
नई दिल्ली: नौकरी बदलने या कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर कर्मचारियों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि उन्हें ग्रेच्युटी मिलेगी या नहीं। खासकर उन लोगों के लिए यह सवाल अहम है, जो 6 महीने, 11 महीने या एक साल के फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। नए श्रम कानूनों के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की पात्रता में बड़ा बदलाव किया गया है। हालांकि, इसका लाभ हर तरह के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को अपने आप नहीं मिलता।
केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय के मुताबिक, चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से लागू की गईं। सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत पात्र फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है।
क्या 11 महीने की नौकरी पर मिलेगी ग्रेच्युटी?
इस सवाल का सीधा जवाब है कि 11 महीने का फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर सामान्यतः नए नियम के तहत ग्रेच्युटी की पात्रता पूरी नहीं होती। श्रम मंत्रालय की 16 मार्च 2026 तक की आधिकारिक FAQ में भी स्पष्ट किया गया है कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट शुरू होने से एक साल की सेवा पूरी करनी होगी।
इसलिए केवल 11 महीने काम करने या कॉन्ट्रैक्ट की अवधि पूरी हो जाने से एक साल वाली पात्रता अपने आप पूरी नहीं मानी जाएगी। अगर नौकरी की अवधि बढ़ाई गई है, तो नियुक्ति की तारीख, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति जांचनी चाहिए।
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए क्या बदला?
पहले ग्रेच्युटी के सामान्य नियम के तहत कर्मचारियों को आम तौर पर पांच साल की लगातार सेवा पूरी करनी पड़ती थी। नए श्रम कानूनों के तहत पात्र फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का प्रावधान है।
इसका मतलब है कि निश्चित अवधि के लिए सीधे नियुक्त किए गए कर्मचारी भी निर्धारित शर्तें पूरी करने पर ग्रेच्युटी के पात्र हो सकते हैं। हालांकि, किसी ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और कंपनी द्वारा सीधे फिक्स्ड-टर्म पर नियुक्त कर्मचारी की स्थिति अलग हो सकती है। श्रम मंत्रालय की FAQ में इस अंतर को स्पष्ट किया गया है।
स्थायी कर्मचारियों के लिए क्या है नियम?
स्थायी कर्मचारियों के लिए सामान्य तौर पर ग्रेच्युटी पाने की पात्रता पांच साल की लगातार सेवा से जुड़ी है। मृत्यु या दिव्यांगता जैसे निर्धारित मामलों में पांच साल की शर्त लागू नहीं होती। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए लागू विशेष प्रावधान को स्थायी कर्मचारियों के नियम के समान नहीं समझना चाहिए।
ग्रेच्युटी की गणना कैसे होती है?
ग्रेच्युटी की राशि कर्मचारी की पात्र सेवा अवधि और कानून के अनुसार निर्धारित वेतन के आधार पर निकाली जाती है। नए श्रम कानूनों में वेतन की परिभाषा भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ग्रेच्युटी की गणना प्रभावित हो सकती है।
पात्र फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी को एक साल की सेवा पूरी करने पर नियमानुसार आनुपातिक ग्रेच्युटी मिल सकती है। वास्तविक राशि जानने के लिए अपने वेतन का विवरण, नियुक्ति पत्र और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें देखना जरूरी है।
नौकरी छोड़ने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- नियुक्ति पत्र में देखें कि आपकी नियुक्ति सीधे फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी के रूप में हुई है या ठेकेदार के माध्यम से।
- अपनी जॉइनिंग डेट और अंतिम कार्य दिवस का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- कॉन्ट्रैक्ट बढ़ने पर उसकी नई अवधि और शर्तों की लिखित पुष्टि लें।
- ग्रेच्युटी की पात्रता और अनुमानित राशि के लिए HR विभाग से लिखित जानकारी मांगें।
- किसी विवाद की स्थिति में श्रम मंत्रालय के आधिकारिक नियमों या संबंधित श्रम प्राधिकरण से मार्गदर्शन लें।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सरकारी जानकारी और श्रम कानूनों के आधार पर तैयार किया गया है। ग्रेच्युटी की वास्तविक पात्रता कर्मचारी की नियुक्ति के प्रकार, सेवा अवधि और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।



