उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है. लंबे समय से चल रही संगठनात्मक बदलाव की अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी ने रामपुर खास से विधायक और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा मोना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. वहीं, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है.

अजय राय की जगह अब आराधना मिश्रा कांग्रेस की प्रदेश इकाई की कमान संभालेंगी. कांग्रेस की नई टीम में सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश भी दिखाई दे रही है. ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और अति पिछड़े समाज से जुड़े चेहरों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं.
मोना के जरिए ब्राह्मण चेहरा
आराधना मिश्रा मोना प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुकी हैं. वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. प्रमोद तिवारी रामपुर खास से नौ बार विधायक रहे हैं. इसके बाद उन्होंने राज्यसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई. रामपुर खास विधानसभा सीट पर तिवारी परिवार का करीब 47 साल से राजनीतिक प्रभाव रहा है.
आराधना मिश्रा ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय राजनीति में हैं. वह कांग्रेस विधायक दल की नेता भी हैं. आराधना मिश्रा को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का करीबी माना जाता है. प्रियंका गांधी के लड़की हूं, लड़ सकती हूं अभियान में भी आराधना मिश्रा ने उनके साथ बड़े स्तर पर काम किया था.
सपा से हमेशा अच्छे संबंध
आराधना मिश्रा और पिता प्रमोद तिवारी से सपा से हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं. सपा इनके खिलाफ कैंडिडेट भी नहीं उतारती है. अजय राय बहुत मुखर थे, अब उनको हटा कर आराधना को जिम्मेदारी दी है. साथ ही इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया ताकि एकदम नतमस्तक न लगे. राहुल गांधी ने अजय राय को राष्ट्रीय टीम में लेने का भरोसा दिया है. अजय राय के अनुसार वह वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.
2014 से लगातार मजबूत होती गई राजनीतिक पहचान
आराधना मिश्रा की चुनावी राजनीति की बात करें तो 2014 के उपचुनाव में उन्होंने रामपुर खास से जीत दर्ज की. इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह इसी सीट से विधायक चुनी गईं. यानी अब तक रामपुर खास तक सीमित रही तिवारी परिवार की राजनीतिक विरासत को आराधना मिश्रा को पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन तक ले जाने की जिम्मेदारी मिली है.
इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पश्चिमी यूपी पर नजर
कांग्रेस ने सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी संगठन में अहम प्रतिनिधित्व दिया है. इमरान मसूद पश्चिमी यूपी में कांग्रेस का प्रमुख मुस्लिम चेहरा हैं. खास बात यह है कि वह कई मौकों पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को लेकर मुखर रहे हैं. ऐसे में उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दिया जाना कांग्रेस की अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
दलित और EBC चेहरे भी नई टीम का हिस्सा
नई टीम में दलित और अति पिछड़े समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है. महाराजगंज से आने वाले दलित नेता आलोक प्रसाद को सीनियर उपाध्यक्ष बनाया गया है. वहीं देवेंद्र निषाद को भी संगठन में अहम जिम्मेदारी मिली है. देवेंद्र निषाद फिशरमेन कांग्रेस के पूर्वी यूपी के अध्यक्ष रहे हैं और अति पिछड़ा समाज यानी EBC वर्ग से आते हैं.
देवेंद्र निषाद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. इस तरह नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और अति पिछड़ा समाज के प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है.
कांग्रेस का सामाजिक समीकरण क्या?
नई टीम को देखें तो कांग्रेस का फोकस अलगअलग सामाजिक समूहों और क्षेत्रों को साधने पर दिखाई देता है. प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ब्राह्मण चेहरा और पूर्वांचल से कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूदमुस्लिम चेहरा और पश्चिमी यूपी से, आलोक प्रसाद दलित चेहरा और महाराजगंज से, देवेंद्र निषाद EBC. निषाद समाज और पूर्वांचल से हैं.
यानी कांग्रेस की नई टीम में ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और अति पिछड़े समाज को प्रतिनिधित्व देकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की कोशिश नजर आती है.
एंटीब्राह्मण छवि के नैरेटिव को भी साधने की कोशिश
कांग्रेस के सामने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती रही है. ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर ब्राह्मण चेहरे के रूप में आराधना मिश्रा की नियुक्ति को पार्टी की इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. इसके साथ ही पार्टी दलित और मुस्लिम समाज के बीच भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस के भीतर यह भी माना जाता रहा है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार को लेकर ब्राह्मण समाज के बीच जो नाराजगी या असंतोष का नैरेटिव विपक्षी दल उठाते रहे हैं, कांग्रेस उसे अपने पक्ष में राजनीतिक मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है.
राहुल गांधी की निगरानी में यूपी संगठन का नया फॉर्मूला?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बदलाव को लेकर राहुल गांधी की भी संगठनात्मक पर नजर बताई जा रही थी. कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी के तौर पर दलित चेहरे को जिम्मेदारी दी है और अब प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर ब्राह्मण चेहरे को सामने लाया गया है. इसके साथ पश्चिमी यूपी में मुस्लिम चेहरा और पूर्वांचल में दलित तथा अति पिछड़े समाज से जुड़े नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने अपनी नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश की है.



