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​PF फंड में आएगी तेजी! सैलरी लिमिट बढ़ने से 25% बढ़ सकता है EPFO योगदान

17 सितंबर से वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए किए जाने के बाद, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में कुल योगदान 202728 में 25 फीसदी तक बढ़ सकता है. EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 240वीं बैठक 19 नवंबर को होनी है. इसमें 202627 के रिवाइज्ड अनुमान और 202728 के बजट अनुमान पर विचार किया जाएगा. एजेंडे में एक प्रस्ताव यह भी है कि नए प्राप्त फंड का 3 फीसदी तक हिस्सा ‘अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स’ में निवेश किया जाए. यह निवेश सीधे या ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ योजना के जरिए किया जा सकता है, बशर्ते कुल निवेश सीमा 5 फीसदी से अधिक न हो.

​PF फंड में आएगी तेजी! सैलरी लिमिट बढ़ने से 25% बढ़ सकता है EPFO योगदान

कितने योगदान का है अनुमान

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 202627 में कुल योगदान 4.12 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो बजट में तय किए गए 3.80 लाख करोड़ रुपए से 8.37 फीसदी अधिक है. 202728 के लिए योगदान का बजट 4.75 लाख करोड़ रुपए रखा गया है, जो 202627 के बजट अनुमान से 25 फीसदी ज्यादा है. ये अनुमान काफी सतर्कता के साथ लगाए गए हैं. इनमें उन कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया है जिनका मासिक वेतन 15,001 से 25,000 रुपए के बीच है और जो अभी इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं. इसमें कहा गया है कि सैलरी लिमिट बढ़ने से मेंबर्स की संख्या में संभावित बढ़ोतरी होगी, जिससे अतिरिक्त योगदान भी प्राप्त हो सकता है. लेकिन, 202627 के संशोधित अनुमान और 202728 के बजट अनुमान में इस अतिरिक्त योगदान को शामिल नहीं किया गया है. इसमें आगे कहा गया कि ये अनुमान इसलिए सतर्कता के साथ तय किए गए हैं ताकि बजट के आंकड़े यथार्थवादी रहें और रियल रिसिप्ट्स से अधिक न हो जाएं.

स्टार्टअप्स में निवेश

वर्तमान में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास 1,850 से अधिक AIFs रजिस्टर्ड हैं. 30 जून 2026 तक, AIFs में 7.10 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया था, जबकि कुल 7.58 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए थे और 17.53 लाख करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता मिली थी. अपने प्रस्ताव में कहा गया है कि, नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड द्वारा सीधे प्रबंधित AIFs में, और सिडबी द्वारा प्रबंधित ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ योजना के माध्यम से AIFs में निवेश की अनुमति दी जा सकती है. यह निवेश ‘पैटर्न ऑफ इन्वेस्टमेंट’ के तहत लागू शर्तों के अनुसार होगा.

EPFO बोर्ड से इस बात की भी मंजूरी मांगेगा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान एक्सचेंजट्रेडेड फंड यूनिट्स के रिडेम्पशन को लेकर यथास्थिति बनाए रखी जाए, क्योंकि इसकी रिडेम्पशन नीति में तय किए गए मानदंड पूरे नहीं हुए हैं. चालू वित्त वर्ष के दौरान किसी भी ETF का रिडेम्पशन नहीं हुआ है. इसका मुख्य कारण यह है कि होल्डिंगपीरियड का रिटर्न, पिछले 10 वर्षों के औसत पांचवर्षीय रिटर्न से अधिक नहीं रहा है, जो कि नीति के अनुसार एक जरूरी शर्त है.

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