
लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश सरकार अब जेन जी को किताबों से आगे ले जाकर अपनी जड़ों, इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की तैयारी में है। इसके लिए राजकीय संग्रहालयों और विद्यार्थियों को ‘एक दिवसीय अध्ययन यात्रा योजना’ के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। पहल की शुरुआत लखनऊ स्थित राज्य संग्रहालय से हुई, जहां लखनऊ जनपद के पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, माल और पीएम श्री राजकीय उत्तर प्रदेश सैनिक इंटर कॉलेज, सरोजनीनगर के करीब 600 छात्रछात्राओं ने शैक्षिक भ्रमण किया।
संग्रहालय में ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देखने और उनके बारे में जानने को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। अब 15 सितंबर को उन्नाव के तीन पीएम श्री विद्यालयों के विद्यार्थी राज्य संग्रहालय आएंगे। वहीं 16 और 17 सितंबर को सीतापुर के सात पीएम श्री विद्यालयों के करीब 3000 विद्यार्थी संग्रहालय का भ्रमण करेंगे।
इन जिलों के छात्र भी आएंगे लखनऊ
योजना के तहत 18 सितंबर को रायबरेली जिले के पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बछरावां और पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज डीह के विद्यार्थी लखनऊ में शैक्षिक भ्रमण करेंगे।
इसके बाद 19 सितंबर को बाराबंकी के पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज सूरतगंज, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हैदरगढ़, पीएम श्री राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरौलीजाटा, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज फतेहपुर, पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जैदपुर मोड़ और पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज बाराबंकी के विद्यार्थी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मुफ्त प्रवेश के साथ मिलेगी गाइडेड विजिट
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘एक दिवसीय अध्ययन यात्रा योजना’ के तहत पीएम श्री राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपने जिले या आसपास के जिले में स्थित संस्कृति विभाग से जुड़े संग्रहालयों का भ्रमण कराया जाएगा।
विद्यार्थियों को संग्रहालयों में निःशुल्क प्रवेश, आवश्यक सहयोग और गाइडेड विजिट की सुविधा मिलेगी। इसका उद्देश्य संग्रहालयों को सिर्फ देखने की जगह तक सीमित न रखकर उन्हें विद्यार्थियों के लिए कक्षा से आगे सीखने की जीवंत प्रयोगशाला के रूप में विकसित करना है।
यहां विद्यार्थी प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देख सकेंगे और उसके महत्व को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
जियोटैग फोटोवीडियो से दर्ज होगी पूरी गतिविधि
अध्ययन यात्रा के दौरान होने वाली गतिविधियों की जियोटैग फोटो और वीडियो राज्य परियोजना कार्यालय को ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे विद्यार्थियों की भागीदारी और संग्रहालय भ्रमण से जुड़ी गतिविधियों का रिकॉर्ड भी तैयार होगा।
योजना का लाभ प्रदेश के 57 जिलों के विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलेगा। इनमें आगरा, अलीगढ़, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, अयोध्या, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हमीरपुर, हरदोई, जालौन, झांसी, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ, महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संभल, सहारनपुर, संत कबीरनगर, शाहजहांपुर, सीतापुर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।
पुरावशेषों से समझेंगे किताबों में पढ़ा इतिहास
जयवीर सिंह ने बताया कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षण संस्थानों के साथसाथ इतिहास, कला, संस्कृति और विरासत से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है।
संग्रहालयों में रखे पुरावशेष, मूर्तियां, सिक्के, चित्र और अन्य ऐतिहासिक साक्ष्य विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों में पढ़ी जानकारी को सामने से देखने, समझने और अनुभव करने का अवसर देंगे। इससे पढ़ाई को अधिक रोचक और अनुभव आधारित बनाने के साथ विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति जिज्ञासा भी बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय, लखनऊ की ओर से प्रदेश के संग्रहालयों और वहां कार्यरत अधिकारियों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि विद्यालय अपने विद्यार्थियों के लिए अध्ययन यात्रा की योजना आसानी से बना सकें। संबंधित विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थियों को एक दिवसीय अध्ययन यात्रा के तहत नजदीकी संग्रहालय का भ्रमण कराया जाए।
नई पीढ़ी में विरासत से जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि इस पहल से प्रदेश के अलगअलग जिलों के हजारों विद्यार्थियों को अपने आसपास मौजूद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की यह पहल नई पीढ़ी में अपनी विरासत को लेकर समझ और गर्व की भावना मजबूत करने के साथ संग्रहालयों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
किताबों में पढ़े इतिहास को जब विद्यार्थी संग्रहालयों में मौजूद वास्तविक धरोहरों के माध्यम से देखेंगे, तो उनके लिए सीखने का अनुभव अधिक रोचक, यादगार और प्रभावी होगा।
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