: दिल्ली पुलिस ने टाटा मोटर्स में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने वाले फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने वजीराबाद के संगम विहार स्थित एक फ्लैट में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर दो महिलाओं समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

फर्जी कॉल सेंटर में नौकरी का झांसा
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह जॉब पोर्टल ऐप से नौकरी तलाशने वाले लोगों का डेटा लेता था। इसके बाद टेली कॉलर नौकरी के इच्छुक लोगों से संपर्क करती थीं और उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर, वेब डिजाइनर, डेटा एनालिस्ट और अकाउंटेंट जैसी नौकरियों का झांसा दिया जाता था।
इस फर्जी भर्ती रैकेट में लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर अलगअलग बहाने से पैसे लिए जाते थे। पुलिस की शुरुआती जांच में करीब 500 लोगों से लगभग 20 लाख रुपए की ठगी का पता चला है।
पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की एएटीएस ने सूचना मिलने के बाद संगम विहार स्थित फ्लैट पर कार्रवाई की। पुलिस ने कॉल सेंटर संचालक सतीश मौर्या समेत दो महिलाओं और दो अन्य टेली कॉलर को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, सतीश पिछले करीब तीन महीने से इस फ्लैट में कॉल सेंटर चला रहा था। इससे पहले भी वह दिल्ली के अलगअलग इलाकों में साझेदारों के साथ कॉल सेंटर चलाता था।
9 मोबाइल और 7 एटीएम कार्ड बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 9 मोबाइल फोन, 7 एटीएम कार्ड और दो बैंक पासबुक बरामद की हैं। पुलिस अब इन सामानों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया।
मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद फर्जी भर्ती के जरिए बेरोजगारों से पैसे लेने वाले इस नेटवर्क की आगे की जांच की जा रही है।
खुद 500 रुपए की ठगी का हुआ था शिकार
पुलिस के मुताबिक, 36 वर्षीय सतीश मौर्या ने एमएससी की पढ़ाई की है। उसने एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स और अन्य संस्थाओं में नौकरी की थी। इसी दौरान उसके साथ नौकरी दिलाने के नाम पर 500 रुपए की ठगी हुई थी।
इसके बाद उसने भी इसी तरह लोगों को ठगने की योजना बनाई। पिछले एक साल से वह अकेले कॉल सेंटर चला रहा था। आरोपी ने बताया कि वह ‘जॉब है सपोर्ट’ ऐप के जरिए नौकरी तलाशने वालों से संपर्क करता था।
पांच चरणों में लेते थे पैसे
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले नौकरी के इच्छुक लोगों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद टेली कॉलर उनसे फोन पर बात करती थीं और नौकरी के लिए इंटरव्यू लेती थीं।
इसके बाद अलगअलग बहाने बनाकर लोगों से पांच चरणों में पैसे लिए जाते थे। जांच में सामने आया है कि इस तरीके से सतीश मौर्या ने करीब 500 लोगों से लगभग 20 लाख रुपए की ठगी की।



