
लखनऊ, अमृत विचार। प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण व्यवस्था को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में नई पहल की गई है। इसके तहत प्रादेशिक स्टाफ प्रशिक्षण एवं शोध केंद्र, अलीगंज में शोध अनुभाग स्थापित किया जाएगा। शासन या प्रशिक्षण निदेशालय की ओर से सौंपे जाने वाले शोध कार्यों के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन किया जाएगा।
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने मंगलवार को शोध अनुभाग के संचालन से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए। प्रस्तावित शोध अनुभाग का काम ऐसे व्यवसायों की पहचान करना होगा, जो अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के अनुसार नए व्यवसाय शुरू करने, मौजूदा प्रशिक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता का आकलन भी किया जाएगा।
शोध कार्यों के लिए सरकारी और निजी आईटीआई, निजी प्रशिक्षण प्रदाताओं, सफल प्रशिक्षार्थियों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे। इससे आईटीआई प्रशिक्षण को बदलती औद्योगिक जरूरतों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
दो श्रेणियों में होंगे शोध प्रोजेक्ट
शोध कार्यों को अल्पावधि और दीर्घावधि की दो श्रेणियों में रखा गया है। अल्पावधि शोध की न्यूनतम अवधि तीन महीने और दीर्घावधि शोध की न्यूनतम अवधि छह महीने निर्धारित की गई है। निर्धारित अवधि को बढ़ाने के लिए आंकलन समिति की अनुमति जरूरी होगी।
शोध पर होने वाले खर्च में 70 फीसदी राशि मानदेय और 30 फीसदी अन्य कार्यों के लिए निर्धारित की गई है। शोध से जुड़े सभी खर्च चयनित आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से किए जाएंगे। एजेंसी के तौर पर विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक, औद्योगिक प्रतिष्ठान अथवा अन्य गैरसरकारी संस्थाओं का चयन किया जा सकेगा।
प्रवेश, प्रशिक्षण गुणवत्ता और कौशल उन्नयन पर अध्ययन
अलीगंज स्थित प्रशिक्षण केंद्र में एक कक्ष को शोध सेल के रूप में विकसित किया जाएगा। यह अनुभाग आईटीआई में प्रवेश प्रक्रिया में सुधार, विद्यार्थियों के रुझान, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और कौशल उन्नयन जैसे विषयों का अध्ययन करेगा।
पाठ्यचर्या में बदलाव होने पर अनुदेशकों और कार्यशाला अनुदेशकों के लिए आवश्यक सैद्धांतिक एवं प्रयोगात्मक प्रशिक्षण की जरूरत भी चिन्हित की जाएगी। उद्योगों की मांग के आधार पर नए व्यवसाय शुरू करने के विस्तृत प्रस्ताव तैयार होंगे। साथ ही मौजूदा प्रशिक्षण को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
शोध अनुभाग के नोडल अधिकारी पदेन निदेशक , अलीगंज होंगे। शोध विषयों के चयन और प्रस्तावों की निगरानी के लिए क्रियान्वयन समिति बनाई गई है। वहीं, प्रस्तावों के मूल्यांकन और शोध परिणामों के अनुपालन की निगरानी प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाली आंकलन समिति करेगी।
स्मार्ट क्लास और डिजिटल प्रशिक्षण पर भी फोकस
शोध अनुभाग आईटीआई में स्मार्ट क्लास रूम और ऑडियोविजुअल रिकॉर्डिंग लैब विकसित करने की दिशा में भी काम करेगा। सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक प्रशिक्षण को ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल करने की योजना भी इसमें शामिल है।
इसके अलावा राजकीय आईटीआई के भंडार और कार्यालयों के डिजिटलीकरण पर काम किया जाएगा। मशीनरी, साजसज्जा और उपकरणों की खरीद में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक विशिष्टियां तैयार की जाएंगी। प्रशिक्षार्थियों को सरकारी नीतियों की जानकारी देकर उन्हें उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर रहेगा।
LMS से लर्निंग आउटकम की होगी निगरानी
राजकीय आईटीआई के प्रशिक्षार्थियों के लर्निंग आउटकम की निगरानी के लिए लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसमें संस्थान, व्यवसाय और माहवार प्रशिक्षण का पूरा ब्योरा दर्ज होगा।
एलएमएस के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण कराया गया या नहीं, प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी रही और उसमें सुधार के लिए किन कदमों की आवश्यकता है। प्रशिक्षण की निगरानी कार्यशाला अनुदेशक और प्रधानाचार्य करेंगे।
दिशानिर्देशों में यह प्रावधान भी किया गया है कि शोध अनुभाग का काम बढ़ने की स्थिति में उसके लिए अलग भवन बनाने का प्रस्ताव भेजा जा सकेगा।
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