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​ग्रीन हाइड्रोजन…पानी से बनने वाला वो ईंधन, जिस पर दुनिया लगा रही है दांव

पीएम मोदी सोमवार को इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे. कार्यक्रम के लिए दिल्ली के भारत मंडपम में 130 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. समिट 2 से 5 नवंबर, 2026 तक चलेगी. इसकी थीम है ‘इन्वेस्ट, इनोवेट, इंस्पायर’. 12 राज्य और केंद्रीय शासित प्रदेश अपनी रिन्यूएबल एनर्जी का प्रदर्शन करेंगे. सूरज की रोशनी से बनने वाली सोलर एनर्जी, हवा से तैयार होने वाली पवन ऊर्जा, रिन्यूएबल एनर्जी का सबसे बेहतर उदाहरण है.

​ग्रीन हाइड्रोजन…पानी से बनने वाला वो ईंधन, जिस पर दुनिया लगा रही है दांव

भारत समेत दुनिया के कई देश अब तेल, गैस और कोयले पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यही वजह है कि दुनियाभर में रिन्यूएबल एनर्जी पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है. ये इनमें कार्बन उत्सर्जन को कंट्रोल में मदद मिलती है और बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है. इस बीच ग्रीन हाइड्रोजन की चर्चा है. एनर्जी समिट के साथ इस साल चौथा इंटरनेशनल ग्रीन हाइड्रोजन कॉन्फ्रेंस भी हो रहा है, जिसका फोकस इसकी तकनीक, निवेश और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर है.

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. जर्मनी में हाइड्रोजन ट्रेनें और दक्षिण कोरियायूरोप में हाइड्रोजन बसें चलाई जा रही हैं. चीन में इससे जुड़े दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रोलिसिस प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं. यूरोप के कई देशों में इसके पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं. सवाल यह है कि ग्रीन हाइड्रोजन आखिर है क्या, इसके अलगअलग “रंग” क्यों होते हैं और क्या यह सच में पेट्रोलडीजल की जगह ले पाएगा?

क्या है हाइड्रोजन?

हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे हल्का और सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है. दिक्कत यह है कि धरती पर यह अकेला नहीं मिलता. यह पानी और प्राकृतिक गैस जैसे यौगिकों में दूसरे तत्वों से बंधा रहता है. इसे अलग करना पड़ता है और जिस तरीके से अलग किया जाता है उसी से इसका रंग तय होता है. हाइड्रोजन का असली रंग नहीं होता, यह सिर्फ बनाने के तरीके की पहचान है. ईंधन के रूप में जलने पर यह सिर्फ पानी की भाप छोड़ता है.

केंद्रीय कैबिनेट ने 4 जनवरी 2023 को नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी थी. शुरुआती खर्च 19,744 करोड़ रुपये रखा गया, जिसमें 17,490 करोड़ रुपये SIGHT प्रोग्राम के लिए हैं. SIGHT के दो हिस्से हैं एक देश में इलेक्ट्रोलाइजर बनाने के लिए इंसेंटिव, दूसरा ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए.

क्या है ग्रे, ब्लू और ग्रीन हाइड्रोजन?

  • ग्रे हाइड्रोजन: प्राकृतिक गैस को भाप के साथ गर्म करके बनती है, जिसे स्टीममीथेन रिफॉर्मिंग कहते हैं. दुनिया में हर साल बनने वाले करीब 9.5 करोड़ टन हाइड्रोजन का बड़ा हिस्सा यही है. इसमें हर किलो हाइड्रोजन के साथ लगभग 9 से 11 किलो CO₂ निकलती है.
  • ब्लू हाइड्रोजन: प्रक्रिया वही है, लेकिन निकलने वाली CO₂ को पकड़कर जमीन के नीचे जमा किया जाता है. इससे उत्सर्जन घटता है, खत्म नहीं होता.
  • ग्रीन हाइड्रोजन: यह सौर या पवन ऊर्जा की बिजली से पानी को तोड़कर बनती है. इसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, इसीलिए इसे भविष्य का ईंधन कहा जा रहा है.
  • ब्राउनब्लैक हाइड्रोजन: कोयले से बनने वाली हाइड्रोजन को ब्राउन या ब्लैक कहते हैं, जो सबसे ज्यादा प्रदूषण करती है.

भारत की पहली हाइड्राेजन ट्रेन नमो ग्रीन रेल.

ग्रीन हाइड्रोजन के फायदे

1 हवा साफ होगी

पेट्रोलडीजल या कोयला जलाने पर धुआं और CO₂ निकलते हैं. हाइड्रोजन जलने पर सिर्फ पानी की भाप छोड़ती है. अगर इसे सौर या पवन बिजली से बनाया जाए, तो बनाने से लेकर इस्तेमाल तक प्रदूषण लगभग नहीं होता. मिशन का अनुमान है कि 2030 तक इससे सालाना करीब 5 करोड़ टन उत्सर्जन घट सकता है.

2 तेल और गैस का आयात कम होगा

भारत अपना ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. ग्रीन हाइड्रोजन देश में ही सूरज और हवा की बिजली से बनेगी, यानी ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता घटेगी. सरकार का अनुमान है कि इससे एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के जीवाश्म ईंधन आयात की बचत हो सकती है.

3 यहां दिखेगा बड़ा असर

इलेक्ट्रिक कार बैटरी से चल जाती है, लेकिन स्टील प्लांट, बड़े जहाज, भारी ट्रक और फर्टिलाइजर फैक्ट्री के लिए सिर्फ बिजली काफी नहीं होती. यहां हाइड्रोजन कोयले, डीजल और गैस की जगह ले सकती है. यही इसका सबसे बड़ा फायदा माना जा रहा है.

4 नौकरियां और निवेश आएंगे

इलेक्ट्रोलाइजर बनाने, रिन्यूएबल प्लांट लगाने और हाइड्रोजन प्लांट चलाने में नई इंडस्ट्री खड़ी होगी. मिशन के अनुसार 2030 तक 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश और 6 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हो सकती हैं.

5 निर्यात की संभावना

भारत में धूप और जमीन भरपूर है. अगर लागत कम हुई, तो भारत ग्रीन हाइड्रोजन या ग्रीन अमोनिया दूसरे देशों को बेच सकता है, जैसे आज तेल बेचने वाले देश करते हैं.

6 एनर्जी स्टोर करने का नया तरीका

सोलर बिजली दिन में बनती है, लेकिन जरूरत रात में भी होती है. फालतू बिजली से हाइड्रोजन बनाकर उसे जमा किया जा सकता है और बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है.ध्यान रखने वाली बात है कि ये सारे फायदे तभी मिलेंगे जब लागत कम हो. अभी ग्रीन हाइड्रोजन ग्रे से काफी महंगी है, इसलिए ये आंकड़े 2030 के लक्ष्य हैं, गारंटी नहीं.

हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे हल्का और सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है. फोटो:Pixabay

भारत में कहां हो रहा इस्तेमाल?

  • स्टील: केंद्र सरकार के मुताबिक, स्टील सेक्टर में ग्रीन हाइड्रोजन लाने के लिए 5 पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं. टाटा स्टील और JSW जैसी कंपनियां हाइड्रोजनआधारित आयरन प्लांट का पायलट प्रोजेक्अ चला रही हैं. JSPLजिंदल रिन्यूएबल्स का अंगुल में ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन स्टील प्रोजेक्ट और JSW विजयनगर भी चालू प्रोजेक्ट्स में गिने गए हैं.
  • रिफाइनरी और गैस कंपनियां: GAIL का विजयपुर प्रोजेक्ट और BPCL की बीना रिफाइनरी का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं. IOC अपनी पानीपत रिफाइनरी में 10,000 टन सालाना का भारत का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट बना रहा है जो दिसंबर 2027 तक पूरा होना है.
  • कांच और अन्य उद्योग: फरवरी 2026 तक 19 ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन प्रोजेक्ट चालू हो चुके थे, जिनकी कुल क्षमता 4,300 टन सालाना से ज्यादा है. ये स्टील, कांच, रिफाइनरी और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं.
  • ट्रांसपोर्ट: 5 पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुल 37 हाइड्रोजन बसें और ट्रक चलाए जाने हैं, जिनमें 15 फ्यूल सेल वाले और 22 हाइड्रोजन कंबश्चन इंजन वाले हैं. ये 10 अलगअलग भौगोलिक और मौसमी रूट्स पर चलेंगे.
  • समुद्री ईंधन: वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी ग्रीन मेथनॉल के लिए बंकरिंग और रिफ्यूलिंग सुविधा विकसित कर रहा है.
  • फर्टिलाइजर: 13 फर्टिलाइजर प्लांट्स को 7.24 लाख टन सालाना ग्रीन अमोनिया की सप्लाई के लिए कीमतें तय हो चुकी हैं. मार्च 2026 में SECI ने ग्रीन अमोनिया सप्लाई के लिए निर्माताओं से 6 करार किए, यानी मांग तय हो गई है, लेकिन सप्लाई शुरू होना बाकी है

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