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​ग्लोबल इकोनॉमी में गूंजेगा भारत का डंका! कोरियाई अर्थशास्त्री बोले- अगले दो दशकों तक कोई नहीं रोक पाएगा इंडिया की रफ्तार

कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी में दक्षिण एशिया के प्रमुख, क्यूंगहून किम के अनुसार, भारत दशकों में पहली बार 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि के सबसे लंबे दौर की ओर बढ़ सकता है. ‘X’ पर पोस्ट की एक श्रृंखला में, इस अर्थशास्त्री ने बताया कि कैसे COVID19 महामारी के बाद से भारतीय इकोनॉमी ने मजबूत ग्रोथ रेट बनाए रखी है, और अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी अगले दो वित्तीय वर्षों के लिए अपने विकास अनुमानों को बढ़ा रही हैं.

​ग्लोबल इकोनॉमी में गूंजेगा भारत का डंका! कोरियाई अर्थशास्त्री बोले- अगले दो दशकों तक कोई नहीं रोक पाएगा इंडिया की रफ्तार

किम का यह विश्लेषण ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष , विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक ने भारत के लिए लगभग 7 प्रतिशत या उससे अधिक की विकास दर का अनुमान लगाया है. अर्थशास्त्री के अनुसार, भारत ने लगातार पांच कैलेंडर वर्षों में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जो 2003 से 2007 के बीच के प्रदर्शन के बराबर है. यदि हालिया अनुमान सच साबित होते हैं, तो देश उस पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है.

Nearly all major forecasters, including the IMF, ADB and World Bank, have recently raised their growth forecasts for India to above 7% for this year AND next. Remarkable in itself – even more so when viewed against Indias recent performance. https://t.co/3xfQdPvEsY

— Kyunghoon Kim October 16, 2026

कैसे टूट सकता है 20 साल पुरा रिकॉर्ड?

किम द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 में महामारी के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी, लेकिन 2021 में इसमें 9.7 प्रतिशत की जोरदार वापसी हुई. इसके बाद के चार वर्षों में, हर साल अर्थव्यवस्था में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई.

किम ने ‘X’ पर लिखा, “इस तरह लगातार पांच वर्षों तक 7% से अधिक की वृद्धि हुई है, जो 20032007 के दौर के बराबर है. उस समय, BRIC इकोनॉमीज में से एक के रूप में भारत ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था. उन्होंने आगे कहा कि अगर मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं, तो भारत इस सिलसिले को भी पीछे छोड़ देगा.

यह तुलना काफी अहम है. 20032007 का दौर भारत के लिए लगातार आर्थिक विस्तार के सबसे मजबूत चरणों में से एक था, जब देश ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का काफी ध्यान आकर्षित किया था.

महामारी के बाद भारत की ग्रोथ रेट हाई लेवल के करीब

किम ने एक और आंकड़े का जिक्र किया, जो भारत के हालिया प्रदर्शन को सही संदर्भ में समझने में मदद करता है. उनके हिसाब से, 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत रही, जबकि 20032007 के दौरान यह 7.89 प्रतिशत थी. इस तरह, 1960 से अब तक के इतिहास में यह हालिया पांच साल की अवधि दूसरी सबसे मजबूत अवधि बन गई है.

किम ने लिखा कि कई सालों तक इस तरह की गति को बनाए रखना वाकई ध्यान देने योग्य है. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत का हालिया आर्थिक विस्तार, महामारी के तुरंत बाद हुई रिकवरी से कहीं आगे तक गया है.

IMF, विश्व बैंक और ADB ने भारत के अनुमानों को बढ़ाया

किम ने अपने थ्रेड में बताया कि कैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के आर्थिक प्रदर्शन को लेकर पहले से कहीं अधिक सकारात्मक हो गई हैं. हाल ही में IMF ने 202627 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है. अक्टूबर की अपनी ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 202728 में भी 7 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है.

किम ने लिखा कि कई अर्थशास्त्रियों ने जिसमें मैं भी शामिल हूं जैसेजैसे तिमाही GDP के आंकड़े आते गए, अपने अनुमानों को बारबार ऊपर की ओर संशोधित किया. उनके चार्ट दिखाते हैं कि विश्व बैंक, IMF और ADB ने अपने अनुमानों को बढ़ाया है, और हालिया अनुमान 7 प्रतिशत के आसपास या उससे ऊपर हैं. वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों, भूराजनीतिक तनावों और कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में धीमी आर्थिक वृद्धि की चिंताओं के बीच, ये सुधार काफी मायने रखते हैं.

भारत की 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट का क्या मतलब है?

किम ने बताया कि पिछले उच्च विकास दौर के मुकाबले अब भारत की अर्थव्यवस्था काफी बड़ी हो चुकी है. उनके साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2007 में भारत की GDP 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी ही अधिक थी. आज, यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है. इसका मतलब यह है कि आज 7 प्रतिशत की विकास दर का मतलब आर्थिक उत्पादन में कहीं अधिक बड़ी वृद्धि है, जबकि लगभग दो दशक पहले इसी प्रतिशत का मतलब इतना बड़ा नहीं होता था. किम ने समझाया, इसलिए, 7 प्रतिशत की वही विकास दर अब कहीं अधिक बड़े विस्तार को दर्शाती है. उन्हें उम्मीद है कि 2030 के आसपास भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, हालांकि ऐसी रैंकिंग विनिमय दरों, मुद्रास्फीति और अन्य देशों के प्रदर्शन पर निर्भर करती है.

भारत के प्रदर्शन पर ध्यान दिया जाना चाहिए

लगभग 140 करोड़ की आबादी वाली अर्थव्यवस्था के लिए 7 प्रतिशत से अधिक की लगातार विकास दर एक बड़ी उपलब्धि होगी. फिर भी, जीडीपी की मुख्य विकास दर का मतलब अपने आप यह नहीं है कि परिवारों की आय, रोजगार के अवसरों या जीवन स्तर में भी समान रूप से सुधार हुआ है. नौकरियां पैदा करने की गति, निजी निवेश और आय में वृद्धि ये महत्वपूर्ण पैमाने बने रहेंगे जिनसे पता चलेगा कि आर्थिक लाभ भारतीय परिवारों तक किस हद तक पहुंच रहे हैं. किम ने चुनौतियों को स्वीकार किया, लेकिन उनका तर्क था कि भारत के प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मान्यता मिलनी चाहिए. उन्होंने लिखा कि कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन 1.4 अरब लोगों वाले देश के इस आर्थिक प्रदर्शन का जश्न मनाया जाना चाहिए. उन्होंने अपनी बात एक सकारात्मक नोट के साथ खत्म की और उम्मीद जताई कि भविष्य में आने वाले तिमाही जीडीपी आंकड़े अर्थशास्त्रियों को अपने पूर्वानुमानों को और बेहतर करने का मौका देंगे.

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