
लखनऊ, अमृत विचार। एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित गोमती बुक फेस्टिवल में अपनी किताब की लॉन्चिंग की और स्कूली बच्चों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने अंतरिक्ष सफर, बचपन की जिज्ञासा, परिवार और दोस्तों के सहयोग के साथ नई पीढ़ी के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में बड़े सपने देखने के साथ उन्हें हासिल करने के लिए सही दिशा में लगातार प्रयास करना जरूरी है।
लखनऊ से शुरू हुई कहानी, इसलिए यहीं करना चाहते थे किताब लॉन्च
अपनी किताब की लॉन्चिंग को लेकर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि किताब का पहला लॉन्च 25 जून को दिल्ली में हुआ था, लेकिन वह इसे लखनऊ में भी लॉन्च करना चाहते थे। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी अपनी कहानी की शुरुआत इसी शहर से हुई है।
उन्होंने कहा कि किताब लिखने का उद्देश्य बच्चों के भीतर यह विश्वास पैदा करना है कि सफलता की यात्रा कहीं से भी शुरू हो सकती है। उन्होंने अपनी यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी शुरुआत भी एक क्लासरूम से हुई थी। जब उनके लिए अंतरिक्ष तक पहुंचना संभव हुआ है तो आज स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए भी बड़े लक्ष्य हासिल करना संभव है। शुभांशु शुक्ला ने उम्मीद जताई कि अधिक से अधिक बच्चे उनकी किताब पढ़ेंगे और उससे प्रेरणा लेकर भविष्य में देश के लिए बेहतर काम करेंगे।
बच्चों ने अंतरिक्ष और करियर को लेकर पूछे सवाल
गोमती बुक फेस्टिवल में शुभांशु शुक्ला के अपने स्कूल के साथसाथ दूसरे स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में पहुंचे। बच्चों ने उनसे अंतरिक्ष विज्ञान, करियर और आगे बढ़ने के तरीकों को लेकर सवाल पूछे। शुभांशु ने बताया कि बच्चों के सवाल काफी व्यावहारिक थे। विद्यार्थी यह जानना चाहते थे कि वे किस तरह आगे बढ़ सकते हैं और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में किस प्रकार अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के सवालों से स्पष्ट है कि उनमें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की जिज्ञासा और इच्छा मौजूद है। उन्होंने कहा कि अब जिम्मेदारी बड़ों की है कि बच्चों के लिए ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जाए, जिसमें स्कूल से निकलने के बाद वे विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भारत के विकास में योगदान दे सकें।
अल्फा और जेनजी दोनों में हैं अपार संभावनाएं
नई पीढ़ी की क्षमताओं पर बात करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी से ज्यादा सक्षम है। उनके मुताबिक अल्फा और जेनजी दोनों ही स्मार्ट और संभावनाओं से भरी पीढ़ियां हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत बच्चों को सही दिशा देने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक लक्ष्यों की ओर लगाने की है। आज के दौर में बच्चों के सामने अवसरों की कमी नहीं है। उनके पास जानकारी, तकनीक और कई तरह के संसाधन आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, इसके साथ ही उनका ध्यान भटकाने वाली चीजें भी बहुत हैं।
ऐसे माहौल में सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि किस चीज पर ध्यान केंद्रित किया जाए। शुभांशु ने कहा कि बच्चों के साथ संवाद के दौरान उनकी जिज्ञासा साफ दिखाई दी। उनके मन में भविष्य को लेकर कई सवाल हैं और वे जानना चाहते हैं कि किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। बच्चों तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
अंतरिक्ष मिशन में हजारों लोगों की मेहनत
अपने अंतरिक्ष मिशन और व्यक्तिगत यात्रा में परिवार और दोस्तों की भूमिका के सवाल पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं होती। इसके पीछे परिवार, मित्रों और पूरी टीम का योगदान होता है।
उन्होंने अपने मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हजारों लोगों की मेहनत शामिल रही। इसरो की टीम, एक्सिओम की टीम, उनके मित्रों और खास तौर पर परिवार ने लगातार उनका सहयोग किया। इन लोगों के समर्थन के बिना इस तरह की उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं होता।
मुश्किल वक्त को पूरी यात्रा का निष्कर्ष न मानें
बच्चों को संदेश देते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि परिवार और दोस्तों को अपनी सफलता की यात्रा का हिस्सा बनाना चाहिए। जीवन में कभीकभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं और व्यक्ति को लग सकता है कि सब कुछ गलत हो गया है। लेकिन किसी एक समय की परेशानी को पूरी यात्रा का निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन को लंबे समय के नजरिए से देखने की जरूरत है। मुश्किल समय में परिवार सबसे मजबूती से व्यक्ति के साथ खड़ा रहता है। इसलिए सफलता की यात्रा में परिवार और दोस्तों के सहयोग को महत्व देना चाहिए।



