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​Share Market Fall: BSE 500 की 200 से ज्यादा कंपनियों का बुरा हाल, 5 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे शेयर

Share Market Fall: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए मौजूदा समय काफी मुश्किल भरा साबित हो रहा है. बाजार का मूड इस वक्त पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है. अगर आप BSE 500 इंडेक्स पर नजर डालें, तो स्थिति काफी चिंताजनक दिखती है. इस इंडेक्स की 202 कंपनियां इस वक्त अपने पांच साल के औसत वैल्यूएशन से भी नीचे ट्रेड कर रही हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार में निवेशकों का भरोसा काफी हद तक डगमगा गया है. इसके अलावा एक बड़ा सच ये भी है कि पिछले दो सालों में BSE 500 की लगभग दोतिहाई कंपनियों ने निवेशकों को कोई भी सकारात्मक रिटर्न नहीं दिया है.

​Share Market Fall: BSE 500 की 200 से ज्यादा कंपनियों का बुरा हाल, 5 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे शेयर

सेंसेक्स में भारी गिरावट का असर

पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में सेंसेक्स ने 86,159 का अपना बड़ा रिकॉर्ड हाई बनाया था. अब ये अपने उस शानदार शिखर से लगभग 16 फीसदी नीचे आ चुका है. सेंसेक्स अपनी ऊंचाई को बरकरार नहीं रख पाया, जिसका सीधा असर इंडेक्स की बाकी कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा है. BSE 500 में कुल 500 कंपनियां शामिल हैं, लेकिन इनमें से 125 कंपनियां ऐसी हैं जो पिछले पांच सालों में या तो नई लिस्ट हुई हैं या कॉर्पोरेट पुनर्गठन के कारण दोबारा लिस्ट हुई हैं. इन नई कंपनियों का पांच साल का पुराना डेटा मौजूद नहीं है, इसलिए लॉन्गटर्म वैल्यूएशन के सटीक विश्लेषण के लिए सिर्फ 375 कंपनियों को ही चुना गया है.

मजबूत मुनाफे के बाद भी निवेशक खाली हाथ

बाजार में एक बेहद दिलचस्प लेकिन परेशान करने वाला ट्रेंड देखने को मिला है. बहुत सी कंपनियों ने लगातार दो वित्तीय वर्षों में अपने मुनाफे में अच्छा इजाफा किया है. इसके बावजूद उनके शेयरों ने पिछले दो सालों में निवेशकों को कोई फायदा नहीं पहुंचाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैंपल में ऐसी 97 कंपनियां शामिल हैं जो बेहतर कमाई के बाद भी निवेशकों की झोली भरने में पूरी तरह नाकाम रही हैं. ये कुल 375 कंपनियों के सैंपल साइज का 26 फीसदी से ज्यादा हिस्सा हैं. इससे साबित होता है कि सिर्फ कंपनी का मुनाफा बढ़ना ही शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी बिल्कुल नहीं है.

ग्लोबल टेंशन से बाजार में घबराहट

शेयर बाजार के इस तनावपूर्ण माहौल के पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण मौजूद हैं. पिछले कुछ समय से पश्चिमी एशिया में भूराजनीतिक अनिश्चितताएं काफी तेजी से बढ़ गई हैं. इसका सीधा असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ा है जिससे ऊर्जा की कीमतें काफी अस्थिर हो गई हैं. तेल महंगा होने के कारण लॉजिस्टिक्स से लेकर कमोडिटी तक की लागत में भारी उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में गुड्स से जुड़ी मांग प्रभावित हुई है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, इसलिए ये पश्चिमी एशिया के मौजूदा संकट से सीधे तौर पर प्रभावित होता है.

बैंकिंग सेक्टर का हाल थोड़ा बेहतर

अगर अलगअलग सेक्टर्स की बात करें, तो बैंकिंग सेक्टर ने थोड़ी मजबूती दिखाई है. इस स्टडी में शामिल 314 नॉनबैंकिंग फाइनेंस कंपनियों में से 177 कंपनियां इस वक्त अपने पांच साल के प्राइसअर्निंग मल्टीपल से काफी नीचे ट्रेड कर रही हैं. ये आंकड़ा लगभग 56 फीसदी बैठता है. वहीं दूसरी तरफ लेंडर्स यानी बैंकिंग सेक्टर की स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आती है. कुल 61 बैंकों में से 25 बैंक अपने पांच साल के औसत प्राइसबुक मल्टीपल से नीचे ट्रेड कर रहे हैं. ये आंकड़ा 41 फीसदी है, जो दिखाता है कि गिरावट के इस लंबे दौर में बैंकिंग कंपनियों ने खुद को तुलनात्मक रूप से ज्यादा बेहतर तरीके से संभाला है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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