
अमृत विचार लखनऊ: देश भर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती धांधली के मामलों में अब नकल माफिया की रीढ़ तोड़ने की तैयारी है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्नपत्र लीक में शामिल दोषियों और उनके परिवार के सदस्यों की चलअचल संपत्ति ज़ब्त करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी है। यह मामला न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के सामने आया। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सभी राज्यों को इसमें पक्षकार बनाया गया है, इसलिए सभी को अपना जवाब दाखिल करने का मौका मिलना चाहिए। अदालत ने प्रतिवादियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली तारीख 6 हफ्ते बाद तय की।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि दोषियों और उनके रिश्तेदारों की पूरी संपत्ति का हिसाब लगाकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कड़े कानूनों के तहत ज़ब्त की कार्रवाई की जाए। इन मामलों में पेपर लीक माफिया पर चल चुका है कानूनी चाबुक
NEETUG 2024 लीक और PMLA कार्रवाई
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में लीक के बाद सीबीआई और ईडी ने मोर्चा संभाला। बिहार और झारखंड के मुख्य आरोपियों की अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को ईडी ने चिन्हित कर कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की।
राजस्थान REET व SI भर्ती लीक
राजस्थान में माफिया के हौसले तोड़ने के लिए राज्य सरकार ने आरोपी भूपेंद्र सरन और सुरेश ढाका जैसे मास्टरमाइंड्स के कोचिंग सेंटरों और अवैध घरों पर सीधे बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया और संपत्तियां कुर्क कीं। इसके बाद राज्य में संपत्ति ज़ब्ती का विशेष कानून भी बना।
यूपी सिपाही व UPTET लीक
उत्तर प्रदेश में पेपर लीक सिंडिकेट के सरगना राजीव नयन मिश्रा और रवि अत्री जैसे आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट और PMLA लगाया गया। ईडी की लखनऊ इकाई ने हाल ही में इनकी 1 करोड़ रुपए से अधिक की प्रॉपर्टी ज़ब्त की और एसटीएफ ने काली कमाई से बने घरों व गाड़ियों को कुर्क किया।
रिपोर्ट : दरख्शां कदीर सिद्दीकी



