भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत में जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है. इसका कारण भी है. भारत में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार चली गई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड ऐनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार 8 सितंबर को देश में इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 100.75 डॉलर देखने को मिल रही है. वैसे शुक्रवार को इसकी कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी. जानकारों की मानें तो मिडिल ईस्ट में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होने की वजह से इंडियन बास्केट में इजाफा देखने को मिला है. इससे पहले आखिरी बार मई के महीने में इंडियन बास्केट के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार देखने को मिले थे.

जानकारों की मानें तो आने वाले कुछ दिन अगर इंडियन बास्केट के दाम 100 डॉलर और उससे ऊपर बनी रहती है तो पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 से 5 रुपए प्रति लीटर का इजाफा देखने को मिल सकता है. वैसे सऊदी अरब के पेट्रोलियम फैसिलिटी पर हूथी हमले के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है और कारोबारी सत्र के दौरान 100 डॉलर के करीब दिखाई दिए. जिसके जल्द ही 100 डॉलर के पार जाने की संभावना दिखाई दे रही है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पीपीएसी की ओर से किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं….
मई के बाद 100 डॉलर के पार इंडियन बास्केट
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत में इजाफा होने की वजह से इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत 100 डॉलर के पार चली गई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड ऐनालिसिस सेल के आंकड़ों के अनुसार 8 सितंबर को 100.75 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिली है, जो कि शुक्रवार को 101 के लेवल को पार कर गई थी. इसका मतलब है कि ये लगातार दूसरा कारोबारी दिन है, जबकि देश में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिल रही है. वैसे देश में कच्चे तेल की कीमत मई के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार दिखाई दी हैं. उससे पहले अप्रैल के महीने में इंडियन बास्केट के दाम 114.48 डॉलर प्रति बैरल पर दिखाई दिए थे. जबकि मई के महीने में औसत की कीमत 106.23 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिली. जून, जुलाई और अगस्त के महीने में औसत दाम क्रमश: 83.22 डॉलर, 82.04 डॉलर और 90.19 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिले हैं.
जुलाई के बाद से 23 फीसदी महंगा
खास बात तो ये है कि जुलाई महीने के बाद से इंडियन बास्केट में करीब 23 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है. आंकड़ों को देखें तो जुलाई के महीने में औसत कच्चे तेल की कीमत 82.04 डॉलर प्रति बैरल पर थी. मौजूदा समय में यही दाम 100.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुकी है. इसका मतलब है कि इंडियन बास्केट में करीब 18 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हो चुका है. वैसे अप्रैल के 114.48 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले में इंडियन बास्केट क्रूड करीब 12 फीसदी सस्ता है, लेकिन देश में देश में पेट्रोल की कीमतों में इजाफा करने के लिए इंडियन बास्केट का 100 डॉलर प्रति बैरल होना ही काफी है. जानकारों की मानें तो अगर पूरे सितंबर के महीने में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा देखने को मिली तो अक्टूबर के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा देखने को मिल सकता है.
कितना मंहगा हो सकता है पेट्रोल और डीजल?
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर पेट्रोल और डीजल की कीमत में कितना इजाफा देखने को मिल सकता है. कमोडिटी एक्सपर्ट ने अनुज गुप्ता बताया कि अगर पूरे सितंबर के महीने में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार रहती है तो अक्टूबर के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 से 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. वैसे उन्होंने ये भी कहा कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों में काफी अनिश्चितता है. मिडिल ईस्ट में टेंशन की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है. वहीं दूसरी ओर भारत में कच्चे तेल की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है. भारत के पास अब मौजूदा समय में पहले से ज्यादा सप्लायर हैं.
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम
वहीं इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत की बात करें तो खाड़ी देशों का कच्चा तेल 99 डॉलर के पार चला गया. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी क्रूड के दाम करीब 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ करीब 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. सऊदी अरब की जिजान रिफाइनरी पर हुए हालिया हमले से भी तेल की कीमतें बढ़ गईं.
यमनी सेनाएं अक्सर इस रिफाइनरी को निशाना बनाती रही हैं, जिसकी रोजाना 400,000 बैरल कच्चा तेल प्रोसेस करने की क्षमता है. तेल के लिए एक और तेजी वाली खबर यह है कि ईरान ने सोमवार को कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट में एक नया शिपिंग कॉरिडोर बनाएगा. इससे संकेत मिलता है कि इस जलमार्ग में टैंकरों का आवागमन पहले से भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसेन रेजाई ने कहा कि हाल के दिनों में, वॉशिंगटन को ईरान की नई मिसाइलों से साफ चेतावनी मिली है. आर्थिक युद्ध का जवाब पर्शियन गल्फ में समुद्री निषेध क्षेत्र बनाकर और नाकेबंदी के दायरे तक कार्रवाई करके दिया जाएगा. अमेरिकी युद्धपोतों और ठिकानों के प्रति ऑपरेशनल रुख में बुनियादी बदलाव किया गया है.



