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​Sehat Samvad 2026: भारत में कैंसर होने का लेट पता क्यों चलता है? डॉक्टरों ने इस गलती को बताया बड़ा कारण

टीवी9 भारतवर्ष की ओर से आयोजित कार्यक्रम सेहत संवाद में कैंसर को लेकर चर्चा हुई. इसमें एम्स , सर गंगाराम और दूसरे हॉस्पिटल के कैंसर स्पेशलिस्ट ने कई जरूरी बातें बताई. एक्सपर्ट ने कैंसर के देर से पता चलने और इसके इलाज में क्याक्या कमियां आती हैं इस पर अपनी राय रखी. भारत में जब पता चलता है कि कैंसर हो गया है तो लोगों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है. भारत में कैंसर का लेट स्टेज में पता चलना, दवाओं की कमी, टेस्ट न कराना जैसी कई कमियां हैं और इस वजह से हर साल अलगअलग कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है.

​Sehat Samvad 2026: भारत में कैंसर होने का लेट पता क्यों चलता है? डॉक्टरों ने इस गलती को बताया बड़ा कारण

आखिर भारत में कैंसर होने का लेट पता क्यों चलता है. सेहत संवाद में शामिल हुए पैनल ने इसके कई कारण गिनाए. चलिए आपको बताते हैं? साथ ही जानें कैंसर से लड़ाई के लिए हमें किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए.

कैंसर के खिलाफ इलाज में कमी

डॉक्टर श्याम अग्रवाल कहते हैं कि कैंसर डिजीज ऑफ जीन्स है. भारत की समस्या है कि यहां जीन्स की खराबी दिख रही है लेकिन दवाएं मौजूद नहीं हैं. हजारों जीन्स हैं और दवाएं सिर्फ 5060 के लिए ही बनी हैं. बात करें यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देशों की तो यहां अगर 100 कैंसर के नए रोगी होते हैं तो 80 से भी ज्यादा लोगों को परमानेंट ठीक किया जा सकता है और ये बहुत बड़ी बात है.

दूसरी तरफ विकासशील देश इंडिया में लेट पता चलता है क्योंकि यहां अर्ली डिटेक्शन की सेवा धीमी है. डॉक्टर कहते हैं कि जल्दी पता चलने से ठीक होने के चांस 90 फीसदी है.

कैंसर का देर से क्यों पता चलता है?

डॉक्टर कहते हैं कि देश में कैंसर का लेट से पता इसलिए चलता है क्योंकि यहां सही जांच करवाते ही नहीं हैं. अगर डॉक्टर कहता है तो लोग आलस या खर्चा बचाने के लिए कैंसर से जुड़े टेस्ट नहीं करवाते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि शरीर में कई तरह के कैंसर होते हैं और इसके लिए एक्सपर्ट की सलाह पर नीडल टेस्ट, बायोपसी को जरूर कराएं.

डॉक्टर अंशुमन कहते हैं कि अर्ली डिटेक्शन के लिए जागरूकता न के बराबर है. कैंसर के खिलाफ सुविधाओं की कमियां हैं, इसलिए कैंसर का अर्ली डिटेक्शन नहीं हो पाता है. घर पर ही इसका टाइम से पता लगाने का सबसे बड़ा तरीका असामान्य लक्षण हैं. अगर लक्षण तीन हफ्ते बाद भी वहीं बरकरार हैं, तो तुरंत कैंसर से जुड़ी जांच करवानी चाहिए.

इलाज कराने से बचना

फोर्टिस शालीमार बाग में जीआई ऑन्कोलॉजी, मिनिमल एक्सेस एवं बेरियाट्रिक सर्जरी के चेयरमैन डॉक्टर प्रदीप जैन कहते हैं कि बाबाओं से इलाज की मानसिकता भारत में अभी भी लोगों में बनी हुई है. डॉक्टर कहते हैं कि अवेयरनेस का होना सबसे जरूरी है. इलाज न कराने का सबसे बड़ा कारण खराब फाइनेंशियल कंडीशन है. इसलिए लोग सस्ते के चक्कर में आसपास ही इलाज करवाने लगते हैं.

कैसे होनी चाहिए कैंसर स्क्रीनिंग

डॉक्टर अर्पित जैन ने स्क्रीनिंग के लिए ने कहा कैंसर को स्टेज या फेस वाइस लेना चाहिए. स्क्रीनिंग मेथर्ड गाइडलाइन सपोर्ट होना चाहिए.

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