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​Sehat Samvad 2026: साइलेंट किलर है मोटापा…. इसे कैसे डील करते हैं लोग? डॉक्टरों ने बताया

भारतीयों में मोटापा एक तेजी से बढ़ती हुई लाइफस्टाइल प्रॉब्मल है. डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट इसे बीमारी तक बुलाते हैं. लोगों का बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल और खराब खानपान शुरू में वजन के बढ़ने का शिकार बनाता है. वेट को कंट्रोल न किया जाए तो एक समय पर मोटापे की शिकायत हो जाती है. डॉक्टर प्रसून चटर्जी कहते हैं कि मोटापा एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है और पैथोलॉजिकल कंडीशन भी है.

​Sehat Samvad 2026: साइलेंट किलर है मोटापा…. इसे कैसे डील करते हैं लोग? डॉक्टरों ने बताया

हम भारतीय रिस्क ऑफ ओबेसिटी और ओबेसिटी, दोनों की चपेट में हैं. आजकल टेक्नोलॉजी का जमाना है और ज्यादातर लोग अपने बीएमआई से लेकर वेट मैनेजमेंट पर फोकस करते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं जब तक वजन ज्यादा नहीं बढ़ जाता, तब तक हम इस पर ध्यान नहीं देते हैं.

वैसे वजन को लेकर आजकल लोगों की सोच बिल्कुल बदल गई है. डॉक्टर प्रसून के मुताबिक एक समय था जब लोग खाते पीते घर का है, ये बहुत अच्छा मानते थे. पर अब स्लिम और वेट मैनेजमेंट को बेस्ट पर्सनालिटी माना जाता है. ये अवेयरनेस या बदलाव GenZ में काफी आया है. आजकल 14 साल का बच्चा भी जंक फूड्स या दूसरी वेट बढ़ाने वाली चीजों से दूरी बना रहा है.

कैसी प्रॉब्लम है मोटापा?

डॉक्टर प्रसून चटर्जी कहते हैं कि ये एक मिक्सड ऑफ मेटाबॉलिक लाइफस्टाइल एंड पैथालॉजिक प्रॉब्लम है. कुछ मामलों में इससे होर्मोनल इशूज भी जुड़े हुए होते हैं. महिलाओं की बात करें तो मेनोपॉज के बाद उनमें मोटापा बढ़ता है. वहीं पुरुषों में एक उम्र बढ़ने के बाद वजन तेजी से बढ़ने के मामले देखे जाते हैं.

डॉक्टर ने बताया ये लाइफ पर बुरा असर डालता है और एक तरह से साइलेंट किलर भी है. देखा जाता है कि जितने लोग ओवरवेट हैं, उनका लाइफ स्पैन यानी कितनी लाइफ जीएंगे और हेल्थ स्पैन यानी कितने हेल्दी जीएंगे, वो काफी कम हो जाता है. इसमें 5 से 10 साल का अंतर देखा जाता है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि ये कई चीजों का मेल है, आप जीवन में किस जगह है, आपकी उम्र क्या है, महिला हैं तो प्रीमेनोपोजमेनोपॉज की कंडीशन है, इसलिए मोटापे के होने में कई चीजें जिम्मेदार होती हैं.

मोटापे का असली कारण क्या है?

सेहत संवाद में शामिल हुए डॉक्टर विवेक बिंदल कहते हैं कि मल्टी फैक्टोरियलडिजीज है. इसमें जेनेटिक, एनवायरमेंट, लाइफस्टाइल, फिजिकल एक्टिविटी और हमारा स्क्रीन टाइम भी प्ले करता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि बीते 30 सालों में जिस तेजी से मोटापे के मामले बढ़े हैं उतनी तेजी से लोगों के लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं आए हैं.

अब इसको एक एपिडेमिक डिजीज की तरह समझा जा रहा है. चीजों पर पेस्टिसाइड्स या दूसरे तरीके शामिल करने से लोगों का सेम फूड पर डाइजेशन बदल गया है. इस वजह से ज्यादा फैट एब्जॉर्बशन, ज्यादा ग्लूकोज एब्जॉर्बशन हो रहा है जिससे फैटी लिवर की समस्या हो रही है. किडनी के ऊपर भी फैट आने लगता है.

लाइफस्टाइल में फिजिकल एक्टिविटी कम होना, पॉल्यूशन बढ़ना और स्क्रीन टाइम ज्यादा होने की वजह से लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं. जंक फूड के अलावा आसानी से कैलोरी इंटेक का हो जाना भी वजन के बढ़ने का कारण है. इसलिए ये मल्टी फैक्टोरियल डिजीज है.

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