जियो प्लेटफॉर्म्स का डंका दुनिया में बज रहा है. कंपनी शेयर बाजार में उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गई है जिन्होंने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के समय 100 अरब डॉलर से अधिक की इक्विटी वैल्यूएशन हासिल की है. खास बात तो ये है कि जियो से पहले इस लिस्ट में मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स का नाम शामिल है. जियो प्लेटफॉर्म्स ने बुधवार, 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की और भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनी बन गई.

शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर 1,358 रुपए प्रति शेयर के भाव पर लिस्ट हुए, जो इसके 1,119 रुपए के IPO इश्यू प्राइस से 21.4 प्रतिशत अधिक था. इस लिस्टिंग के साथ कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 12.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया. भारत में मार्केट कैपिटलाइजेशन की रैंकिंग में यह अपनी मूल कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज के ठीक पीछे है.
अपने IPO ऑफर प्राइस के आधार पर, रिलायंस इंडस्ट्रीज की यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स का वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपए आंका गया था. इस तरह, यह मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स जैसी उन कंपनियों की कैटेगिरी में आ गई, जिनका मार्केट में पहली बार उतरते समय वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर से अधिक था.
जियो ने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ा
इस मजबूत लिस्टिंग की बदौलत जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ दिया और मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से भारत की सबसे मूल्यवान टेलीकॉम कंपनी बन गई. इस शुरुआत ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थिति को और मजबूत कर दिया है, जिससे रिलायंस ग्रुप अपनी सभी लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर भारत का सबसे मूल्यवान समूह बन गया है.
शेयरहोल्डर कैटेगरी के तहत जिन निवेशकों को न्यूनतम 23 शेयरों का लॉट मिला था, उन्हें IPO अलॉटमेंट प्राइस के मुकाबले लिस्टिंग प्राइस पर 5,497 रुपए का फायदा हुआ. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में आयोजित लिस्टिंग समारोह में अंबानी परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, जिन्होंने एक औपचारिक घंटी बजाकर इस अवसर की शुरुआत की.
जियो IPO को निवेशकों की रिकॉर्ड मांग मिली
वैश्विक इक्विटी बाजारों में उतारचढ़ाव और भारतीय बाजारों में बिकवाली के दबाव के बावजूद, जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपए के IPO को भारी मांग मिली. इस इश्यू को 22 गुना से अधिक सब्सक्राइब किया गया. पब्लिक ऑफरिंग और एंकर इन्वेस्टर प्लेसमेंट को मिलाकर कुल मांग 7.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक रही. पब्लिक इश्यू खुलने के 95 मिनट के भीतर ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया, और कुल आवेदनों की संख्या 1.3 करोड़ के पार पहुंच गई.
यह IPO, जियो के पूंजी जुटाने के सफर में एक और बड़ा मील का पत्थर है. इससे पहले 2020 में, जियो ने 13 रणनीतिक और प्राइवेट इक्विटी निवेशकों से प्राइवेट मार्केट के जरिए लगभग 20 अरब डॉलर जुटाए थे. उस फंड जुटाने की प्रक्रिया के दौरान मेटा और गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनियां, जियो प्लेटफॉर्म्स से जुड़ीं.
कैसा रहा है जियो का सफर
जियो प्लेटफॉर्म्स का पब्लिक मार्केट में आना, रिलायंस जियो के भारतीय टेलीकॉम उद्योग में कदम रखने और किफायती मोबाइल डेटा की पहुंच बढ़ाने के एक दशक बाद हुआ है. मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी के अनुसार, कंपनी के पास अब 540 मिलियन से अधिक ग्राहक हैं. लिस्टिंग समारोह में, अंबानी ने जियो की डिजिटल सेवाओं को टेलीकॉम कनेक्टिविटी से आगे बढ़ाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, कनेक्टेड डिवाइस और स्पेसआधारित कनेक्टिविटी तक विस्तार करने की योजना बताई. कंपनी अपनी खुद की टेलीकॉम तकनीक से कमाई करने के लिए, विदेशी ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौके तलाश रही है.



