अब तक करीब 65% की बढ़ोतरी बताई गई है.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए महंगा तेल आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर क्रूड रहने से भारत की आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है.
कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता
विदेशी निवेशकों के लिए घरेलू स्तर पर भी कुछ चिंताएं बढ़ी हैं. इस साल मानसून में करीब 13% की कमी बताई गई है और कुछ राज्यों में सूखे जैसे हालात की चिंता सामने आई है. कम बारिश का असर कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है. इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है. तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर मानसून के साथ रुपये और व्यापार घाटे को लेकर भी चिंता बढ़ी है.
अब RBI की बैठक पर नजर
बाजार की नजर अब आगामी RBI की मौद्रिक नीति बैठक पर है. निवेशक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और मानसून की स्थिति जैसे संकेतकों पर भी नजर रखेंगे. FII की बिकवाली कितने समय तक जारी रहती है, यह इन वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों में आने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा.



