
नई दिल्ली: भारत ने वैश्विक यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक में बड़ी छलांग लगाई है। विश्व आर्थिक मंच की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत नौ पायदान की बढ़त के साथ 31वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत की इस प्रगति में लागतप्रतिस्पर्धी यात्रा माहौल, समृद्ध सांस्कृतिक संसाधन, प्राकृतिक संपदा और पर्यटन मांग का बेहतर वितरण अहम कारक रहे।
सूचकांक में जापान शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद अमेरिका, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस शीर्ष पांच देशों में शामिल हैं।
पर्यटन बुनियादी ढांचे में सुधार से मिली बढ़त
WEF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पर्यटन बुनियादी ढांचे, सांस्कृतिक संसाधनों और कारोबारी यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में तेजी से सुधार किया है। इन क्षेत्रों में प्रगति का भारत की रैंकिंग में सुधार में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हालांकि, रिपोर्ट में भारत के सामने कुछ चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें कार्यबल के कौशल, पर्यावरणीय स्थिरता और पर्यटन बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता प्रमुख हैं।
विश्व धरोहर स्थलों में भी भारत शीर्ष 10 में
चीन, भारत और मेक्सिको विश्व धरोहर के सांस्कृतिक स्थलों की संख्या के मामले में दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल हैं। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन क्षेत्र की महत्वपूर्ण ताकत के रूप में रेखांकित करता है।
110 में से 101 अर्थव्यवस्थाओं में हुआ सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच दुनिया की 110 में से 101 अर्थव्यवस्थाओं के यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक स्कोर में सुधार हुआ है। इस अवधि में वैश्विक औसत स्कोर 2.1 प्रतिशत बढ़ा, जो 2019 के बाद सबसे तेज वृद्धि है।
WEF ने कहा कि सांस्कृतिक संसाधनों, पर्यटन बुनियादी ढांचे और सेवाओं, हवाई संपर्क तथा कारोबारी यात्रा में वृद्धि ने वैश्विक पर्यटन क्षेत्र के इस सुधार को गति दी है।
पर्यटन सस्ता होना बनी चुनौती
WEF की अनुभव अर्थव्यवस्था एवं शहर इकाई की प्रमुख राम्या कृष्णास्वामी ने कहा कि नवीनतम यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक से पता चलता है कि महामारी के बाद यात्रा और पर्यटन के लिए अनुकूल परिस्थितियां सबसे मजबूत स्तर पर हैं। उनके मुताबिक, 2024 के बाद 92 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं में सुधार हुआ है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2024 से 2026 के बीच चार में से तीन अर्थव्यवस्थाओं में यात्रा कम किफायती हुई। पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ती मांग के अनुरूप नहीं बढ़ सका और श्रम की कमी भी इसके आगे के विकास के लिए चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन बढ़ने के बावजूद स्थानीय समुदायों को मिलने वाले लाभ में कमी आई है। अधिक पर्यटकों का आना अपने आप बेहतर आजीविका या बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरियों की गारंटी नहीं देता, खासकर उन पर्यटन स्थलों पर जहां पर्यटन काफी हद तक मौसमी होता है।



