TrendingUttar Pradesh

​सोलर पैनल नहीं लगवाया, फिर भी खाते पर 1.38 लाख का लोन, डीलर के खाते में पहुंची पूरी रकम, बेहद हैरान करने वाला मामला आया सामने

​सोलर पैनल नहीं लगवाया, फिर भी खाते पर 1.38 लाख का लोन, डीलर के खाते में पहुंची पूरी रकम, बेहद हैरान करने वाला मामला आया सामने

बाराबंकी, अमृत विचारः प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने के लिए आवेदन करने वाले बाराबंकी के एक व्यक्ति के नाम पर कथित तौर पर बिना सहमति 1,38,600 रुपये का ऋण स्वीकृत किए जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि भारतीय स्टेट बैंक की हरख शाखा ने ऋण की पूरी रकम डीलर रुद्रा एंटरप्राइजेज के खाते में भेज दी, जबकि आवेदक ने बाद में सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ाई। शिकायत के बाद बैंक ने कंपनी से रकम वापस लेकर ऋण खाता बंद कर दिया। हालांकि, मामले में बैंक की ओर से इसे ‘भूलगलती’ बताया गया है, जिससे ऋण स्वीकृति और राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

दो मई को कंपनी से किया था संपर्क

मामला सफदरगंज थाना क्षेत्र के उधौली निवासी विवेक कुमार से जुड़ा है। उपलब्ध बैंक अभिलेखों के मुताबिक, विवेक कुमार ने दो मई 2026 को तीन किलोवाट का हाइब्रिड सोलर पैनल लगवाने के लिए रुद्रा एंटरप्राइजेज से संपर्क किया था। कंपनी के एजेंट ने उनके दस्तावेजों की प्रतियां ली थीं और करीब 1.90 लाख रुपये की लागत में सोलर पैनल लगाने की बात कही थी। बाद में विवेक कुमार ने सोलर पैनल नहीं लगवाया और प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया। इसके बावजूद बैंक रिकॉर्ड में दो जुलाई 2026 को उनके नाम पर 1,38,600 रुपये का लोन एडवांस दर्ज हो गया।

लोन की रकम उसी दिन कंपनी के खाते में ट्रांसफर

बैंक अभिलेखों के अनुसार, ऋण स्वीकृत होने के दिन ही यानी दो जुलाई को पूरी 1,38,600 रुपये की रकम एनईएफटी के जरिए रुद्रा एंटरप्राइजेज के खाते में भेज दी गई। विवेक कुमार को जब इस ऋण की जानकारी हुई तो उन्होंने मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई। शिकायत संख्या 40017626065851 के तहत प्रकरण की जांच कोतवाली नगर के उपनिरीक्षक अभिषेक राय को सौंपी गई।

जांच रिपोर्ट में लिखा ‘भूलगलती’ से हुआ लोन

जांच आख्या में बताया गया कि बैंक प्रबंधक ने शिकायतकर्ता से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया था, लेकिन फोन नहीं उठ सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई फाइलों के साथ विवेक कुमार का ऋण भी बैंक की ओर से ‘भूलगलती’ से स्वीकृत हो गया था। शिकायत सामने आने के बाद बैंक ने रुद्रा एंटरप्राइजेज से 1,38,600 रुपये वापस ले लिए और पांच जुलाई 2026 को विवेक कुमार का ऋण खाता बंद कर दिया। जांच रिपोर्ट में इसके बाद किसी अन्य कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होने की बात कही गई है।

633 और 22 रुपये ब्याज कटने का दावा

हालांकि, ऋण बंद होने के बावजूद शिकायतकर्ता ने बैंक की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विवेक कुमार का कहना है कि उन्होंने न तो सोलर पैनल लगवाया और न ही ऋण की राशि लेने की सहमति दी, फिर उनके नाम पर ऋण स्वीकृत कैसे हुआ और पूरी रकम कंपनी के खाते में कैसे पहुंच गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि खाते से 633 रुपये और 22 रुपये ब्याज के रूप में भी काटे गए। उनका कहना है कि ऋण बंद कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उनके दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत करते समय सहमति, पहचान और अन्य आवश्यक सत्यापन किस स्तर पर किया गया।

अब उठ रहे ये बड़े सवाल

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बैंक की जांच रिपोर्ट के मुताबिक ऋण ‘भूलगलती’ से स्वीकृत हुआ था तो ग्राहक के दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ? बिना सोलर पैनल लगाए ऋण की पूरी रकम कंपनी के खाते में उसी दिन कैसे पहुंच गई? ऋण स्वीकृति से पहले ग्राहक की सहमति और बैंकिंग प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर किया गया? विवेक कुमार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर ऋण स्वीकृति और रकम हस्तांतरण की प्रक्रिया में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जांच रिपोर्ट में मामले को बैंक की ‘भूलगलती’ बताया गया है और किसी आपराधिक मिलीभगत की पुष्टि नहीं की गई है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply