FPI Outflow:भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से भारी गिरावट देखने को मिल रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार हो रही पैसे की निकासी है. अब इस बिकवाली को रोकने के लिए केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है. सरकार लॉन्गटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के साथ सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी साफ किया है कि वो LTCG को लेकर निवेशकों की चिंताओं पर गौर करेंगी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस मामले में बहुत सोचसमझकर आखिरी फैसला लिया जाएगा.

वित्त मंत्रालय की बैठक में क्या सुझाव आए
इस गंभीर मुद्दे का हल निकालने के लिए वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बाजार के बड़े जानकारों के साथ बैठकें की हैं. इकोनॉमिक टाइम्स ने 28 अक्टूबर को ही बताया था कि मंत्रालय ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से राय मांगी है. इस चर्चा से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार के सामने कई अलगअलग सुझाव आए हैं. कुछ का कहना है कि LTCG टैक्स को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए, तो कुछ ने इसकी दरों को कम करने की सलाह दी है. एक सुझाव ये भी है कि सिर्फ विदेशी निवेशकों के लिए इस टैक्स को हटा दिया जाए. वहीं, STT को लेकर सुझाव दिया गया है कि इसे कुछ प्रोडक्ट्स पर घटाया जाए जबकि कुछ पर बढ़ाया जाए.
RBI से लेकर सेबी तक बदलाव के पक्ष में
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक से लेकर मार्केट रेगुलेटर सेबी तक इस बात के समर्थन में हैं कि भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए LTCG टैक्स को हटा दिया जाना चाहिए. बैठक में शामिल ज्यादातर लोगों ने भी शेयरों पर से LTCG खत्म करने की वकालत की है. हालांकि, उन्होंने ये सुझाव भी दिया कि सरकार कैश या फ्यूचर्स ट्रांजैक्शन को छेड़े बिना सिर्फ ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT में मामूली बढ़ोतरी कर सकती है. उनका तर्क है कि रोजाना के कारोबार में सबसे बड़ा हिस्सा ऑप्शंस ट्रेडिंग का होता है. रेगुलेटर भी इसमें हो रही अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
सरकारी खजाने पर असर, घरेलू निवेशकों की चिंता
सरकार के लिए LTCG या STT में कटौती का फैसला लेना इतना आसान नहीं होगा. वित्त वर्ष 2025 में सरकार को LTCG से 1.29 लाख करोड़ रुपये का भारीभरकम राजस्व मिला था, जबकि STT से 57,522 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. टैक्स में किसी भी तरह की कटौती करने से पहले सरकार को अपने राजस्व के नुकसान का हिसाब लगाना होगा, क्योंकि इसी पैसे से सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के अलावा सब्सिडी का खर्च चलता है. दूसरी तरफ, कुछ जानकारों ने सिर्फ विदेशी निवेशकों को टैक्स में छूट देने के खिलाफ चेतावनी दी है. उनका कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो घरेलू निवेशक इसकी कड़ी आलोचना करेंगे. फिलहाल एक साल तक होल्ड किए गए लिस्टेड शेयरों पर 20 फीसदी शॉर्टटर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है. वहीं एक साल से ज्यादा समय तक शेयर रखने पर 12.5 फीसदी LTCG टैक्स देना पड़ता है.
डॉलर में रिटर्न घटने से परेशान हैं विदेशी निवेशक
विदेशी निवेशकों का तर्क है कि एशिया के कई दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के बाजारों में LTCG टैक्स नहीं लगता है, जिससे भारत को नुकसान हो रहा है. बाजार के जानकारों ने बताया कि रुपये में आ रही गिरावट के साथ कैपिटल गेन्स टैक्स के दोहरे असर ने विदेशी निवेशकों के डॉलर के हिसाब से मिलने वाले रिटर्न को काफी कम कर दिया है. इसी वजह से उन्हें दूसरे देशों के बाजार ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं. बैठक में एक सुझाव ये भी आया कि विदेशी निवेशकों के टैक्स योग्य मुनाफे की गणना रुपये के बजाय डॉलर में की जाए. इसके अलावा, कुछ FPI प्रतिनिधियों ने भारत में पैसा लाने से लेकर उसे वापस ले जाने तक की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग भी रखी है. अधिकारियों ने सभी के सुझावों को बड़े ध्यान से सुना है. अब इन सभी पहलुओं के असर की जांच करने के बाद ही सरकार कोई अंतिम फैसला लेगी.



