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​​​Facebook-Instagram पर न्यूज डालने वाले मीडिया संस्थानों की बढ़ी चिंता, Meta के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं 10 कंपनियां

​​​Facebook-Instagram पर न्यूज डालने वाले मीडिया संस्थानों की बढ़ी चिंता, Meta के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं 10 कंपनियां

ओस्लो, नॉर्वे: Facebook और Instagram पर खबरें साझा करने वाले मीडिया संस्थानों के सामने नई कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। नॉर्वे के 10 मीडिया संगठनों ने इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मूल कंपनी Meta के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका आरोप है कि कंपनी की नई शर्तों के जरिए मीडिया संस्थानों की खबरों, तस्वीरों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्पाद तैयार करने के लिए किया जा सकता है।

मीडिया संगठनों को आशंका है कि इस दायरे में ऐसी खबरें और लेख भी आ सकते हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए पाठकों को भुगतान करना पड़ता है। उनका कहना है कि पत्रकारिता के लिए रिपोर्टिंग, रिसर्च और सामग्री तैयार करने में काफी समय और पैसा खर्च होता है। यदि इस सामग्री का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना AI सेवाएं विकसित करने में किया जाता है, तो इससे उनके कारोबार और कंटेंट पर अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है।

20 नवंबर से लागू हो सकती हैं नई शर्तें

मीडिया संगठनों के मुताबिक, Meta की नई शर्तें 20 नवंबर 2026 से लागू होने वाली हैं। ये Facebook और Instagram पर बिजनेस अकाउंट चलाने वाले संगठनों और कंपनियों को प्रभावित कर सकती हैं।

संस्थानों की चिंता है कि नई शर्तों के तहत उनकी वेबसाइटों पर प्रकाशित सामग्री का इस्तेमाल AI आधारित सेवाएं विकसित करने के लिए किया जा सकता है। इसमें पेवॉल के पीछे मौजूद सामग्री भी शामिल हो सकती है, यानी वह कंटेंट जिसे पढ़ने के लिए पाठकों को सदस्यता या शुल्क देना पड़ता है।

मीडिया संगठनों का तर्क है कि उनकी सामग्री का इस तरह इस्तेमाल किए जाने से AI कंपनियों को फायदा हो सकता है, जबकि मूल सामग्री तैयार करने वाले संस्थानों को उचित लाभ या नियंत्रण नहीं मिल पाएगा।

अदालत से क्या मांग कर रहे हैं मीडिया संस्थान?

नॉर्वे के 10 मीडिया संगठनों ने ओस्लो की जिला अदालत में याचिका दाखिल कर Meta की नई शर्तों पर रोक लगाने की मांग की है। वे चाहते हैं कि इन शर्तों की कानूनी वैधता स्पष्ट होने तक इन्हें लागू न किया जाए।

इस मामले में सरकारी प्रसारक NRK के साथ Schibsted, Amedia, Polaris और Aller जैसे मीडिया समूहों तथा समाचार एजेंसी NTB के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

मीडिया संस्थानों की मांग है कि उनकी खबरों और अन्य सामग्री का इस्तेमाल करने से पहले उनसे स्पष्ट अनुमति ली जाए। वे चाहते हैं कि उनके कंटेंट पर अधिकार सुरक्षित रहें और कंपनियां उनकी मेहनत से तैयार की गई सामग्री का इस्तेमाल अपनी AI सेवाओं के विकास में मनमाने ढंग से न कर सकें।

Meta ने समयसीमा क्यों बढ़ाई?

रिपोर्ट के अनुसार, Meta ने नई शर्तों को लागू करने की तारीख पहले 30 अक्टूबर रखी थी। मीडिया संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों की आपत्तियों के बाद कंपनी ने इसे बढ़ाकर 20 नवंबर 2026 कर दिया।

कंपनी का कहना है कि अतिरिक्त समय का इस्तेमाल संबंधित पक्षों और साझेदारों को प्रस्तावित बदलावों के बारे में अधिक जानकारी देने के लिए किया जाएगा। हालांकि, मीडिया संस्थानों की चिंताएं पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कंटेंट के अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम भी जरूरी हैं।

AI कंपनियों और मीडिया के बीच क्यों बढ़ रहा है टकराव?

दुनियाभर में मीडिया कंपनियां इस सवाल को लेकर AI कंपनियों से कानूनी और व्यावसायिक स्तर पर टकरा रही हैं कि इंटरनेट पर प्रकाशित खबरों, तस्वीरों और दूसरे कंटेंट का इस्तेमाल AI सिस्टम तैयार करने के लिए किन शर्तों पर किया जा सकता है।

मीडिया संस्थानों का कहना है कि पत्रकारिता के लिए तैयार की गई सामग्री AI सेवाओं के विकास में उपयोगी साबित हो सकती है। ऐसे में कंटेंट तैयार करने वालों की अनुमति, अधिकारों और संभावित मुआवजे को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

नॉर्वे में दाखिल यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और AI कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि, मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत Meta की नई शर्तों पर रोक लगाएगी या नहीं।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। Meta की नई शर्तों और अदालत में दाखिल याचिका से संबंधित अंतिम कानूनी स्थिति के लिए आधिकारिक दस्तावेजों और अदालत के फैसले की प्रतीक्षा की जानी चाहिए।

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